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Success Story: “हर इंसान का अपना एवरेस्ट होता है” रायपुर की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही काम्या का प्रेरक संदेश

Kamya Karthikeyan: सबसे कम उम्र की महिला पर्वतारोही काम्या कार्तिकेयन ने रायपुर में अपने संघर्ष, साहस और सफलता की प्रेरक कहानी साझा की। उन्होंने कहा, "हर इंसान का अपना एवरेस्ट होता है, जिसे मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से जीता जा सकता है।"
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Aug 08, 2026
Success Story
Success Story: "हर इंसान का अपना एवरेस्ट होता है(photo-patrika)

Success Story: "एवरेस्ट सिर्फ हिमालय की सबसे ऊंची चोटी नहीं, बल्कि हर इंसान की जिंदगी का वह सपना है, जिसे मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से जीता जा सकता है।" यह संदेश सबसे कम उम्र की महिला पर्वतारोहियों में शामिल काम्या कार्तिकेयन ने रायपुर के विमतारा हॉल में आयोजित 'ब्रेकिंग लिमिट्स' कार्यक्रम में दिया।

महज सात साल की उम्र में पर्वतारोहण की शुरुआत करने वाली काम्या ने 18 वर्ष की उम्र में सेवन समिट (सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां) फतह कर इतिहास रच दिया। लेकिन यह सफर केवल ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने का नहीं था, बल्कि हर कदम पर कठिन चुनौतियों, मानसिक मजबूती और अटूट विश्वास की परीक्षा का भी था।

Youngest Woman Mountaineer: जीत सिर्फ ताकत से नहीं, सोच से मिलती है

काम्या ने कहा कि पर्वतारोहण में सफलता केवल शारीरिक शक्ति पर निर्भर नहीं करती। महीनों की तैयारी, सही रणनीति, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता ही किसी भी शिखर तक पहुंचने का रास्ता बनाती है। उन्होंने पर्वतारोहण के साथ पढ़ाई भी जारी रखी और बताया कि टाइम मैनेजमेंट उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उन्होंने युवाओं से कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी में अपना एक "एवरेस्ट" होता है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी पूरी हो, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती।

जब चुनौतियां बनीं सफलता की सीढ़ियां, बर्फीली दरारों के बीच 11 घंटे का संघर्ष

डेनाली अभियान से लौटते समय ग्लेशियर की बर्फ पिघलने से पूरा रास्ता बदल चुका था। हर कुछ कदम पर गहरी बर्फीली दरारें थीं। ऐसे हालात में काम्या और उनकी टीम ने जल्दबाजी नहीं की। ट्रेकिंग पोल से हर कदम की जांच करते हुए करीब 11 घंटे तक सावधानी से आगे बढ़े और सुरक्षित बेस कैंप लौटे।

दो हफ्ते की कानूनी लड़ाई के बाद मिली मंजूरी

माउंट अकोंकागुआ अभियान के दौरान कम उम्र होने के कारण उन्हें चढ़ाई की अनुमति नहीं मिल रही थी। चार दिन का अभियान दो सप्ताह की कानूनी प्रक्रिया में बदल गया। लगातार दस्तावेज जमा करने और अधिकारियों से संवाद के बाद आखिरकार अनुमति मिली और उन्होंने शिखर फतह कर दिखाया।

ऑक्सीजन से ज्यादा भरोसा तैयारी पर

एवरेस्ट अभियान के लिए वर्षों तक नियमित रनिंग, ट्रेकिंग और हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग ने उनके फेफड़ों की क्षमता और स्टैमिना को मजबूत बनाया। यही तैयारी कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी उनके आत्मविश्वास और सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

साउथ पोल में हार नहीं मानी

साउथ पोल अभियान के दौरान चेहरे पर ठंड से चोट लगने पर डॉक्टरों ने उन्हें वापस लौटने की सलाह दी। लेकिन काम्या ने धैर्य बनाए रखा। विशेषज्ञों की दोबारा जांच में गंभीर फ्रॉस्टबाइट न होने की पुष्टि हुई और उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिली। इसके बाद उन्होंने सफलतापूर्वक अभियान पूरा किया।

युवाओं के लिए संदेश

काम्या का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत, अनुशासन और चुनौतियों का सामना करने का साहस जरूरी है। उन्होंने कहा, "अगर आपकी तैयारी मजबूत है, तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भी आपके कदमों के सामने छोटी पड़ सकती है।"

Updated on:
08 Aug 2026 01:29 pm
Published on:
08 Aug 2026 01:29 pm
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