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Mahua Ladoo: कभी शराब के लिए बदनाम महुआ, अब बनेगा सुपरफूड! छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिला की अनोखी पहल

Chhattisgarh Success Story: कबीरधाम की आदिवासी उद्यमी जगनी बैगा ने महुआ को नई पहचान देने की पहल की है। महुआ से बने लड्डू अब स्वास्थ्य और रोजगार का जरिया बन रहे हैं।

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Jun 22, 2026
Mahua Ladoo(photo-patrika)
Mahua Ladoo: कभी शराब के लिए बदनाम महुआ, अब बनेगा सुपरफूड(photo-patrika)

Mahua Ladoo: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में महुआ को लेकर एक नई सोच सामने आ रही है। जिस महुआ को लंबे समय से केवल शराब बनाने के लिए जाना जाता था, अब वही स्वास्थ्य और रोजगार का जरिया बन रहा है। केसदा क्षेत्र की आदिवासी उद्यमी जगनी बैगा ने महुआ से पौष्टिक और स्वादिष्ट लड्डू तैयार कर एक नई पहल शुरू की है। यह प्रयास महुआ को नशे की छवि से बाहर निकालकर एक पौष्टिक खाद्य उत्पाद के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Mahua Superfood: महुआ से बनेगा 30 से 40 तरह का खाद्य उत्पाद

जगनी बैगा की योजना केवल महुआ के लड्डू तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य महुआ से 30 से 40 प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार करना है। इसमें कुकीज, चिक्की, स्नैक्स और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल हैं। इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। खासतौर पर आदिवासी महिलाओं को इससे जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है।

महुआ: आदिवासी संस्कृति और आजीविका का हिस्सा

आदिवासी समाज में महुआ को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे केवल एक पेड़ नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और आजीविका का हिस्सा माना जाता है। महुआ के फूलों में प्राकृतिक शर्करा के साथ-साथ कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बनाते हैं। अब तक महुआ का सबसे ज्यादा उपयोग पारंपरिक शराब बनाने में किया जाता रहा है, लेकिन जगनी बैगा की पहल ने दिखाया है कि यही वन उपज पोषण और स्वरोजगार का मजबूत आधार बन सकती है।

महिला समूहों के साथ बाजार तक पहुंचाने की तैयारी

महुआ के लड्डू बनाने का काम शुरू हो चुका है। अब महिला स्वसहायता समूहों के सहयोग से इन उत्पादों को जिले के साथ-साथ प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इससे स्थानीय वन उत्पादों को बाजार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

युवाओं के लिए उद्यमिता की मिसाल बनी पहल

जगनी बैगा की पहल युवाओं के लिए भी एक संदेश है कि स्थानीय संसाधनों को सही सोच और मेहनत के साथ रोजगार के अवसर में बदला जा सकता है। महुआ जैसी पारंपरिक वन उपज को नए रूप में पेश कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी शुरू की है।

Published on:
22 Jun 2026 03:01 pm