
Monsoon Hair Fall : मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन अपने साथ सेहत और त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा मार हमारे बालों और स्कैल्प पर पड़ती है। हवा में अत्यधिक नमी (Humidity) और बार-बार होने वाले पसीने के कारण स्कैल्प हमेशा चिपचिपी बनी रहती है। नतीजा? बालों का अत्यधिक टूटना, जिद्दी डैंड्रफ और स्कैल्प पर फंगल इन्फेक्शन। डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया, मानसून में बालों को खास देखभाल की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में अपने स्कैल्प को हेल्दी और इन्फेक्शन-मुक्त कैसे रखें।
बरसात के दिनों में वातावरण में नमी का स्तर 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इस अत्यधिक नमी के कारण हमारी स्कैल्प पर मौजूद सिबेशियस ग्लैंड्स (Sebaceous Glands) ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं और अधिक मात्रा में सीबम (प्राकृतिक तेल) का प्रोडक्शन करने लगते हैं। यह तेल, पसीना और बाहर का प्रदूषण मिलकर स्कैल्प पर एक परत बना लेते हैं। यह माहौल 'मैलासेजिया' (Malassezia) नामक फंगस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है, जो डैंड्रफ और खुजली की मुख्य वजह है। जब स्कैल्प अस्वस्थ होती है, तो बालों की जड़ें (Hair Follicles) कमजोर हो जाती हैं और बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।
अक्सर देखा गया है कि जैसे ही पहली बारिश आती है, हेयर फॉल अचानक 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इसके पीछे का असली साइंटिफिक कारण क्या है?
पहली बारिश आते ही बालों का झड़ना (Hair Fall) अचानक 2 से 3 गुना बढ़ने के पीछे मुख्य साइंटिफिक कारण हवा में अत्यधिक नमी (High Humidity) और एसिडिक रेन (Acid Rain) है।
मानसून में 'हैवी ऑयलिंग' फायदेमंद या डैंड्रफ को न्योता! इस मौसम में ऑयलिंग का सही फॉमूर्ला क्या है?
इस मौसम में हवा की उमस (Humidity) के कारण स्कैल्प पहले से ही बहुत अधिक सीबम (प्राकृतिक तेल) और पसीना छोड़ती है। जब हम ऊपर से भारी तेल (जैसे नारियल या सरसों का तेल) लगाते हैं, तो यह स्कैल्प पर एक चिपचिपी परत बना देता है। यह परत हवा की धूल और गंदगी को चिपका लेती है, जिससे स्कैल्प के पोर्स (Pores) बंद हो जाते हैं। यह माहौल 'मैलासेजिया' फंगस के पनपने के लिए सबसे मुफीद होता है, जो चिपचिपे डैंड्रफ और खुजली की मुख्य वजह है।
इस मौसम में ऑयलिंग का सही फॉमूर्ला:
मानसून के दौरान होने वाले चिपचिपेपन और फंगल इंफेक्शन से बचाव के लिए शैम्पू खरीदते समय उसके मुख्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स या साल्ट्स (जैसे Ketoconazole या Salicylic Acid) में किन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए?
मानसून के चिपचिपेपन, जिद्दी डैंड्रफ और फंगल इन्फेक्शन से निपटने के लिए आपको अपने रेगुलर कॉस्मेटिक शैम्पू की जगह एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (Active Ingredients) यानी औषधीय साल्ट्स वाले शैम्पू का चुनाव करना चाहिए । ध्यान रहे कि एंटी-फंगल शैम्पू का मुख्य काम स्कैल्प से डैंड्रफ और इन्फेक्शन को साफ करना है, इसका बाल झड़ने की प्रक्रिया (Hair Fall Process) से सीधा कोई लेना-देना नहीं होता। हालांकि, जब स्कैल्प डैंड्रफ-मुक्त और हेल्दी होती है, तो बालों की जड़ें अपने आप मजबूत होने लगती हैं।
कई लोग फ्रिजी बालों से बचने के लिए स्कैल्प पर ही कंडीशनर या सीरम लगा लेते हैं। आप हेयर प्रोडक्ट्स लगाने का सही 'एप्लीकेशन मेथड' क्या सजेस्ट करेंगे?
फ्रिजी बालों (रूखेपन) से बचने के लिए स्कैल्प पर कंडीशनर या सीरम लगाना एक तरह सही है। दोनों प्रोडक्ट्स का काम और एप्लीकेशन मेथड पूरी तरह अलग है।
उमस के कारण बाल प्राकृतिक रूप से जल्दी नहीं सूखते। ऐसे में गीले स्कैल्प से फंगस का खतरा रहता है। तो क्या मानसून में बालों को सुखाने के लिए ब्लो-ड्रायर का इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
हां, मानसून में गीले स्कैल्प पर फंगस के खतरे को टालने के लिए ब्लो-ड्रायर का इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित और जरूरी भी है, बशर्ते आप सही तरीका अपनाएं:
बरसात के मौसम में हमारा तला-भुना (पकौड़े, समोसे) खाने का मन ज्यादा करता है। क्या हमारी यह 'Monsoon Diet' भी स्कैल्प के ऑयली होने और बाल टूटने के लिए जिम्मेदार है? बालों की मजबूती के लिए कौन से सुपरफूड्स जरूरी हैं?