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Graduate Unemployment: किस देश में कितने ग्रेजुएट्स रह जाते हैं बेरोजगार? गुलजार के 55 वर्ष पुराने गीत पर मुहर लगाती APU की नई रिपोर्ट

Unemployment Graduates: भारत में हर साल करीब 90 से लेकर एक करोड़ छात्र ग्रजुएट हो जाते हैं। लेकिन अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की नई रिपोर्ट में 7 फीसदी से भी कम ग्रेजुएट पुरुष एक साल के अंदर परमानेंट सैलरी वाली नौकरी हासिल कर पाते हैं। आइए जानते हैं कि दुनिया में युवाओं में बेरोजगारी का क्या हाल है?

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Mar 18, 2026
भारत में स्नातक पास युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है।

Graduate Unemployment in India : वर्ष 1971 में एक फिल्म आई थी- 'मेरे अपने।' इस फिल्म में किशोर कुमार और मुकेश की आवाज में एक गाना विनोद खन्ना, डैनी व अन्य कलाकारों पर फिल्माया गया। गाने को गुलजार ने लिखा और संगीत सलिल चौधरी ने दिया है। गाने में कहे गए एक-एक शब्द 55 साल बाद आज भी शब्दश: मौजूं हैं। गाने का मुखड़ा है- 'हालचाल ठीक ठाक है, सब ठीक ठाक है।' इस गाने में आगे की पंक्ति कुछ इस तरह से है- 'बीए किया है, एमए किया है, लगता है वो भी एैवें किया, काम नहीं वर्ना यहां सब ठीक ठाक है।' गुलजार के इस बेरोजगारी पर तंज कसते हुए इस गीत पर 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट मुहर लगाती हुई नजर आ रही है।

Azim Premji University new Report: अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय (Azim Premji University) की 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट (State Of Working India 2026 Report) के अनुसार, भारत में 7% से भी कम स्नातक पुरुष एक साल के भीतर स्थायी वेतन वाली नौकरी हासिल कर पाते हैं। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि सिर्फ 3.7 फीसदी स्नातक को व्हाइट-कॉलर नौकरी मिल पाती है। स्नातक पास युवाओं का सिर्फ भारत में ही नहीं है, बल्कि दूसरे एशियाई देशों में भी बुरा है। आइए जानते हैं कि स्नातक पास युवाओं में सबसे कम बेरोजगारी किन देशों में है?

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12वीं पास का और भी है बुरा हाल

'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 12वीं पास करने वाले केवल 4% पुरुषों को पहले साल में स्थायी नौकरी मिलती है। वहीं 12वीं जमात पास के 1.5 के लिए यह आंकड़ा मात्र 1.5% है।

‘युवा श्रम बाजार: सीखने से कमाने तक के रास्ते’ में रिपोर्ट कहा गया है कि ये आंकड़े चिंताजनक स्थिति दर्शाते हैं, जहां एक साल इंतजार करने के बाद भी सुरक्षित व्हाइट-कॉलर नौकरी मिलना बेहद दुर्लभ है। यह विश्वविद्यालय की पांचवीं स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट है।

सरकार के सर्वे में भी बढ़ती बेरोगारी का जिक्र

सरकारी सर्वेक्षणों में भी युवाओं में उच्च बेरोजगारी स्पष्ट दिखती है। हालिया पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, जहां 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर फरवरी में 4.9% रही, वहीं 15–29 वर्ष के युवाओं में यह लगभग तीन गुना अधिक 14.8% थी।

41% स्नातक और 12वीं पास पुरुष तीन वर्ष बाद भी बेरोजगार

रिपोर्ट के अनुसार, 41% पुरुष (स्नातक या 12वीं पास) चार महीने के भीतर कोई न कोई रोजगार पा लेते हैं, लेकिन लगभग उतने ही लोग तीन वर्षों के बाद भी बेरोजगार रहते हैं। यह आंकड़े CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे (CPHS) पर आधारित हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि युवा स्नातकों में बेरोजगारी एक स्थायी समस्या है, जो 1983 में 35.02% से बढ़कर 2023 में 39.33% हो गई। वहीं 40 वर्ष से अधिक उम्र के स्नातकों में बेरोजगारी 2023 में 1.09% बहुत कम थी। 2023 में 20–29 आयु वर्ग के 63 मिलियन स्नातकों में से लगभग 11 मिलियन बेरोजगार थे।

