नेपाल में ओली सरकार का तख्तापलट हो चुका है। सुशीला कार्की देश की अंतरिम प्रधानमंत्री बन चुकी हैं। नेपाल के Gen-Z ने बीते एक दशक से सत्ता के शीर्ष पर काबिज तीन नेता ओली, प्रचंड और देउबा को राजनीतिक नेपथ्य में पहुंचा दिया।
शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और के.पी. शर्मा ओली, नेपाल की पॉलिटिक्स बीते एक दशक से 8 सितंबर 2025 तक इन्हीं तीनों के ईर्द गिर्द घूमती थी। प्रधानमंत्री की कुर्सी तीनों नेताओं के लिए म्यूजिकल चेयर की तरह थी। ज्योमेट्री में एक फॉर्मूला है। जब त्रिभुज की दो रेखा मिलती है तो वह तीसरी रेखा से बड़ी हो जाती है। नेपाल की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही होता आ रहा था। साल 2015 से अब तक प्रधानमंत्री की कुर्सी इन्हीं के ईर्द गिर्द घूमती रहती। पिछले दस साल में 4 बार केपी शर्मा ओली, 2 बार शेर बहादुर देउबा और 2 बार पुष्प कमल दहल प्रचंड पीएम बने।
साल 2022 में जब नेपाल में आम चुनाव हुए तो शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस को 89, ओली की पार्टी सीपीएन (यूएमएल) को 79 और प्रचंड की पार्टी सीपीएन (माओवादी) को 32 सीटें मिली। 275 सीटों वाली संसद में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। नतीजतन प्रचंड ने ओली से हाथ मिलाया और सरकार का गठन हुआ, लेकिन यह सरकार भी महज 19 महीने चली। इसके बाद ओली ने समर्थन वापस खींचा। प्रधानमंत्री प्रचंड विश्वास मत हार गए। इसके बाद ओली ने शेर बहादुर देउबा से हाथ मिलाया और खुद पीएम की कुर्सी पर काबिज हो गए।
केपी शर्मा ओली: 22 फरवरी 1952 को पूर्वी नेपाल के तेहरीथुम जिले में जन्मे ओली का जीवन संघर्षों से भरा रहा। मात्र 12 वर्ष की आयु में वे झापा चले गए और मार्क्स-लेनिन विचारधारा से प्रभावित होकर 1966 में कम्युनिस्ट राजनीति में प्रवेश किया। 1968 में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने, लेकिन राजतंत्र विरोधी गतिविधियों के कारण 1970-80 के दशक में 14 वर्ष जेल में बिताए, जिसमें चार वर्ष एकाकी कारावास भी शामिल था।
ओली, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (UML) में तेजी से उभरे। साल 1991 में पहली बार प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए। 1994 में गृह मंत्री बने और पार्टी के पोलित ब्यूरो में प्रवेश किया। 1999 में तीसरी बार सांसद बने। 2006-07 में उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रहे। संविधान सभा चुनाव 2013 में झापा से जीते और नेपाल के नए संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2015-16 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन छोटा कार्यकाल रहा। 2018-2021 में दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रवादी नीतियां अपनाईं, भारत के साथ तनाव बढ़ा, लेकिन चीन से संबंध मजबूत किए। 2021 में पार्टी विवादों के कारण पद छोड़ना पड़ा। जुलाई 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन भ्रष्टाचार, आर्थिक ठहराव और सेंसरशिप के आरोपों से जूझे। सितंबर 2025 में युवा-नेतृत्व वाले एंटी-करप्शन प्रदर्शनों में 19 मौतों के बाद इस्तीफा दे दिया
पुष्प कमल दहल प्रचंड: प्रचंड का जन्म 11 दिसंबर 1954 धीपुर पोखाड़ी जिले में हुआ। गरीब किसान परिवार में जन्मे प्रचंड ने कृषि में डिप्लोमा प्राप्त किया। युवावस्था में गरीबी और असमानता से प्रभावित होकर 1981 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (फोर्थ कन्वेंशन) में शामिल हुए। 1980 में 'प्रचंड' नाम से छात्र संगठन का नेतृत्व संभाला।
1996 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी) के अध्यक्ष बने और 13 फरवरी को माओवादी विद्रोह शुरू किया, जो 2006 तक चला। इसने राजतंत्र समाप्त कर नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया। प्रचंड ने शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2008-09 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन सेना प्रमुख बर्खास्तगी विवाद में इस्तीफा दिया। 2016-17 में दूसरा कार्यकाल संभाला। दिसंबर 2022 से जुलाई 2024 तक तीसरा कार्यकाल रहा।
शेर बहादुर देउबा: देउबा का जन्म 13 जून 1946 को दादेलधुरा जिले में हुआ। देउबा ने 1963 में छात्र राजनीति से शुरुआत की। वह नेपाल स्टूडेंट्स यूनियन के संस्थापक और अध्यक्ष बने। पंचायत व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष में 10 वर्ष जेल काटी। 1991 में पहली बार सांसद चुने गए। 1991-94 तक गृह मंत्री रहे। 1995-97 में पहला प्रधानमंत्री कार्यकाल संभाला, जहां महाकाली संधि पर हस्ताक्षर हुए। 2001-02 और 2004-05 में दूसरे-तीसरे कार्यकाल में माओवादी विद्रोह पर दमनात्मक कार्रवाई की। इस दौरान साल 2002 में राजा ज्ञानेंद्र ने उन्हें बर्खास्त कर दिया, लेकिन 2004 में उनकी फिर से नियुक्ति की गई। 2025 में ओली की सरकार में उनकी पत्नी विदेश मंत्री रहीं।