Mahendrajeet Singh Malviya: भाजपा से महेंद्रजीत सिंह मालवीया की कांग्रेस में वापसी के बाद कई और राजनेताओं की कांग्रेस में लौटने की चर्चा है। पढ़ें खास रिपोर्ट-
Mahendrajeet Singh Malviya Quits Bjp: राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने भाजपा छोड़कर सियासी हलचल मचा दी है। वे दोबारा कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। हालांकि अभी इसका औपचारिक एलान होना बाकी है।
मालवीया 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। विधायकी से इस्तीफा देकर उन्होंने बांसवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के राजकुमार रोत ने 2 लाख से अधिक मतों से हरा दिया।
मालवीया जयपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर भाजपा से कांग्रेस में लौटने का सार्वजनिक एलान कर चुके हैं। रविवार (11 जनवरी) को उन्होंने जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मुलाकात के बाद कांग्रेस में वापसी की घोषणा की थी।
कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में मालवीया ने कहा था कि भाजपा की सत्ता होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र में जनता के काम नहीं करा पा रहे थे। सरकार में कोई भी गरीबों की बात नहीं सुनता।
मनरेगा की किश्तें महीनों से अटकी हुई हैं, किसानों को खाद नहीं मिल रहा। मैंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ को इस संबंध में कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसलिए मैंने मान लिया कि आदिवासी क्षेत्र में जनता का उत्थान केवल कांग्रेस ही कर सकती है।
पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि उन्हें महेंद्रजीत सिंह मालवीया से एक पत्र मिला, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी छोड़ना एक गलती थी। कांग्रेस ने हमेशा उन्हें सम्मान और आदर दिया है और वे कांग्रेस के सिद्धांतों और नीतियों में विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं।
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डोटासरा ने कहा कि मालवीया ने स्वीकार किया कि भाजपा में शामिल होने का फैसला एक बहुत बड़ी गलती थी। अब भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें भाजपा में घुटन महसूस हो रही थी और वे वहां एक पल भी नहीं रहना चाहते थे।
पीसीसी प्रमुख ने आगे कहा कि मामला पार्टी की अनुशासन समिति को भेज दिया गया है और उसमें इस मामले पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद राज्य प्रभारी के माध्यम से हाई कमान को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे और पार्टी अपना फैसला लेगी।
जयपुर में महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने कहा कि कांग्रेस उनके लिए कोई नई पार्टी नहीं है। उन्होंने पिछले 40 साल कांग्रेस में बिताए हैं। इस दौरान सरपंच, प्रधान, विधायक, सांसद और दो बार सरकार में मंत्री के रूप में काम किया।
हालांकि, कुछ समय पहले उन्हें लगा कि डबल इंजन वाली सरकार के सत्ता में रहते हुए उनके क्षेत्र में खूब विकास होगा और जनता को लाभ मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कार्यकर्ताओं और जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसी कारण उन्होंने अपनी मर्जी से एक बार फिर कांग्रेस में लौटने का फैसला किया है। महेंद्रजीत सिंह मालवीया की पत्नी रेशम मालवीया कांग्रेस से बांसवाड़ा की निवर्तमान जिला प्रमुख हैं।
दूसरी ओर भाजपा सूत्रों का कहना है कि महेंद्रजीत सिंह मालवीया का पार्टी छोड़ना दक्षिणी राजस्थान में उनके काम करने के तरीके का नतीजा था।
संगठन के कामकाज के प्रति मालवीया के रवैये से उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में पार्टी के आदिवासी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी।
सूत्रों ने बताया कि मालवीया पार्टी के मामलों को काफी हद तक अपनी शर्तों पर चलाने की कोशिश कर रहे थे। उनका यह तरीका पार्टी लाइन के साथ मेल नहीं खा रहा था।
इसी बीच 13 जनवरी को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर एसीबी ने कार्रवाई भी शुरू कर दी। राजनीतिक गलियारों में इसे मालवीया पर दबाव की राजनीति के रूप में देखा जा रहा हैं।
खुद मालवीया का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई दबाव बनाने के लिए की जा रही है। लेकिन वे अपने निर्णय पर पूरी तरह दृढ़ हैं और जो होगा, देखा जाएगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी छापेमारी को राजनीतिक दबाव बनाने की कार्रवाई करार दिया है।
वहीं राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि हमारी आपस में चर्चा हुई हैं। ऐसी कोई बात नहीं हैं। मैं मालवीया से नियमित रूप से संपर्क में हूं।
पार्टी में छोटी-मोटी बातें होती रहती है, हम आपस में मामला समझ लेंगे। भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि मालवीया आज भी भाजपा में हैं। कल क्या होगा, इसका मैं जवाब नहीं दे सकता हूं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, महेंद्रजीत सिंह मालवीया को एक प्रमुख आदिवासी चेहरे के रूप में देखा जाता है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद वे पार्टी में बड़ी भूमिका की उम्मीद लगाए हुए थे।
लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर उनका प्रभाव कथित तौर पर कमजोर पड़ गया। इससे मालवीया असंतुष्ट थे।
मालवीया के भाजपा छोड़ने पर क्या बोले किरोड़ीलाल मीणा देखें वीडियो
वागड़ क्षेत्र को कांग्रेस का परंपरागत गढ़ माना जाता हैं। वहीं भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) इस क्षेत्र में लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
ऐसे में इस साल होने वाले शहरी निकाय चुनावों से पहले मालवीया का कांग्रेस में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा लाभ और भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
23 माह बाद भाजपा से महेंद्रजीत सिंह मालवीया की कांग्रेस में वापसी के बाद कई और राजनेताओं की 'घर वापसी' की संभावनाओं को बल मिला है।
इनमें पूर्व विधायक कांता गरासिया व कैलाश मीणा, रामचन्द्र सराधना, अशोक तंवर, पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा और गोपाल गुर्जर जैसे कई नेता कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क में बताए जा रहे हैं।
बता दें कि खिलाड़ी लाल बैरवा ने लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। लेकिन केवल चार माह बाद ही उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी।
उनका कहना था कि भाजपा से उनको कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वे पार्टी की विचारधारा से खुद को नहीं जोड़ पा रहे थे। इसके बाद से वे लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं।
खिलाड़ी लाल बैरवा पिछली गहलोत सरकार में बसेड़ी से कांग्रेस के एमएलए थे। 2018 में कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता।
इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में वे करौली-धौलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे। मालूम हो कि तमाम विरोधों के बावजूद 2025 में मेवाराम जैन और अमीन खान की भी कांग्रेस में वापसी हो चुकी है।