बेरोजगारी की ये हैं वजह

  1. कम नौकरियों का सृजन बनिस्पत ज्यादा ग्रेजुएट
  2. मनमाफिक नौकरी का इंतजार
  3. प्रतियो​गी परीक्षाओं की तैयार
  4. कौशल बढ़ाना

नॉन ग्रेजुएट से ग्रेजुएट की आय दोगुनी से ज्यादा

पिछले दशक में स्नातक और गैर-स्नातक युवाओं की आय में अंतर कम हुआ है। 2017 के बाद युवा पुरुषों की आय वृद्धि धीमी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा अभी भी लाभदायक है, क्योंकि स्नातकों की आय गैर-स्नातकों से दोगुनी से अधिक है। 2017 में 38% युवा पुरुष शिक्षा में थे, जो 2024 के अंत तक घटकर 34% रह गए। पढ़ाई छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण परिवार की आय में योगदान देना है- जो 2017 में 58% था और 2023 में बढ़कर 72% हो गया।

सबसे गरीब परिवारों में बेरोजगार युवा स्नातकों की हिस्सेदारी बढ़ी

बेरोजगारी अब गरीब वर्गों में भी बढ़ रही है। 1993 में सबसे गरीब 25% परिवारों से आने वाले बेरोजगार युवा स्नातकों की हिस्सेदारी 9% थी, जो 2023 में बढ़कर 16% हो गई। महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 2% से बढ़कर 11% हो गया। यह दर्शाता है कि आय बढ़ने से परिवारों को यह विकल्प मिला कि वे अपने सदस्यों को उनकी योग्यता के अनुसार बेहतर नौकरी खोजने का समय दे सकें।

भारत में ग्रेजुएट युवाओं के बीच बेरोजगारी की हालत ठीक नहीं है, लेकिन दुनिया के दूसरे मुल्कों खासतौर पर दक्षिण एशिया और एशिया के कई देशों में शिक्षित युवाओं के बीच बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों में स्नातक पास युवाओं को नौकरी पाने में बहुत दिक्कत आ रही है। आइए इन देशों में स्नातक पास युवाओं के बीच रोजगार के क्या हाल हैं, जानते हैं।

चीन में हर साल 1 करोड़ 20 लाख युवा स्नातक हो जाते हैं

चीन के युवाओं में बेरोजगारी हाल के वर्षों में काफी चर्चा का विषय रही है। वर्ष 2023-24 के आसपास शहरी युवा बेरोजगारी दर 20% के करीब पहुंच गई थी। यह माना जाता है कि इनमें बड़ी संख्या में डिग्रीधारक युवा बेरोजगार हैं। चीन में हर साल बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों से छात्र निकलते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की धीमी गति और प्राइवेट सेक्टर में गिरावट के कारण नौकरियां सीमित हो गई हैं। एक अनुमान है कि चीन के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से हर साल 11–12 मिलियन स्टूडेंट्स ग्रेजुएट हो जाते हैं।

बांग्लादेश–श्रीलंका और पाकिस्तान में भी स्नातक बेरोजगार

बांग्लादेश में ग्रेजुएट की हालत नौकरी को लेकर और भी बुरी है। डेली स्टार में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यहां 30% से 40% तक ग्रेजुएट युवा बेरोजगार या अर्ध-बेरोजगार हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, 2024 में कुल 26.24 लाख लोग बेरोजगार थे, जिनमें 8.85 लाख विश्वविद्यालय स्नातक शामिल थे। इस दैनिक की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, स्नातकों में बेरोजगारी दर, जो पहले से ही अधिक थी, 2024 में बढ़कर 13.5 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष के 13.11 प्रतिशत से अधिक है। वहीं श्रीलंका में ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी दर लगभग 20% से 25% के बीच बताई जाती है। पाकिस्तान में 25% से 30% ग्रेजुएट युवा बेरोजगार हैं।

वैश्विक स्तर पर 13% ग्रेजुएट बेरोजगार

अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बेरोजगारी दर लगभग 4.9–5% के आसपास है। हालांकि स्नातक पास युवाओं में यह करीब 12–13% है। स्नातक पास को रोजगार देने में अमेरिकार और यूरोप सबसे बेहतर हैं। अमेरिका में युवा ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर लगभग 4.5%–5.7% तक पहुंच गई। यह बेरोजगारी दर पहले की तुलना में ज्यादा है। ग्रेजुएट्स को रोजगार देने के मामले में यूरोप भी बेहतर है। यूरोप में ग्रेजुएट्स की रोजगार दर 80% से अधिक है।

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