Sanjeevani Booti Mission: भारत में हर रोज सड़क हादसों में लगभग 500 लोगों की जान चली जाती है। गोल्डन आवर में सड़क में घायल मरीजों को अस्पताल में दाखिल करा दिया जाए तो हर वर्ष 60 हजार लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। ऐसे लोगों की जान बचाने के लिए हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने 'संजीवनी बूटी मिशन' तैयार की है। सड़क हादसों में सिर्फ 1 रुपये में जान बचाने वाली योजना के बारे में पत्रिका ने राघवेंद्र से बातचीत की।
Sanjeevani Booti Mission: सड़क पर किसी मोटरसाइकिल से जा रहे किसी व्यक्ति को कार वाले ने हिट किया और रूक कर (Hit and Run Cases in India) उसे अस्पताल पहुंचाने की बजाय उसने अपनी गाड़ी और तेज भगाई और नौ, दो, ग्यारह हो गया। अब बाइक वाले की जान बचाने के लिए पहला घंटा जिसे गोल्डन आवर (Golden Hour Rule in Road Accident) कहते हैं, कोई मदद के लिए सामने नहीं आया। जाहिर सी बात है कि सड़क दुघर्टना में घायल व्यक्ति का खून रिसता रहा और उसकी जान चली गई। मेडिकल साइंस के मुताबिक दुघर्टना के पहले घंटे में अस्पताल में दाखिला करवाकर बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है। हेलमेट मैन ऑफ इंडिया (Helmet Man Of India) राघवेंद्र कुमार के मुताबिक, सरकार और हॉस्पिटल्स की मदद से नई पहल 'संजीवनी बूटी मिशन' (Sanjeevani Booti Mission) से हर साल सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकेगी। आइए उन्हीं से समझते हैं।
भारत में सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को सिर्फ एक रुपए में हेलिकॉप्टर एयर एंबुलेंस (Helicopter Air Ambulance) की सुविधा मिलेगी। यह खबर सुनकर कोई भी चौंक जा सकता है। यह बातें किसी को भी सपने जैसी या फिल्मी भी लग सकती है। लेकिन यह खबर बिल्कुल सच है। सड़क दुर्घटना के खिलाफ पिछले 12 वर्षों से लड़ाई लड़ने वाले हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार इस मिशन की शुरुआत अगले वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश राज्य के यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) पर 3 हेलीकॉप्टर एंबुलेंस के साथ शुरुआत करने जा रहे हैं। इस मिशन का नाम उन्होंने संजीवनी बूटी मिशन रखा है। यह योजना फिलहाल यमुना एक्सप्रेस वे पर शुरू की जाएगी, लेकिन बाद में इसका विस्तार किया जाएगा।
संजीवनी बूटी मिशन के लिए हेलमेट मैन कई एवियशन कंपनियों (Aviation Companies) को भी इसमें शामिल करने की योजना बना रहे हैं। हाल ही में टाटा की एयर इंडिया (Air India) के हेड ऑफिस गुड़गांव वाटिका में कई बड़े अधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा पर उनकी मीटिंग हुई। एयर इंडिया के सीईओ कैंबेल विल्सन (Campbell Wilson, CEO, Air India) ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया को सम्मानित भी किया। हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने अधिकारियों के बीच अपने विजन को एक H3 फॉर्मूला (H3 Formula for Sanjeevani Booti Mission) में शेयर किया। H3 का मतलब हेलिकाप्टर, हाइवे और हॉस्पिटल है। इसका ब्लू प्रिंट एक हेलमेट के ऊपर डिजाइन किया गया है। उन्होंने कुछ अधिकारियों को अपनी योजना का ब्लू प्रिंट गिफ्ट भी किया। मीटिंग में शामिल ज्यादातार अधिकारियों ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया के मिशन को ऐतिहासिक बताया।
संजीवनी बूटी मिशन योजना पर दिल्ली-एनसीआर और यमुना एक्सप्रेस पर मथुरा के एक हॉस्पिटल ने हेलीपैड बनाने की हामी भर दी है। वहीं ग्रेटर नोएडा में जिम्स हॉस्पिटल और निम्स हॉस्पिटल (NIMS Hospital) भी राजी है। राघवेंद्र कुमार ने पत्रिका से बातचीत में बताया, 'एयर एम्बुलेंस के लिए तीन हेलिकॉप्टर की व्यवस्था हो गई है। एक हेलीकॉप्टर इस मिशन के तहत एक साल में 500 किलोमीटर की उड़ान भरेंगे और इसका सालाना खर्च 7 करोड़ रुपये तक आएगा। इस तरह से तीन हेलिकॉप्टर पर सालाना 21 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका खर्च पूरा करने के लिए यमुना एक्सप्रेस के टोल से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन के टोल से एक रुपया लिया जाएगा। इससे हर साल 36 करोड़ रुपये मिलेंगे।' हेलमैटमैन ने यह भी बताया कि वह बहुत जल्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे।
