Fish Production Growth in India: मछली उत्पादन में भारत में 2014-15 से 2024-25 के बीच लगभग 106.4% की वृद्धि हुई है। दुनिया में मछली उत्पादन के मामले में देश दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। चीन अभी भी दुनिया में मछली उत्पादक देशों में शीर्ष पर बना हुआ है। भारत में इस अवधि में शीर्ष के दो राज्यों को छोड़कर काफी तब्दीली आई है। आइए जानते हैं, उत्पादन की होड़ में किस राज्य ने तरक्की की और कौन पिछड़ गया?
Fish Production in India: खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization) के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक (India Became Second fish producing Country in the World) देश बन गया है। इस मामले में भारत पहले तीसरे स्थान पर था। भारत वैश्विक खाद्य उत्पादन में लगभग 8% हिस्सेदारी रखता है। मछली उत्पादक देशों में चीन (China top fish producing Country in the World) दुनिया में पहले नंबर है। भारत में मछली उत्पादन 2014-15 में लगभग 95.79 लाख टन सालाना था, जो 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है। आइए जानते हैं कि देश के शीर्ष 10 मछली उत्पादक राज्यों का क्या हाल है?
भारत में लगभग 60% लोग अपने आहार में मछली का सेवन करते हैं। मांसाहारियों को स्वास्थ्य कारणों के चलते चिकित्सक रेड मटन से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, शुगर आदि के मरीजों की बढ़ रही संख्या को देखते हुए डॉक्टर ऐसी सलाह देते हैं। डॉक्टर उन्हें मछली खाने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही सरकारी नीतियों में बदलाव आने के चलते मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
भारत का सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश है। राज्य के पास लंबी समुद्री तटरेखा और यहां मानसून की अच्छी बारिश की वजह से बड़ी संख्या में मीठे पानी के तालाब और झीलें हैं। यही वजह है कि यहां खारे और मीठे पानी की मछियों का उत्पादन बड़ी संख्या में होता है। समुद्री और अंतर्देशीय दोनों प्रकार की मछली पालन गतिविधियां आसानी से होती हैं। यहां रोहू, कतला और झींगा जैसी मछलियां प्रमुख रूप से पाली जाती हैं। सरकार भी किसानों को बेहतर तकनीक और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं प्रदान करती है। आंध्र प्रदेश में वर्ष 2014-15 में मछली का उत्पादन 19.79 लाख टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 55.39 लाख टन हो गया। पिछले 10 वर्षों में राज्य में मछली उत्पादन में लगभग 70% की वृद्धि दर्ज की गई है। देश के कुल मछली उत्पादन में राज्य अकेले लगभग 30–35% योगदान देता है।
आंध्र प्रदेश विशेष रूप से एक्वाकल्चर (Aquaculture) और झींगा (Shrimp) उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां उत्पादित झींगा का बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन में भी वृद्धि होती है। नेल्लोर, कृष्णा और पश्चिम गोदावरी जिले इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र हैं। राज्य सरकार द्वारा आधुनिक तकनीकों, कोल्ड स्टोरेज, फीड प्रबंधन और किसानों को प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देश में मछली उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है। यहां मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। वर्ष 2014-15 में 16.17 लाख से 2024-25 में मछली का उत्पादन बढ़कर 23.74 लाख टन हो गया। यहां मछलियों का उत्पादन 25-30 प्रतिशत की स्थिर ग्रोथ के साथ हो रहा है।
| क्रमांक | राज्य | मछली उत्पादन (2014-15) (लाख टन) |
|---|---|---|
| 1 | आंध्र प्रदेश | 19.79 |
| 2 | पश्चिम बंगाल | 16.17 |
| 3 | गुजरात | 8.10 |
| 4 | केरल | 7.26 |
| 5 | तमिलनाडु | 6.98 |
| 6 | कर्नाटक | 6.23 |
| 7 | महाराष्ट्र | 6.08 |
| 8 | उत्तर प्रदेश | 4.94 |
| 9 | बिहार | 4.80 |
| 10 | ओडिशा | 4.70 |
पश्चिम बंगाल की नदियां, तालाब और झीलें मछली पालन के लिए अनुकूल हैं। यहां रोहू, कतला, भेटकी, बाटा भोला और मृगल जैसी मीठे पानी की मछलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। हिलसा (इलिश) राज्य की सबसे लोकप्रिय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मछली है। हिलसा दुनिया की सबसे महंगी मछलियों में एक है। यह अपने पीक सीजन में 2000-2500 रुपये प्रति किलो तक के भाव से बिकती है। बांग्लादेश की पदमा नदी की हिलसा की बहुत मांग है। राज्य में मछली की मांग बहुत अधिक है और यह अन्य राज्यों व देशों को भी निर्यात करता है। यह करीब 25-30% की स्थिर वृद्धि को दर्शाता है। भारत के कुल मछली उत्पादन में पश्चिम बंगाल लगभग 12-15% योगदान देता है।
गुजरात मछली उत्पादन और निर्यात में अग्रणी राज्यों में से एक है। यहां लगभग 8.35 लाख टन मछली उत्पादन होता है। राज्य भारत के कुल समुद्री मछली उत्पादन में लगभग 20% योगदान देता है। इसके अलावा, गुजरात मछली प्रसंस्करण और निर्यात के लिए भी प्रसिद्ध है। गुजरात देश के प्रमुख समुद्री मछली उत्पादक राज्यों में से एक है और पिछले दशक (2014-15 से 2024–25) में इसने मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। राज्य की लगभग 1,600 किमी लंबी तटरेखा और विकसित बंदरगाह अवसंरचना इसके लिए अनुकूल आधार प्रदान करती है।
