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Monsoon Hair Fall : क्या मानसून में पकौड़े-समोसे खाना बना रहा है आपके बालों को ऑयली? डर्मेटोलॉजिस्ट से समझिए

Monsoon Hair Care: मानसून के उमस भरे मौसम में स्कैल्प पर चिपचिपापन, डैंड्रफ और भयंकर हेयर फॉल होना आम है। जानिए डर्मेटोलॉजिस्ट के बताए असरदार हेयर केयर टिप्स, जो आपके स्कैल्प को रखेंगे इन्फेक्शन-फ्री और बालों को बनाएंगे मजबूत।
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Jul 15, 2026
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चिपचिपा स्कैल्प और डैंड्रफ से परेशान? (Photo : AI Generated)

Monsoon Hair Fall : मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन अपने साथ सेहत और त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा मार हमारे बालों और स्कैल्प पर पड़ती है। हवा में अत्यधिक नमी (Humidity) और बार-बार होने वाले पसीने के कारण स्कैल्प हमेशा चिपचिपी बनी रहती है। नतीजा? बालों का अत्यधिक टूटना, जिद्दी डैंड्रफ और स्कैल्प पर फंगल इन्फेक्शन। डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया, मानसून में बालों को खास देखभाल की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में अपने स्कैल्प को हेल्दी और इन्फेक्शन-मुक्त कैसे रखें।

मानसून में क्यों बढ़ जाती है बालों की समस्याएं?

बरसात के दिनों में वातावरण में नमी का स्तर 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस अत्यधिक नमी के कारण हमारी स्कैल्प पर मौजूद सिबेशियस ग्लैंड्स (Sebaceous Glands) ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं और अधिक मात्रा में सीबम (प्राकृतिक तेल) का प्रोडक्शन करने लगते हैं। यह तेल, पसीना और बाहर का प्रदूषण मिलकर स्कैल्प पर एक परत बना लेते हैं। यह माहौल 'मैलासेजिया' (Malassezia) नामक फंगस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है, जो डैंड्रफ और खुजली की मुख्य वजह है। जब स्कैल्प अस्वस्थ होती है, तो बालों की जड़ें (Hair Follicles) कमजोर हो जाती हैं और बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।

डॉ.पुनीत अग्रवाल के साथ पत्रिका की खास बातचीत

अक्सर देखा गया है कि जैसे ही पहली बारिश आती है, हेयर फॉल अचानक 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इसके पीछे का असली साइंटिफिक कारण क्या है?

पहली बारिश आते ही बालों का झड़ना (Hair Fall) अचानक 2 से 3 गुना बढ़ने के पीछे मुख्य साइंटिफिक कारण हवा में अत्यधिक नमी (High Humidity) और एसिडिक रेन (Acid Rain) है।

  • हाइड्रोजन बॉन्ड का टूटना: वातावरण में नमी बढ़ते ही हवा बाल से पानी सोख लेते हैं। इससे बालों के केराटिन प्रोटीन में मौजूद हाइड्रोजन बॉन्ड कमजोर हो जाते हैं, जिससे बाल कमजोर होकर बीच से टूटने (Hair Breakage) लगते हैं।
  • एसिडिक रेन और प्रदूषक: पहली बारिश के पानी में वायुमंडल के हानिकारक केमिकल्स, सल्फर और प्रदूषक तत्व घुले होते हैं। जब यह पानी स्कैल्प पर पड़ता है, तो जड़ों को कमजोर करता है और इन्फेक्शन बढ़ाता है।
  • फंगल ग्रोथ (Malassezia): अत्यधिक उमस और पसीने के कारण स्कैल्प पर प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली फंगस 'मैलासेजिया' तेजी से बढ़ने लगती है। यह स्कैल्प पर एक चिपचिपी परत बना देती है, जिससे जड़ें अपनी पकड़ छोड़ देती हैं और बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।

मानसून में 'हैवी ऑयलिंग' फायदेमंद या डैंड्रफ को न्योता! इस मौसम में ऑयलिंग का सही फॉमूर्ला क्या है?

इस मौसम में हवा की उमस (Humidity) के कारण स्कैल्प पहले से ही बहुत अधिक सीबम (प्राकृतिक तेल) और पसीना छोड़ती है। जब हम ऊपर से भारी तेल (जैसे नारियल या सरसों का तेल) लगाते हैं, तो यह स्कैल्प पर एक चिपचिपी परत बना देता है। यह परत हवा की धूल और गंदगी को चिपका लेती है, जिससे स्कैल्प के पोर्स (Pores) बंद हो जाते हैं। यह माहौल 'मैलासेजिया' फंगस के पनपने के लिए सबसे मुफीद होता है, जो चिपचिपे डैंड्रफ और खुजली की मुख्य वजह है।

इस मौसम में ऑयलिंग का सही फॉमूर्ला:

  • सीमित समय: तेल को रातभर लगाकर छोड़ने की गलती कभी न करें। शैम्पू करने से सिर्फ 30 मिनट पहले ही तेल लगाएं।
  • हल्का तेल चुनें: भारी तेलों की जगह नारियल का तेल, आर्गन या टी-ट्री ऑयल जैसे हल्के तेलों की कुछ बूंदें ही इस्तेमाल करें।
  • सिर्फ लेंथ पर: तेल को स्कैल्प (जड़ों) पर ज्यादा रगड़ने के बजाय बालों की लेंथ और सिरों (Tips) पर लगाएं ताकि रूखापन दूर हो सके।

मानसून के दौरान होने वाले चिपचिपेपन और फंगल इंफेक्शन से बचाव के लिए शैम्पू खरीदते समय उसके मुख्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स या साल्ट्स (जैसे Ketoconazole या Salicylic Acid) में किन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए?

