Ali Larijani: अली लारीजानी ने अमेरिका और इज़राइल पर ईरान को लूटने और विखंडित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और 'अलगाववादी समूहों' को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने कोई कार्रवाई करने की कोशिश की तो उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। आइए जानते हैं कि अली लारीजानी कौन हैं?
Iran Israel : अली लारीजानी, अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei Killed) के बेहद करीबी बताए जाते हैं। लारीजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के उन प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक देश की नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लारीजानी का जन्म 1958 में इराक के नजफ़ शहर में एक प्रतिष्ठित ईरानी धार्मिक परिवार में हुआ। उनके पिता आयतुल्ला मिर्ज़ा हाशिम अमोली देश के प्रमुख धर्मगुरुओं में से थे। बचपन में उनका परिवार ईरान लौट आया, जहां लारीजानी ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और दर्शनशास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की।
लारीजानी का राजनीतिक करियर ईरान की इस्लामी व्यवस्था के भीतर निरंतर उन्नति की मिसाल माने जाते हैं। वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े रहे और बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा एवं कूटनीतिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। 2005 से 2007 के बीच उन्होंने ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की और यूरेनियम संवर्धन को ईरान का वैध अधिकार बताया। वह कूटनीति के समर्थक माने जाते थे, लेकिन राष्ट्रीय हितों पर समझौता न करने के लिए भी जाने जाते हैं।
वह 2008 से 2020 तक ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में 2015 का ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ, जिसे औपचारिक रूप से Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था। हालांकि 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया। इसके बाद ईरान-अमेरिका के संबंधों में और कड़वाहट भर गई।
लारीजानी को ईरान की सर्वोच्च नेतृत्व प्रणाली के भीतर एक व्यावहारिक (प्रैग्मैटिक) और संतुलित नेता माना जाता है। वह विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। अगस्त में उन्हें सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) का सचिव नियुक्त किया गया, जो देश की सुरक्षा और विदेश नीति का प्रमुख संस्थान है। इस भूमिका में उन्होंने परमाणु वार्ताओं, क्षेत्रीय संबंधों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी की।
करीब 20 वर्ष पहले भी SNSC का नेतृत्व कर चुके लारीजानी ने पिछले वर्ष ईरान-इज़राइल के 12-दिवसीय युद्ध के बाद फिर से इस पद को संभाला और सुरक्षा प्रतिष्ठान के केंद्र में लौट आए। परमाणु मुद्दे पर उनके कुछ सार्वजनिक बयान व्यावहारिक रहे हैं। लारीजानी ने पिछले महीने ओमान के राज्य टीवी से कहा था, 'मेरी राय में यह मुद्दा सुलझाया जा सकता है।' उन्होंने कहा था, 'यदि अमेरिकियों की चिंता यह है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में न बढ़े, तो उसे संबोधित किया जा सकता है।' लेकिन जनवरी में सरकार-विरोधी आक्रोश के बाद अमेरिका ने उनकी सुरक्षा परिषद में भूमिका की निंदा की।
हालांकि उनकी छवि एक कूटनीतिक नेता की रही है, लेकिन उन्हें सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दमन में कठोर रुख अपनाने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा। अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाए और उन्हें प्रदर्शनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थक बताया। दूसरी ओर, लारीजानी ने अमेरिका और इज़राइल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और अलगाववादी समूहों को सख्त चेतावनी दी है।
लारीजानी ने रूस और चीन जैसे देशों के साथ संबंध मजबूत करने में भी भूमिका निभाई है। उन्होंने पिछले कुछ समय में रूस की कई यात्राएं कीं और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। चीन के साथ 25 वर्षीय रणनीतिक सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने में भी उनका योगदान माना जाता है।
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, लारीजानी जनवरी में देशभर में फैले प्रदर्शनों को कुचलने के प्रयासों में अग्रिम पंक्ति में थे। हमारे पास उनके और अन्य अधिकारियों पर प्रतिबंधों का विवरण है। अमेरिकी के वित्त मंत्रालय ने 15 जनवरी के बयान में कहा, 'लारीजानी वैध मांगें उठाने वाले ईरानी लोगों के खिलाफ हिंसा का आह्वान करने वाले पहले नेताओं में से एक थे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने खामेनेई के निर्देश पर कार्रवाई की। गौरतलब है कि मानवाधिकार समूहों के अनुसार, ईरान में जनवरी में हुए प्रदर्शनों पर कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए। यह ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे गंभीर घरेलू अशांति थी।
हालांकि अन्य ईरानी अधिकारियों की तरह, लारीजानी ने देश में आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में हुए प्रदर्शनों के प्रति कुछ समझ दिखाई। उन्होंने सशस्त्र कार्रवाइयों की निंदा की और उन्होंने इसे इज़राइल द्वारा भड़काया गया बताया। ईरान की स्टेट मीडिया ने लारीजानी के हवाले से 10 जनवरी 2026 को यह कहा था कि जनप्रिय विरोध प्रदर्शनों को इन आतंकवादी समूहों से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए। जनवरी में उनकी एक बेटी को अमेरिका के एमोरी विश्वविद्यालय में मेडिकल शिक्षण पद से हटा दिया गया, जब ईरानी-अमेरिकी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनों के दमन में उनकी भूमिका को लेकर विरोध किया।
उन्होंने 2005 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा लेकिन असफल रहे। 2021 और 2024 में भी उन्होंने चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन गार्जियन काउंसिल ने जीवनशैली और परिवारिक संबंधों सहित कारणों का हवाला देते हुए उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी।