
India Mobile Internet Users: भारत आज डिजिटल क्रांति के एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का इकलौता बड़ा देश बन गया है, जहां लोग घरों में भी वाई-फाई और ब्रॉडबैंड से ज्यादा 4G-5G मोबाइल डेटा पर भरोसा कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी इंटरनेट के लिए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड और तारों के नेटवर्क पर निर्भर हैं, भारत में करोड़ों लोग सिर्फ स्मार्टफोन और मोबाइल डेटा के दम पर डिजिटल दुनिया से जुड़े हुए हैं। सस्ते इंटरनेट, तेज 5G नेटवर्क और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल इंटरनेट बाजारों में शामिल कर दिया है।
दुनिया भर में इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर जनवरी से मार्च 2026 के बीच 18 से 64 वर्ष के लोगों पर एक सर्वे किया गया। इसमें जब लोगों से घर पर इंटरनेट चलाने के पसंदीदा माध्यम के बारे में पूछा गया तो भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन जैसे चार बड़े देशों के आंकड़ों में एक बड़ा अंतर देखने को मिला। सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार अन्य देशों में ब्रॉडबैंड का चलन ज्यादा है, वहीं भारत का हर दूसरा व्यक्ति ब्रॉडबैंड के झंझट से दूर, अपने स्मार्टफोन के डेटा पैक पर ही पूरी तरह निर्भर है।
| देश | फिक्स्ड होम इंटरनेट (केबल, फाइबर) | मोबाइल डेटा कनेक्शन (4G, 5G, हॉटस्पॉट) | सैटेलाइट इंटरनेट | अन्य/पता नहीं | घर पर इंटरनेट नहीं है |
|---|---|---|---|---|---|
| भारत | 33% | 60% | 5% | 2% | 0% |
| यूनाइटेड किंगडम | 62% | 26% | 7% | 3% | 1% |
| चीन | 56% | 33% | 2% | 2% | 7% |
| यूनाइटेड सिस्टेट्स | 50% | 31% | 9% | 6% | 4% |
यह आंकड़ा बताता है कि भारत में मोबाइल डेटा का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। जहां ब्रिटेन में 62% और चीन में 56% लोग घर में केबल या फाइबर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा सिर्फ 33% है। इसके उलट, मोबाइल डेटा के मामले में भारत 60% के साथ सबसे आगे है, जबकि बाकी सभी देश इसके आधे के आसपास भी नहीं हैं।
पश्चिमी देशों में पहले कंप्यूटर आए, फिर लैंडलाइन फोन के जरिए इंटरनेट आया और उसके बाद ब्रॉडबैंड का दौर आया। वहां के लोगों की आदत शुरू से ही घरों में तार वाले इंटरनेट की रही है। लेकिन भारत के ज्यादा तर लोग ने कंप्यूटर, लैपटॉप से पहले सीधे स्मार्टफोन को हाथ में थामा। भारत में इंटरनेट का मतलब ही मोबाइल स्क्रीन बन गया। यही वजह है कि आज भारत का युवा हो या बुजुर्ग, वह घर में किसी कंपनी का कनेक्शन लगवाने और हर महीने भारी-भरकम बिल देने के बजाय अपने मोबाइल को ही रिचार्ज करना ज्यादा बेहतर समझता है।
भारत में मोबाइल डेटा की तेज खपत के पीछे सबसे बड़ी वजह यहां बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध इंटरनेट सेवा है। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में 1 GB डेटा की कीमत बहुत कम है। इसके साथ ही, देश में 5G नेटवर्क का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। छोटे-छोटे गांवों और कस्बों तक में लोगों को मोबाइल पर ही सुपरफास्ट स्पीड मिल रही है। जब मोबाइल पर ही बिना रुके वीडियो चल रहे हों, ऑफिस का काम हो रहा हो और ऑनलाइन पढ़ाई हो पा रही हो, तो कोई भी भारतीय घर में अलग से राउटर टांगने का खर्च क्यों उठाएगा? यही वजह है कि 60% भारतीय अपने मोबाइल हॉटस्पॉट को ही अपना होम इंटरनेट मान चुके हैं।
आंकड़े के अनुसार भारत में फिक्स्ड होम इंटरनेट केबल या फाइबर का इस्तेमाल करने वाले सिर्फ 33% लोग हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत में ब्रॉडबैंड कंपनियां घाटे में हैं। यह 33% भी भारत की विशाल आबादी के हिसाब से एक बहुत ज्यादा है। भारत के बड़े शहरों में, जहां कॉरपोरेट दफ्तर हैं ,वहां लोग बहुत ज्यादा हैवी डाउनलोडिंग और गेमिंग करते हैं, वहां फाइबर इंटरनेट का इस्तेमाल होता है। लेकिन जैसे ही हम टियर-2, टियर-3 शहरों या ग्रामीण इलाकों की तरफ बढ़ते हैं, ब्रॉडबैंड गायब होने लगता है और मोबाइल टावर की रेंज ही इंटरनेट का एकमात्र सहारा बनती है।
आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में 9% लोग सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट चला रहे हैं, भारत में यह आंकड़ा 5% है। अमेरिका में स्टारलिंक जैसी सेवाओं के कारण दूरदराज के इलाकों में सैटेलाइट इंटरनेट काफी लोकप्रिय हो रहा है। भारत में भी सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर नीतियां बदल रही हैं। आने वाले समय में जब एलन मस्क की स्टारलिंक या भारत की अपनी कंपनियां अंतरिक्ष से सीधे इंटरनेट देना शुरू करेंगी, तो मुमकिन है कि भारत के जंगलों, पहाड़ों और गांवों में यह 5% का आंकड़ा बहुत तेजी से ऊपर जाने लगे।
चीन की डिजिटल दुनिया भारत से थोड़ी अलग है। चीन में 56% लोग घर पर फिक्स्ड इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और 33% लोग मोबाइल डेटा पर निर्भर हैं। चीन में आज भी 7% लोगों के घर पर इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इसके मुकाबले, भारत में यह आंकड़ा 0% के करीब दिखाई देता है, सर्वे के दायरे में आने वाले लगभग हर भारतीय के पास किसी न किसी रूप में इंटरनेट की पहुंच जरूर है। वहीं, अमेरिका में 50% फिक्स्ड होम इंटरनेट पसंद करती है और 31% लोग ही मोबाइल डेटा को प्राथमिकता देते हैं। अमीर देशों में भी लोग पुरानी और स्थापित तकनीकों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, भारत नई तकनीक को अपनाने में सबसे आगे निकल चुका है।
भारत की इस आदत का असर बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों पर भी पड़ रहा है। जितने भी ऐप्स या वेबसाइट्स बन रही हैं, वे सबसे पहले मोबाइल स्क्रीन को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। नेटफ्लिक्स,अमेजन प्राइम जैसे OTT प्लेटफॉर्म हों या फिर यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया ऐप्स, हर कोई जानता है कि भारत का यूजर बैठकर टीवी देखने के बजाय अपने हाथ में मोबाइल थामकर रील्स स्क्रॉल करना ज्यादा पसंद करता है। इसके अलावा, मोबाइल डेटा पर इतनी बड़ी निर्भरता की वजह से भारत में स्मार्टफोन बाजार लगातार बढ़ रहा है। लोग ऐसे फोन खरीदना चाहते हैं जिनकी बैटरी ज्यादा चले और जो 5G नेटवर्क को बहुत अच्छे से पकड़ सकें।