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India’s Health Sector: टेलीमेडिसिन से एआई (AI) तक, बदलती भारतीय चिकित्सा और भविष्य की चुनौतियां

डॉक्टर्स डे स्पेशल: टेलीमेडिसिन से लेकर AI और रोबोटिक सर्जरी तक, पिछले कुछ सालों में कितना बदला भारत का मेडिकल सिस्टम? जानिए साइकियाट्रिस्ट, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और यूरोलॉजिस्ट जैसे बड़े एक्सपर्ट्स की राय और भविष्य की पूरी तस्वीर।
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Jul 02, 2026
Doctor Day Special e Sanjeevani Digital schemes Infrastructure
भारज के हेल्थकेयर सिस्टम में बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं।(Photo:AI)

India's Health Sector : हर साल की तरह इस साल भी 1 जुलाई को देश के महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की याद में 'नेशनल डॉक्टर्स डे' मनाया गया। लेकिन यह दिन सिर्फ डॉक्टरों के प्रति आभार जताने का दिन नहीं है। यह दिन इस बात का आकलन करने का भी है कि भारत का मेडिकल सिस्टम पिछले कुछ दशकों में कहाँ से कहां पहुंच चुका है और आने वाले सालों में हमारी सेहत की दुनिया कितनी बदलने वाली है। एक समय था जब देश के किसी ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाके में रहने वाले मरीज को एक अच्छे कंसल्टेशन या सुपर-स्पेशियलिटी इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन आज, भारत का हेल्थकेयर सिस्टम एक बड़े तकनीकी और ढांचागत (Infrastructure) बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस डॉक्टर्स डे पर हमने देश के तीन जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञों से बात की, जिन्होंने भारतीय चिकित्सा व्यवस्था के बदलते चेहरे और आने वाले कल की तस्वीर साझा की।

पिछले कुछ वर्षों में कितना बदला भारत का मेडिकल सिस्टम?

पिछले एक दशक में भारत ने चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। यह बदलाव केवल बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम आदमी तक पहुंचा है:

  • डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन की क्रांति: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत अब देश के करोड़ों नागरिकों की 'डिजिटल हेल्थ आईडी' बन रही है। ई-संजीवनी (E-Sanjeevani) जैसे सरकारी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आज दूर-दराज के गांवों में बैठा व्यक्ति भी बड़े डॉक्टरों से सीधे वीडियो कंसल्टेशन ले पा रहा है।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर: अब बेहतरीन इलाज के लिए मेट्रो शहरों में भागने की मजबूरी कम हुई है। जयपुर, इंदौर, लखनऊ जैसे शहरों में आधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल, एडवांस कैथ लैब और रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं।
  • सस्ता और सुलभ इलाज: 'आयुष्मान भारत योजना' ने दुनिया के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के रूप में करोड़ों गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुरक्षा दी है। वहीं 'जन औषधि केंद्रों' ने जेनेरिक दवाओं को 50 से 90 फीसदी तक सस्ता कर मध्यम वर्ग की जेब को बड़ी राहत दी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल एंग्जायटी पर डॉ. सुनील शर्मा ( मनोचिकित्सक)

पिछले कुछ वर्षों में हमारे पास आने वाले मरीजों के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। आज भारत का मेडिकल सिस्टम सिर्फ शारीरिक बीमारियों का इलाज नहीं कर रहा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर भी समाज में हिचक कम हुई है। डिजिटल क्रांति और स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण युवाओं में 'डिजिटल बर्नआउट', एंग्जायटी और नींद न आने की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। राहत की बात यह है कि अब टेली-काउंसलिंग और डिजिटल थेरेपी के जरिए लोग घर बैठे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद ले पा रहे हैं। आने वाले समय में मेंटल वेलनेस को जनरल हेल्थकेयर का अनिवार्य हिस्सा बनना ही होगा।

लाइफस्टाइल डिसीज और मेटाबॉलिक हेल्थ पर डॉ. शुभम अग्रवाल ( गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी)

