भारत समेत दुनिया के कई मुल्क अपना रक्षा खर्च लगातार बढ़ा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत का रक्षा खर्च 2026 से 2030 की अवधि में 543.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जानिए] दुनिया के कौन-कौन से देश इस होड़ में सबसे आगे हैं।
Top nuclear weapons countries: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) ने कहा कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा हथियारों और गोला-बारूद पर बढ़ते खर्च से सामाजिक खर्च में कमी आ रही है, और वैश्विक विकास में मंदी की हालत बनी हुई है, जो महामारी से पहले के स्तर से काफी नीचे है। एंटोनियो ने यह टिप्पणी डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के अमेरिकी सैन्य बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की वकालत वाली पोस्ट के बाद की है। भारत समेत दुनिया के दूसरे मुल्कों में सैन्य बजट भी लगातार बढ़ रहे हैं जिसके चलते पूरे विश्व अशांति की चपेट में आ चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल पोस्ट में सैन्य बजट की भरपाई के बारे में तर्क देते हुए लिखा है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से प्राप्त राजस्व से इस तरह के सैन्य बजट की अनुमति मिलती है। अमेरिकी कांग्रेस ने 2026 के लिए 901 बिलियन डॉलर के बजट को मंजूरी दे दी है।
वहीं गुटेरेस ने दुनिया में फैल रही अशांति को लेकर कहा, “अत्यंत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा कमजोर शासन व्यवस्था और सामाजिक एकता का फायदा उठा रही है, जिससे प्रभावित समुदायों में अनिश्चितता और विभाजन बढ़ रहा है। देश शांति के लिए निवेश करने की तुलना में युद्ध के साधनों पर अधिक खर्च कर रहे हैं।”
संयुक्त राष्ट्र की ताजी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक सैन्य व्यय में 2.7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि "कम से कम 1988 के बाद से सबसे तीव्र वार्षिक वृद्धि" को दर्शाती है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह वृद्धि दुनिया के 10 सबसे बड़े व्ययकर्ताओं के कारण हुई है, जो कुल व्यय का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि रक्षा व्यय में यह उछाल मानव संसाधन, बुनियादी ढांचे और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के साथ विकास सहयोग में दीर्घकालिक निवेश से धन को दूसरी ओर मोड़ने का खतरा पैदा करता है।
अमेरिका ने एक बार फिर ग्लोबल न्यूक्लियर खर्च का रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिका ने $56.8 बिलियन का योगदान दिया है, जो बाकी सभी परमाणु हथियार वाले देशों को मिलाकर कहीं ज़्यादा है। परमाणु हथियारों को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियान आईसीएएन के अनुसार, परमाणु हथियारों पर अमेरिका, चीन, उत्तरी कोरिया, फ्रांस, भरात, इस्राइल, पाकिस्तान, ग्रेट ब्रिटेन और रूस ने 2024 में 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत ज्यादा था। एक अनुमान के अनुसार, परमाणु पर बढ़े खर्च से दुनिया के 34 करोड़ 50 लाख भूखे लोगों को दो वर्षों तक भोजन कराया जा सकता है। परमाणु हथियार पर प्रति मिनट का खर्च 190,151 डॉलर का रहा।
परमाणु हथियारों पर अमेरिका के बाद 2024 में चीन ने 12.5 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि ब्रिटेन ने 10.4 अरब डॉलर खर्च किए। ब्रिटेन ने अपने परमाणु खर्च में सालाना 26 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया। उसके बाद पाकिस्तान (18 प्रतिशत) और फ्रांस (13 प्रतिशत) का स्थान रहा।
आईसीएएन की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वर्ष चीन, उत्तरी कोरिया, फ्रांस, भारत, इस्राइल, पाकिस्तान, ग्रेट ब्रिटेन, रूस, और संयुक्त राज्य अमरीका ने अपने परमाणु शस्त्रागार विकसित करने के लिए सौ अरब डॉलर से अधिक खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। इस समय विश्व में लगभग 12,000 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से लगभग 90% संयुक्त राज्य अमरीका और रूस के हैं।
आईसीएएन के अनुसार, भारत ने वर्ष 2024 में 2.6 बिलियन डॉलर यानी 21,400 करोड़ रुपये खर्च किए। यह भारत की सैन्य बजट का सिर्फ 3 फीसदी था। भारत के रक्षा बजट में पिछले एक दशक में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय सेना ने दिसंबर 2024 में K9 वज्र-T स्वचालित तोपखाने प्लेटफार्मों के लिए लार्सन एंड टुब्रो के साथ 76.287 अरब रुपये का सौदा किया था। भारत का रक्षा बजट 2013-14 में लगभग 2.53 लाख करोड़ रुपये था जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 6.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ग्लोबलडाटा के अनुसार, भारत का रक्षा खर्च अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयासों की वजह से 2026 से 2030 की अवधि में 543.1 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
पाकिस्तान समर्थित आंतकवादी अभियानों के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद गोला-बारूद की कमी को देखते हुए भारत सरकार ने हथियार प्रणालियों की तत्काल खरीद के लिए 500 अरब रुपये (6 अरब डॉलर) की आपातकालीन धनराशि आवंटित की है।
| वर्ष | बजट (₹ लाख करोड़) |
|---|---|
| 2019–20 | 3.19 |
| 2020–21 | 4.71 |
| 2024–25 | 6.22 |
| 2025–26 | 6.81 |