आंकड़ों के अनुसार, 2014–15 में गुजरात का कुल मछली उत्पादन लगभग 8.1 लाख टन था। इसका उत्पादन 2020–21 तक बढ़कर करीब 8.5–9 लाख टन और 2024–25 में 10.43 लाख टन हो गया। वर्ष 2014-15 में मछली उत्पादन में गुजरात, देश में मछली उत्पादन में तीसरे स्थान पर था, लेकिन 2024-25 में यह पांचवें पायदान पर पहुंच गया। यहां पम्फ्रेट, झींगा, टूना और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
तमिलनाडु समुद्री मछली उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां लंबी तटरेखा और यहां समुद्र के किनाने मछुआरों के बहुत से गांव बसे हुए हैं। वर्ष 2014–15 में तमिलनाडु का कुल मछली उत्पादन लगभग 6 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2023–24 में लगभग 8.5–9 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। 2024–25 में इसमें और मामूली वृद्धि का अनुमान है। राज्य के कुल उत्पादन में लगभग 65–70% हिस्सा समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) से आता है, जबकि 30–35% अंतर्देशीय (Inland Fisheries) से प्राप्त होता है। यहां की प्रमुख मछलियों में सार्डिन, मैकेरल, टूना और झींगा हैं।
नीचे दिए गए आंकड़ों के आधार पर टेबल प्रस्तुत है:
| क्रमांक | राज्य | मछली उत्पादन (2024-25) (लाख टन) |
|---|---|---|
| 1 | आंध्र प्रदेश | 55.39 |
| 2 | पश्चिम बंगाल | 23.74 |
| 3 | उत्तर प्रदेश | 13.31 |
| 4 | ओडिशा | 11.92 |
| 5 | गुजरात | 10.43 |
| 6 | कर्नाटक | 9.63 |
| 7 | बिहार | 9.60 |
| 8 | तमिलनाडु | 9.48 |
| 9 | केरल | 9.27 |
| 10 | छत्तीसगढ़ | 8.73 |
केरल भारत के प्रमुख मछली उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां लगभग 905 प्रकार की मछलियां पाई जाती हैं। राज्य में वर्ष 2014-15 में लगभग 7.26 लाख टन वार्षिक उत्पादन होता है, जबकि 2023 में यह बढ़कर लगभग 9.21 लाख टन हो गया। वहीं 2024-25 में राज्य में मछली का उत्पादन बढ़कर 9.27 लाख टन हो गया। करिमीन (Pearl Spot) यहां की सबसे लोकप्रिय मछली है। करिमीन को राज्य की मछली का दर्जा प्राप्त है। इसकी बहुत मांग है। यहां समुद्री और अंतर्देशीय दोनों प्रकार का मत्स्य उत्पादन होता है। राज्य में लगभग 6–7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक मछली उत्पादन होता है, जिसमें समुद्री क्षेत्र का बड़ा योगदान है। अरब सागर से सटे होने के कारण यहां मछली पकड़ने की गतिविधियां व्यापक हैं। केरल में प्रमुख मछलियों में करिमीन के अलावा सार्डिन, मैकेरल, झींगा (Prawn) और टूना का उत्पादन होता है।
ओडिशा में 2020-21 के दौरान लगभग 8.73 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में 2.33% योगदान देता है। मत्स्य क्षेत्र यहां लगभग 13% वार्षिक दर से बढ़ रहा है। यहां वर्ष 2014-15 में मछली का उत्पादन 4.7 लाख टन होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 8.7 लाख टन हो गया। यहां की नदियों और तालाबों में प्रमुख रूप से रोहू, कतला, मृगल, हिलसा, झींगा, भाकुरा, मांगुर, सिल्वर पाई जाती हैं। हिलसा समुद्र और नदी दोनों में पाई जाती है और इसकी यहां बहुत मांग है।
कर्नाटक में मछलियों के उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यहां वर्ष 2014-15 में मछलियां का उत्पादन 6.23 लाख सालाना था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9.63 लाख टन तक पहुंच गया। यहां की प्रमुख मछलियों में से बंगुडे, बूथायी और काने जैसी मछलियां लोकप्रिय हैं।
बिहार में मांसाहारियों के बीच मछली काफी लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है। यहां वर्ष 2014-15 में मछलियां का उत्पादन 4.8 लाख सालाना था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9.6 लाख टन तक पहुंच गया। देश में बिहार 2014-15 में मछली उत्पादन के मामले में नौंवे स्थान पर था, जबकि 2024-25 में यह सातवें पायदान पर पहुंच गया। यहां रोहू सबसे लोकप्रिय और बड़े पैमाने पर खाई जाने वाली मछली है। रोहू के अलावे कतला, मृगल, हिलसा, पंगास, मागुर, सिंगी, बचका भी राज्य के लोगों के बीच काफी पसंदीदा मछलियां हैं। हाल के कुछ वर्षों में पंगास को यहां तेजी से लोकप्रियता हासिल हो रही है।
महाराष्ट्र समुद्री और अंतर्देशीय दोनों प्रकार के मछली उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां खाई जाने वाली प्रमुख मछलियों में पोम्फ्रेट, बोंबिल और झींगा हैं। ये सारी समुद्री मछलियां हैं। वहीं राज्य में ग्रास कार्प और सिल्वर कार्प जैसी मछलियों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। यहां वर्ष 2014-15 में मछलियां का उत्पादन 6.08 लाख सालाना होता था और यह देश में इस मामले में सातवें स्थान पर था। महाराष्ट्र वर्ष 2024-25 में मछलियों के उत्पादन में देश के शीर्ष 10 उत्पादक राज्यों में शामिल नहीं रहा।