भारत इस समय दुनिया की 'डायबिटीज और ओबेसिटी (मोटापा) कैपिटल' बनने की राह पर है। बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड और शारीरिक निष्क्रियता के कारण थायराइड, पीसीओडी (PCOD) और कम उम्र में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़े हैं। लेकिन भविष्य की चिकित्सा इस मामले में बहुत एडवांस होने जा रही है। अब हमारे पास ऐसे स्मार्ट वियरेबल्स (गैजेट्स) और कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर (CGM) हैं, जो मरीज के शुगर लेवल को 24 घंटे ट्रैक करते हैं। आने वाले सालों में पर्सनल जेनेटिक्स और एआई की मदद से हर मरीज के मेटाबॉलिज्म के हिसाब से 'कस्टमाइज्ड डाइट और ट्रीटमेंट प्लान' तैयार किया जा सकेगा, जो एक बड़ा बदलाव होगा।

यूरोलॉजिकल बीमारियां और रोबोटिक सर्जरी की क्रांति पर डॉ. अमित सोनी (वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट)

आज भारतीय चिकित्सा क्षेत्र (Medical Field) बहुत तेजी से उन्नति कर रहा है, जिसमें तीन बड़ी तकनीकों का योगदान सबसे अहम है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मेडिकल फील्ड, विशेषकर रेडियोलॉजी विभाग में एआई का रोल बहुत शानदार रहा है। सीटी स्कैन और एमआरआई (MRI) जैसी जांचों में एआई टूल्स की मदद से बीमारियों को बेहद शुरुआती स्टेज पर और पूरी सटीकता के साथ पकड़ा जा रहा है। इससे डॉक्टरों को सही समय पर सही इलाज शुरू करने में बड़ी मदद मिल रही है।
  • रोबोटिक सर्जरी (Robotic Surgery): पारंपरिक या आम ऑपरेशनों के मुकाबले रोबोटिक सर्जरी डॉक्टरों की कार्यक्षमता को बहुत बढ़ा देती है। इसके जरिए बेहद जटिल ऑपरेशन भी बिना किसी बड़ी चीर-फाड़ के, अत्यंत सटीक और सुरक्षित तरीके से पूरे हो रहे हैं।
  • टेलीमेडिसिन (Telemedicine): तकनीक ने आज दूरियों को खत्म कर दिया है। आज एक शहर में बैठा विशेषज्ञ डॉक्टर देश या दुनिया के किसी दूसरे शहर में मौजूद मरीज का लाइव रोबोटिक ऑपरेशन तक कर पा रहा है। यह चिकित्सा क्षेत्र का एक अभूतपूर्व विकास है।
  • तकनीक के साथ आम जनता की जिम्मेदारी भी जरूरी : चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे इन आधुनिक बदलावों के बीच, एक नागरिक और मरीज के तौर पर आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।
  • लक्षणों को छोटा न समझें: किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों को कभी भी मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। अगर शरीर में कोई भी तकलीफ महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बीमारी के बहुत ज्यादा बढ़ जाने का इंतजार न करें।
  • इंटरनेट और खुद से इलाज का खतरा: आजकल मरीजों में एक बहुत ही खतरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर यूट्यूब (YouTube), चैटजीपीटी (ChatGPT) या अन्य ऐप्स पर देखकर खुद से ही घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं या दवाइयां (Self-Medication) खा लेते हैं। यह आदत मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जानलेवा और गंभीर साबित हो सकती है।

युवाओं में बढ़ता हार्ट रिस्क और एडवांस कार्डियक केयर पर डॉ. आरिफ खान (कार्डियोलॉजिस्ट)

आजादी के समय भारत का जो हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर था, उसमें और आज के भारत में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है। उस दौर में हमारे देश में डॉक्टरों की भारी किल्लत थी और अस्पताल न के बराबर थे। आज़ादी के बाद जो बुनियादी ढांचा हमें मिला, वह बेहद कमजोर और नाजुक था, जिसके सहारे चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती थी।