मानसून के चिपचिपेपन, जिद्दी डैंड्रफ और फंगल इन्फेक्शन से निपटने के लिए आपको अपने रेगुलर कॉस्मेटिक शैम्पू की जगह एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (Active Ingredients) यानी औषधीय साल्ट्स वाले शैम्पू का चुनाव करना चाहिए । ध्यान रहे कि एंटी-फंगल शैम्पू का मुख्य काम स्कैल्प से डैंड्रफ और इन्फेक्शन को साफ करना है, इसका बाल झड़ने की प्रक्रिया (Hair Fall Process) से सीधा कोई लेना-देना नहीं होता। हालांकि, जब स्कैल्प डैंड्रफ-मुक्त और हेल्दी होती है, तो बालों की जड़ें अपने आप मजबूत होने लगती हैं।

  • कीटोकोनाजोल (Ketoconazole): यह एक बेहतरीन एंटी-फंगल एजेंट है। यह मानसून में स्कैल्प पर पनपने वाली 'मैलासेजिया' फंगस को सीधा खत्म करता है, जिससे खुजली और पपड़ीदार डैंड्रफ से तुरंत राहत मिलती है।
  • सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid): यह एक बीटा-हाइड्रॉक्सी एसिड (BHA) है। यह स्कैल्प के चिपचिपेपन (Excess Sebum/Oil) को गहराई से साफ करता है और डेड स्किन की परत को हटाकर पोर्स को खोलता है।
  • जिंक पायरीथियोन (Zinc Pyrithione ZPTO) और सेलेनियम सल्फाइड (Selenium Sulfide): ये दोनों साल्ट्स स्कैल्प पर फंगस और बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकते हैं और तेल के प्रोडक्शन को कंट्रोल करते हैं।
  • इस्तेमाल का सही नियम: इन्फेक्शन होने पर हफ्ते में 2 से 3 बार इन शैम्पू को स्कैल्प पर लगाकर 3-5 मिनट के लिए छोड़ें, फिर सादे पानी से धो लें।

कई लोग फ्रिजी बालों से बचने के लिए स्कैल्प पर ही कंडीशनर या सीरम लगा लेते हैं। आप हेयर प्रोडक्ट्स लगाने का सही 'एप्लीकेशन मेथड' क्या सजेस्ट करेंगे?

फ्रिजी बालों (रूखेपन) से बचने के लिए स्कैल्प पर कंडीशनर या सीरम लगाना एक तरह सही है। दोनों प्रोडक्ट्स का काम और एप्लीकेशन मेथड पूरी तरह अलग है।

  • कंडीशनर लगाने का सही तरीका: कंडीशनर का काम बालों के क्यूटिकल्स को पोषण देना है, जड़ों को नहीं। इसे हमेशा शैम्पू के बाद केवल बालों की लेंथ (लंबाई) और सिरों (Tips) पर लगाएं। स्कैल्प से कम से कम 2 इंच की दूरी रखें। 2-3 मिनट बाद इसे अच्छी तरह पानी से धो लें। स्कैल्प पर लगाने से पोर्स बंद होते हैं और भयंकर हेयर फॉल होता है।
  • हेयर सीरम लगाने का तरीका: सीरम एक शील्ड की तरह काम करता है। इसे बाल धोने के बाद, जब बाल हल्के गीले (Damp Hair) हों, तब हाथों में 2-3 बूंदें रगड़कर केवल बालों की लंबाई पर लगाएं।

उमस के कारण बाल प्राकृतिक रूप से जल्दी नहीं सूखते। ऐसे में गीले स्कैल्प से फंगस का खतरा रहता है। तो क्या मानसून में बालों को सुखाने के लिए ब्लो-ड्रायर का इस्तेमाल करना सुरक्षित है?

हां, मानसून में गीले स्कैल्प पर फंगस के खतरे को टालने के लिए ब्लो-ड्रायर का इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित और जरूरी भी है, बशर्ते आप सही तरीका अपनाएं:

  • 'कूल' या 'मीडियम हीट' मोड: ड्रायर को कभी भी 'हाई हीट' (तेज गर्म हवा) पर न चलाएं। गर्म हवा स्कैल्प को संवेदनशील बनाती है और बालों का मॉइस्चर छीन लेती है। ड्रायर के 'कूल एयर या मीडियम हीट सेटिंग का ही इस्तेमाल करें।
  • दूरी बनाए रखें: ड्रायर को हमेशा अपने सिर से कम से कम 6 से 8 इंच दूर रखकर चलाएं।
  • फोकस स्कैल्प पर हो: ड्रायर की हल्की हवा को सीधे बालों पर मारने के बजाय स्कैल्प की जड़ों की तरफ रखें ताकि वहाँ की नमी जल्दी सूख सके।पहले तौलिये से थपथपाकर 60-70% पानी सुखा लें, फिर ड्रायर की ठंडी हवा से स्कैल्प को ड्राई करें।

बरसात के मौसम में हमारा तला-भुना (पकौड़े, समोसे) खाने का मन ज्यादा करता है। क्या हमारी यह 'Monsoon Diet' भी स्कैल्प के ऑयली होने और बाल टूटने के लिए जिम्मेदार है? बालों की मजबूती के लिए कौन से सुपरफूड्स जरूरी हैं?

Published on:
15 Jul 2026 10:30 am