
Corporate World Task Masking: कॉर्पोरेट जगत इस समय एक अजीब स्थिति से गुजर रहा है। एक तरफ कंपनियां कर्मचारियों की हर हरकत पर नजर रखने के लिए 'Bossware' (निगरानी सॉफ्टवेयर) लगा रही हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों ने भी इस सिस्टम को मात देने के लिए 'The Art of Fake Work' में महारत हासिल कर ली है।
माउस जिगलर्स से लेकर स्क्रीन पर नकली कोडिंग स्क्रिप्ट चलाने तक, कर्मचारी अब काम का आउटपुट देने के बजाय सिर्फ 'व्यस्त दिखने' में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं। एक्सपर्ट्स इसे 'फॉक्स प्रोडक्टिविटी' या 'टास्क-मास्किंग' कह रहे हैं, जहां सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराना ही असल काम बन गया है। यह केवल किसी एक कर्मचारी की चालाकी नहीं है, बल्कि उस खोखले वर्क-कल्चर की कहानी है जो कर्मचारियों को कामचोर नहीं, बल्कि 'दिखावटी एक्टर' बनने पर मजबूर कर रहा है।
फॉक्स प्रोडक्टिविटी (Faux Productivity) का मतलब है असल में कोई ठोस आउटपुट या काम किए बिना, खुद को बहुत अधिक व्यस्त और काम में डूबा हुआ दिखाना।
डिजिटल वर्कप्लेस में इसे करने के लिए कर्मचारी कई तरह के तरीके अपनाते हैं, जैसे
पहली नजर में यह लग सकता है कि कर्मचारी आलसी हो गए हैं या काम चोरी कर रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समस्या कर्मचारियों की नहीं, बल्कि कंपनियों के खराब 'वर्क कल्चर' की है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं।
'Fake Work' के कुछ क्लासिक और पारंपरिक तरीके
क्या 'लॉग-इन आवर्स' और 'कीस्ट्रोक्स' को ट्रैक करना वाकई किसी कर्मचारी की असल परफॉर्मेंस का पैमाना हो सकता है? कंपनियां आउटपुट के बजाय स्क्रीन-टाइम को इतनी तरजीह क्यों देती हैं?
कॉर्पोरेट में एक कहावत है "जल्दी काम खत्म करने का इनाम और ज़्यादा काम होता है। क्या आपको लगता है कि कंपनियां अनजाने में ही सही, लेकिन स्मार्ट और तेज काम करने वाले कर्मचारियों को 'पनिश' (Punish) करती हैं, जिससे वे 'Task-Masking' की ओर बढ़ते हैं?
जब कोई कर्मचारी 'Acting my Wage' (जितनी सैलरी, उतना ही काम) का रवैया अपनाता है, तो मैनेजमेंट इसे अनुशासनहीनता (Discipline issue) मानता है या फिर इसे कंपनी के खराब इंसेंटिव स्ट्रक्चर का फेलियर माना जाना चाहिए?
यह मैनेजमेंट के लिए अनुशासनहीनता (Discipline Issue) हो सकता है, लेकिन गहराई से देखें तो यह पूरी तरह कंपनी के खराब इंसेंटिव स्ट्रक्चर और कल्चर का फेलियर है।
इस द्वंद्व को दो अलग-अलग नजरियों से समझा जा सकता है।
भविष्य के वर्कप्लेस में 'Faux Productivity' के इस थिएटर को खत्म करने के लिए क्या एचआर को अपनी 'विजिबिलिटी पॉलिटिक्स' (जो दिखेगा वही बढ़ेगा) को बदलकर पूरी तरह 'Result-Oriented' होना पड़ेगा? इसकी राह में क्या चुनौतियां हैं?
'Faux Productivity' का यह नाटक तभी खत्म होगा जब एचआर 'विजिबिलिटी पॉलिटिक्स' (दिखावे की राजनीति) को छोड़कर पूरी तरह 'Result-Oriented' (नतीजों पर आधारित) मॉडल अपनाएगा।
हालांकि, इस बदलाव की राह में 3 बड़ी चुनौतियां हैं।
क्या आपके ऑफिस में भी किसी मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर पर हर वक्त 'Green Dot' (Available) रहना जरूरी माना जाता है? इसे मेंटेन रखने के लिए क्या आपने कभी 'Mouse Jiggler' या किसी और ट्रिक का इस्तेमाल किया है?
आज 'Green Dot' (ऑनलाइन स्टेटस) बनाए रखना कर्मचारियों के लिए बड़ी मानसिक मजबूरी है। कंपनियों के ' निगरानी सॉफ्टवेयर के डर से कर्मचारी काम पूरा होने के बाद भी खुद को ऑनलाइन दिखाने के लिए 'Mouse Jigglers' का खूब इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा लोग कीबोर्ड की किसी 'चाबी' (Key) पर भारी चीज दबाकर रखना या माउस के नीचे चलती हुई कलाई घड़ी रखने जैसे देसी जुगाड़ अपनाते हैं, ताकि उनका स्टेटस हमेशा उपलब्ध दिखे।
अगर आप अपना तय काम समय से पहले (जैसे 8 घंटे का काम 4 घंटे में) पूरा कर लें, तो मैनेजमेंट का रवैया क्या होता है?
जल्दी काम खत्म करने का इनाम अक्सर 'और ज़्यादा काम' मिलता है, जिसे कॉर्पोरेट में 'एफिशिएंसी पेनाल्टी' कहते हैं। मैनेजमेंट स्मार्ट वर्क की सराहना करने या आराम देने के बजाय बिना किसी अतिरिक्त इंसेंटिव के नया टास्क सौंप देता है। नतीजा यह होता है कि कर्मचारी बर्नआउट से बचने के लिए काम को जानबूझकर धीमा करना (Work Stretching) और व्यस्त दिखने का नाटक करना बेहतर समझते हैं।
क्या आपको किसी इंसेंटिव के बदले और ज़्यादा काम सौंप दिया जाता है?
अक्सर बिना किसी वित्तीय इंसेंटिव या प्रमोशन के, सबसे तेज और काबिल कर्मचारियों पर ही दूसरों का पेंडिंग काम भी लाद दिया जाता है। मैनेजमेंट का यह रवैया अच्छा काम और ज़्यादा काम" का बोझ बन जाता है। इसी से तंग आकर कर्मचारी जल्दी काम खत्म करने के बावजूद 'Task-Masking' का सहारा लेते हैं और खुद को केवल व्यस्त दिखाते हैं।
आपके ऑफिस में प्रमोशन या तारीफ किसे ज्यादा मिलती है उसे जो चुपचाप अपना काम खत्म करके टाइम पर लॉग-ऑफ कर देता है, या उसे जो काम भले ही कम करे लेकिन देर रात तक ऑनलाइन रहकर ईमेल्स का जवाब देता है?
ज्यादातर ऑफिसों में तारीफ और प्रमोशन 'विजिबिलिटी पॉलिटिक्स' यानी दिखावा करने वाले को ही मिलता है। जो कर्मचारी देर रात तक ऑनलाइन रहकर ईमेल्स का जवाब देता है या वीकेंड पर एक्टिव दिखता है, मैनेजमेंट उसे ही 'डेडिकेटेड' मान लेता है। इसके विपरीत, जो स्मार्ट कर्मचारी चुपचाप अपना काम समय पर खत्म करके लॉग-ऑफ कर देता है, उसे अक्सर कमिटमेंट की कमी या औसत मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।