लेकिन आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। हमारे देश के डॉक्टरों ने उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता (Specialized Training) हासिल कर चिकित्सा तंत्र को देश के कोने-कोने और गांव-गांव तक पहुंचाया है। इसमें प्राइवेट अस्पतालों के साथ-साथ सबसे बड़ा योगदान हमारे सरकारी अस्पतालों का है, जो इतनी बड़ी आबादी को डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त या बेहद किफायती इलाज मुहैया करा रहे हैं।

इस बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से हमें उन गंभीर बीमारियों पर काबू पाने में मदद मिली है, जिनसे हम आज़ादी के वक्त जूझ रहे थे जैसे मलेरिया, टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) और हैजा (कॉलेरा)। आज ये बीमारियां देश में बहुत कम रह गई हैं। इसी तरह, पहले व्यापक स्तर पर टीकाकरण (Vaccination) न होने के कारण बच्चों में पोलियो, डिप्थीरिया और टिटनेस जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन स्वास्थ्य ढांचे के विकास और गांव-गांव तक फैली जागरूकता के कारण आज ये बीमारियां देश से लगभग खत्म (Eradicate) हो चुकी हैं।

ओपन हार्ट सर्जरी से एंजियोप्लास्टी तक का सफर
एक कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) के रूप में मैं इस बदलाव को बहुत करीब से देखता हूं। आज से महज़ 30 साल पहले भी अगर किसी को पता चलता था कि उसके दिल का ऑपरेशन होना है, तो उसे बेहद गंभीर और डरावना माना जाता था। दुनिया की पहली बाईपास सर्जरी 1960 के दशक में हुई थी, जबकि भारत में इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई।

समय के साथ कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। पहले जिस इलाज के लिए हमें पूरा सीना काटकर जटिल बाईपास सर्जरी करनी पड़ती थी, आज वह तकनीक 'मिनिमली इनवेसिव' (कम चीर-फाड़ वाली) एंजियोप्लास्टी में बदल चुकी है, जहां हम स्टेंट के जरिए बंद नाड़ियों को आसानी से खोल देते हैं। अब तो इससे भी आगे बढ़कर वैल्व सर्जरी (Valve Surgery) के लिए ओपन हार्ट की जरूरत नहीं पड़ती एंजियोग्राफी तकनीक के माध्यम से ही वैल्व बदल दिए जाते हैं।

सबसे सुखद बात यह है कि 'मेड इन इंडिया' मुहिम और स्वदेशी रिसर्च के कारण अब ज़्यादातर दवाइयां, वैल्व और मेडिकल इंप्लांट्स भारत में ही बन रहे हैं। अब हमें विदेशी उपकरणों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे ऑपरेशन और इलाज का खर्च बहुत कम हो गया है और देश का आम नागरिक भी इसका फायदा उठा पा रहा है।

प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी और भविष्य की राह

आज चिकित्सा जगत का पूरा ध्यान प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी (Preventive Cardiology) पर है।इसका मतलब है कि बीमारी के गंभीर होने या हार्ट अटैक आने से पहले ही उसे रोक दिया जाए। शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली आधुनिक दवाओं के आ जाने से हृदय संबंधी बीमारियों पर काफी हद तक लगाम लगी है।

जटिल बीमारियों पर रिसर्च एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। अब सबसे बड़ा काम इस बेहतरीन इलाज को देश के हर नागरिक तक पहुंचाना है सरकार इस दिशा में सराहनीय कदम उठा रही है। छोटे शहरों में टर्शियरी केयर (Tertiary Care) अस्पताल खोलने के लिए डॉक्टरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और रियायती दरों पर ज़मीनें दी जा रही हैं।

इसके साथ ही, आयुष्मान भारत, चिरंजीवी योजना, सीजीएचएस (CGHS) और आरजीएचएस (RGHS) जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मरीजों की आर्थिक चिंता को लगभग खत्म कर दिया है. इनके माध्यम से देश के गरीब और मध्यम वर्ग का इलाज या तो मुफ्त हो रहा है या बेहद नगण्य खर्च पर।

Updated on:
02 Jul 2026 10:48 am
Published on:
02 Jul 2026 10:46 am