Public Transport: दुनिया के विकसित देशों से लेकर भारत के प्रमुख शहरों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के आंकड़े सामने आए हैं। जानिए अमेरिका और सिंगापुर के मुकाबले मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु के लोग अपने रोजाना के सफर के लिए किन साधनों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं और कैसे ये साधन शहरों की लाइफलाइन बन चुके हैं।
Public Transport: सड़कों पर दौड़ती चमचमाती कारें किसी शहर की अमीरी दिखा सकती हैं, लेकिन ट्रैफिक कम करने और प्रदूषण से बचाने का असली काम बसें और ट्रेनें ही करती हैं। एक तरफ दुनिया के कई अमीर देश हैं, जहां हर घर के बाहर गाड़ियां खड़ी रहती हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारा देश है, जहां सुबह होते ही करोड़ों लोग बस और मेट्रो पकड़ने के लिए निकल पड़ते हैं। भीड़, गर्मी और पसीने के बीच यही सफर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है।
क्या आप जानते हैं कि लग्जरी के दौर में दुनिया के किस देश के लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं? क्या अमेरिका जैसे देश में लोग बस और ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं? आइए, आंकड़ों के जरिए समझते हैं।
स्टेटिस्टा (Statista) के अनुसार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल में एशियाई देश, कई अमीर और पश्चिमी देशों से आगे हैं। सिंगापुर के लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने में दुनिया में पहले नंबर पर हैं। वहां 65% लोग हफ्ते में कम से कम दो बार या उससे ज्यादा बार बस, ट्रेन या मेट्रो से सफर करते हैं। इनमें 33% लोग ऐसे हैं जो रोजाना पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है वहां का शानदार, साफ-सुथरा और समय पर चलने वाला ट्रांसपोर्ट सिस्टम। इसके साथ ही, सिंगापुर में निजी कार खरीदना और रखना बहुत महंगा हो गया है। यही वजह है कि आम लोग बस और ट्रेन जैसा सस्ता साधन इस्तेमाल में लाते हैं।
साउथ कोरिया में भी 38% लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं फिलीपींस में 37% लोग बस और ट्रेन से सफर करते हैं। साउथ कोरिया की राजधानी सियोल का मेट्रो नेटवर्क दुनिया के सबसे बेहतरीन नेटवर्क में गिना जाता है। यही वजह है कि वहां लोग अपनी कार छोड़कर बस और ट्रेन से सफर करना ज्यादा पसंद करते हैं।
यूरोप के देशों में तस्वीर थोड़ी अलग है। जर्मनी और ब्रिटेन में 25% लोग नियमित रूप से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं फ्रांस में यह आंकड़ा 21% है। यूरोप में साइकिल चलाने और पैदल चलने का चलन भी काफी ज्यादा है। इसके बावजूद वहां बस और ट्रेन का नेटवर्क काफी मजबूत है।
दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में कारों की क्रेज बहुत ज्यादा है। फिल्मों में अक्सर दिखता है कि वहां लगभग हर किसी के पास अपनी कार होती है, और आंकड़े भी यही बताते हैं। अमेरिका में सिर्फ 12% लोग ही हफ्ते में दो या उससे ज्यादा बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं रोजाना बस या ट्रेन से सफर करने वालों की संख्या सिर्फ 4% है। अमेरिका का इंफ्रास्ट्रक्चर इस तरह बना है कि वहां बिना कार के जिंदगी काफी मुश्किल मानी जाती है।
Ipsos Mobility Report के मुताबिक, भारत में 24% लोग अपनी यात्रा के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मुख्य साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि शहरों की धड़कन है। अगर एक दिन के लिए भी मुंबई की लोकल ट्रेन या दिल्ली मेट्रो रुक जाए, तो पूरा शहर जैसे थम जाता है। करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बस, ट्रेन और मेट्रो पर टिकी है। भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का काफी ज्यादा इस्तेमाल होता है, और इसकी एक बड़ी वजह यहां की ज्यादा जनसंख्या भी है।
मुंबई की लोकल ट्रेन के बिना इस शहर की कल्पना करना मुश्किल है। आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में हर रोज 62 लाख से ज्यादा लोग लोकल ट्रेन और BEST बसों से सफर करते हैं। यह संख्या दुनिया के कई छोटे देशों की आबादी से भी ज्यादा है। मुंबई में कितनी भी भीड़ क्यों न हो, लोग रोज काम पर जाने के लिए ट्रेनों और बसों पर ही भरोसा करते हैं।
दिल्ली के लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो किसी वरदान से कम नहीं है। हर रोज 56 से 64 लाख लोग दिल्ली मेट्रो से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद के बीच सफर करते हैं। भारी ट्रैफिक और प्रदूषण से परेशान राजधानी में मेट्रो ने लोगों को साफ और सुरक्षित सफर की आदत डाल दी है। अब तो हाल ये है कि मेट्रो के बिना दिल्ली अधूरी-सी लगती है।
भारत की सिलिकॉन वैली बेंगलुरु अपनी आईटी कंपनियों के साथ-साथ भारी ट्रैफिक जाम के लिए भी जाना जाता है। इस जाम से बचने और शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने के लिए हर रोज करीब 44 से 46 लाख लोग BMTC की बसों से सफर करते हैं। हालांकि बेंगलुरु में मेट्रो का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन आज भी बसों का नेटवर्क ही इस शहर को जोड़े हुए है।
दक्षिण भारत के इस बड़े शहर में हर रोज 31 से 34 लाख लोग सफर करते हैं। चेन्नई के लोग MTC की बसों और लोकल ट्रेनों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। यहां का ट्रांसपोर्ट सिस्टम काफी पुराना है, लेकिन आज भी शहर की बड़ी आबादी का सहारा बना हुआ है। वहीं हैदराबाद में भी ट्रांसपोर्ट तेजी से बदल रहा है। यहां हर रोज 25 लाख से ज्यादा लोग बसों और मेट्रो से सफर करते हैं। जैसे-जैसे हैदराबाद का आईटी सेक्टर बढ़ा है, वैसे-वैसे लोगों ने बसों के साथ मेट्रो को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया है।
महाराष्ट्र का पुणे, जिसे स्टूडेंट्स और आईटी प्रोफेशनल्स का शहर कहा जाता है, वहां रोजाना PMPML बसों में 12 लाख से ज्यादा लोग सफर करते हैं। यानी शहर की बड़ी आबादी अब बसों पर भरोसा कर रही है। वहीं नागपुर की बात करें, तो यहां मेट्रो ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली है। बस और मेट्रो मिलाकर रोज करीब 3 लाख से ज्यादा लोग सफर कर रहे हैं। नागपुर दिखाता है कि अब छोटे और टियर-2 शहरों में भी लोग तेजी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने लगे हैं।
दुनिया आज Global Warming और Climate Change जैसी बड़ी समस्याओं से जूझ रही है। एक ‘स्मार्ट सिटी’ की पहचान बड़े-बड़े फ्लाईओवर या हर किसी के पास कार होने से नहीं होती। असली स्मार्ट शहर वो होता है, जहां सबसे अमीर आदमी भी अपनी कार छोड़कर बस या मेट्रो में सफर करना पसंद करे और उसे गर्व महसूस हो। सिंगापुर और साउथ कोरिया जैसे देशों ने दिखा दिया है कि अच्छा पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरे देश की तस्वीर बदल सकता है। आने वाले समय में जैसे-जैसे शहरों में मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसें बढ़ेंगी, वैसे-वैसे सफर और भी आसान, तेज और आरामदायक होता जाएगा।