आपकी इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने में कहीं कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी हमारी इस योजना में सिर्फ सेना के रिटायर्ड पायलटों के लिए हॉस्पिटल में ठहरने की व्यवस्था की बात नहीं बन पाई है। चूंकि हेलीपैड हॉस्टिपल में बनाए जाएंगे, जिसपर उनसे सहमति बन चुकी है। मेरा मानना है कि हेलीपैड चूंकि हॉस्पिटल में होंगे तो पायलटों की रूकने की व्यवस्था भी वहीं होनी चाहिए। मैंने हॉस्पिटल वालों से कहा कि आप पायलटों को पांच सितारा सुविधाएं ना सही तीन सितारा सुविधाओं के साथ ठहरने की व्यवस्था कर दीजिए। अभी उसपर बात चल रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सहमति बन जाएगी।
इस मिशन में भारतीय सेना (Indian Army) भी उनका सहयोग कर रही हैं। वैसे यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले भी फाइटर प्लेन अभ्यास के तौर पर उतारा जा चुका है, ताकि भविष्य में किसी युद्ध जैसे संकट के वक्त यमुना एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल किया जा सके। अब भारतीय सेना सरहदों को घायल होने से बचाने के साथ, अब सड़कों पर भी हेलमेट मैन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर घायलों को बचाने के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है, क्योंकि इस यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और इसमें भारतीय सेना के जवान भी शामिल रहे हैं।
हेलमेट मैन ने बताया कि भारत ने सड़क के निर्माण में कई देश को पीछे छोड़ दिया है। सरकार सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति के लिए अस्पताल के अंदर डेढ़ लाख रुपये का फ्री कैशलेस योजना लागू करवा चुकी है। संजीवनी बूटी मिशन से जनता में और भी उत्साह बढ़ेगा। हवाई सर्वेक्षण एवं सुविधा से भारत को एक नई प्रगति की पहचान मिलेगी और उत्तर प्रदेश के राज्य में सड़क सुरक्षा को एक और नई मजबूती मिलेगी।
हेलमेट मैन ने कहा, 'मैं कुछ भी नया नहीं कर रहा हूं। भारत की करोड़ों जनता यह सब दशकों से करती आ रही है। ट्रेन से यात्रा करते समय मां गंगा के ऊपर बने ब्रिज से गुजरते हुए 1 से लेकर 5, 10 रुपये का सिक्का नीचे उछाल देती है। ऐसी ही आस्था सड़क पर अपनी गाड़ी से चलने वालों की होती है। गाड़ी के अंदर डैश पर अलग अलग भगवानों की तस्वीर लगाने का मकसद खुद की सुरक्षा और विश्वास से जुड़ी होती है। संजीवनी बूटी मिशन से उनकी आस्था और विश्वास को और मजबूती मिलेगी। यमुना एक्सप्रेस वे से गुजरने वाली हर गाड़ी पर लगने वाले टोल में एक रुपये का शुल्क इस मिशन के लिए लोगों से लिया जाएगा। आप देखिए कि इस 1 रुपये से सड़क हादसे में गंभीर रूप से जख्मी लोगों की जान बचाई जाएगी। इसके अलावा घायलों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आपने इस मिशन का नाम संजीवनी बूटी क्यों रखा? इसके जवाब में राघवेंद्र ने कहा कि रामायण में एक प्रसंग आता है जब लक्ष्मण जी का प्राण संकट में पड़ जाता है। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए वैद्य जी को बुलाया गया। वैद्य जी ने लक्ष्मण जी की नाड़ी देखी और कहा कि इनकी जिंदगी अब संजीवनी बूटी से ही बचाई जा सकेगी। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आते हैं, जिसके बाद लक्ष्मण जी का प्राण बचाया जा सका।
हेलमेट मैन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह पिछले 12 वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं के खिलाफ एक अदृश्य युद्ध लड़ रहे हैं। सड़क हादसों में जान बचाने की मुहिम चलाने वाले राघवेंद्र का कहना है कि कोई भी युद्ध लड़ना इतना आसान नहीं होता। इस युद्ध में आर्थिक नुकसान के साथ और मुझे कई कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। ऐसी कठिनाइयां झेलने की शक्ति सबके पास नहीं होती। वह बताते हैं कि उन्होंने सड़क हादसे में अपने रूम पार्टनर और बेहद प्यारे मित्र कृष्णा को हेलमेट ना लगाने के कारण नोएडा एक्सप्रेसवे पर 2014 में खो दिया। मैंने उसके बाद यह संकल्प लिया कि वह अब सड़क दुघर्टना में घायलों को बचाने की मुहिम चलाएंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक भारत के 22 राज्यों की सड़कों पर घूम-घूमकर 75 हजार से अधिक हेलमेट बांटें और हजारों लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं। मैं भारत के तीनों सेनाओं के अधिकारियों और जवानों से मिलता रहता हूं और इस काम के लिए उनका मार्गदर्शन लेकर अपने मिशन को आगे बढ़ा रहा हूं। भारत सड़क दुर्घटना पर विजय पाने के बाद ही एक खुशहाल और विकसित राष्ट्र बन पाएगा।