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जिंदगियां बचाने का जुनून, 30 साल की उम्र में 22 बार रक्तदान, पत्रिका से बातचीत में बिरेन्द्र ने साझा किया सफर

Bemetara Blood Donation Hero: बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के तेलगा गांव से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां 30 वर्षीय बिरेंद्र सेन ने अब तक 22 बार रक्तदान कर मिसाल कायम की है।

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Jun 14, 2026
22 Times Blood Donor Chhattisgarh
बिरेंद्र सेन: 22 Times Blood Donor Chhattisgarh (फोटो सोर्स- iStock)

World Blood Donor Day 2026: बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के तेलगा निवासी बिरेन्द्र सेन तीस साल की उम्र ने 22 बार रक्तदान कर एक रिकॉर्ड बना चुके हैं। उन्होंने 18 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान किया और उसके बाद से ये सिलसिला आज तक जारी है। बिरेन्द्र उन लोगों में से हैं, जो रक्तदान करने के लिए किसी शिविर या विश्व रक्तदान दिवस का इंतजार नहीं करते। उनमें लोगों के जीवन को बचाने का नशा इस कदर हावी है कि जब भी कोई उनसे खून की जरूरत के बारे में बात करता है तो वे हंसी-खुशी खुद जा कर रक्तदान कर देते हैं।

जिला अस्पताल में 12 व मेकाहारा में 10 बार कर चुके रक्तदान

तेलगा निवासी बिरेंद्र सेन ने पत्रिका के खास बातचीत में बताया कि वे जिला अस्पताल बेमेतरा में 12 व मेकाहारा में 10 बार रक्तदान कर चुके हैं। इससे न केवल किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचती है बल्कि इससे मानसिक संतुष्टि, आत्म-सम्मान और खुशी का गहरा एहसास भी मिलता है। वैज्ञानिक रूप से भी, रक्तदान करने से शरीर में एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे खुशी देने वाले हार्मोन का स्राव होता है, जो तनाव और चिंता को दूर करते हैं।

पड़ोसी को खून देने वाला कोई नहीं था

बिरेंद्र बताते हैं कि जब वह 18 वर्ष के थे तो उनके पड़ोस में रहने वाले एक अंकल की हार्ट की सर्जरी होनी थी और उन्हें ब्लड की जरूरत थी। उनकी पत्नी उनके पास आईं और उन्होंने कहा कि मेरे पति की हार्ट की सर्जरी होनी है। उन्हें ब्लड की जरूरत है। कोई ब्लड देने वाला नहीं मिल रहा है। मेरी मां ने उनसे कहा कि आप मेरे बेटे को ले जाओ, यह ब्लड दे देगा।

ऑपरेशन के बाद अंकल ने कहा- सेन के खून से मैं जिंदा हूं

सेन ने बताया कि मेरी उम्र 18 साल थी लेकिन ब्लड देने की बात उन्होंने पहली बार सुनी थी तो पहले डर लगा लेकिन वे आंटी के साथ चले गए। उन्होंने वहां ब्लड दिया और उसके बाद घर आ गए। फिर जब ऑपरेशन के बाद अंकल ठीक हो गए तो वह जब भी कहीं गली में टहलते हुए दिखते थे और किसी से बात करते थे तो यही कहते थे कि वो तो सेन के खून से जिंदा हैं। यह ब्लड ना देता तो शायद मैं जिंदा नहीं होता। उनकी यह बात सुनकर प्रेरणा मिली और इसके बाद उन्हें लगा कि वाकई रक्तदान करना बहुत जरूरी है और फिर रक्तदान उनके जीवन का हिस्सा बन गया।

वे नियमित रूप से रक्तदान करने लगे और साल 2026 तक आते-आते 22 बार ब्लड डोनर बन गया। उन्हें संगठन द्वारा सम्मानित भी किया गया। इस तरह के छोटे-छोटे सम्मानों से उत्साह बढ़ता गया और उन्होंने इस मुहिम को और जोश से शुरू किया।

रक्तदान से होता है शारीरिक और मानसिक लाभ

  • मानसिक शांति: किसी का जीवन बचाने का अहसास मन को अद्वितीय सुकून, खुशी और गर्व की अनुभूति होती है।
  • हृदय स्वास्थ्य: नियमित दान से खून का थक्का कम होता है और अतिरिक्त आयरन संतुलित रहता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
  • कैलोरी बर्न: एक बार रक्तदान करने से शरीर की लगभग 650 कैलोरी तक बर्न हो जाती है।

14 जून को मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस

हर साल 14 जून को पूरी दुनिया में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उन निस्वार्थ लोगों को सम्मान देने का दिन है जो अपना रक्त दान करके अनजान लोगों की जिंदगी बचाते हैं। अक्सर अस्पतालों में खून की कमी की स्थिति सामने आती है- चाहे सड़क दुर्घटना हो, प्रसव के दौरान जटिलता हो या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बार-बार रक्त की जरूरत। ऐसे समय में समय पर रक्त उपलब्ध न हो तो मरीज की जान पर खतरा बढ़ जाता है। इसी स्थिति में रक्तदाता किसी फरिश्ते की तरह जीवनदान लेकर सामने आते हैं।

14 जून को ही क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

यह दिन ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्होंने ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी, जिसने चिकित्सा विज्ञान में रक्तदान और रक्ताधान को सुरक्षित बनाया। इसी महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

विश्व रक्तदाता दिवस की थीम

हर वर्ष इस दिवस को एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम है- “मानवता की एक बूंद, रक्तदान करें, जीवन बचाएं”

कौन कर सकता है रक्तदान?

आमतौर पर 18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पहले स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जांच की जाती है ताकि दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों सुरक्षित रहें।

क्यों कहा जाता है रक्तदान सबसे बड़ा दान?

खून न तो किसी फैक्ट्री में बनता है और न ही इसे किसी मशीन से तैयार किया जा सकता है। यह केवल एक इंसान से दूसरे इंसान को ही मिल सकता है। आपकी एक छोटी-सी पहल किसी अनजान व्यक्ति के लिए नया जीवन बन सकती है। इसलिए रक्तदान को सबसे बड़ा दान माना जाता है।

Published on:
14 Jun 2026 02:01 pm