Richest Temples In Rajasthan : राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले का श्री सांवलिया सेठ मंदिर सबसे अधिक चढ़ावा वाला मंदिर माना जाता है।
Richest Temples In Rajasthan : साल 2026 के पहले दिन राजस्थान के सभी प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। खाटूश्यामजी से लेकर सालासर बालाजी और श्रीनाथजी से लेकर जयपुर के आराध्य देव गोविंद देवजी तक लाखों श्रद्धालु शीश नवाने के लिए पहुंचे। सुरक्षा के कड़े पहरे, ड्रोन की निगरानी के बीच भगवान की एक झलक पाने के लिए भक्त बेकरार दिखे।
राजस्थान में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते है। सभी मंदिरों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा अर्पित करते हैं। इन मंदिरों में कुल मिलाकर हर माह करोड़ों रुपए चढ़ावे के रूप में आते हैं, जिसमें नकदी के साथ-साथ सोना-चांदी व अन्य भेंट शामिल होती हैं।
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देवस्थान विभाग की ओर से चढ़ावा पाने वाले राजस्थान के मंदिरों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की जाती। हालांकि मंदिर ट्रस्टों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर राजस्थान के सबसे दौलतमंद मंदिर की बात करें तो चित्तौड़गढ़ जिले का श्री सांवलिया सेठ मंदिर सबसे अधिक चढ़ावा वाला मंदिर माना जाता है। हिंदी पंचाग के हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सांवलियाजी का दानपात्र (भंडार) खोला जाता है।
सांवलिया सेठ के दानपात्र में आने वाली दान राशि की कई चरणों में गिनती होती है, जिसमें करोड़ों रुपए की नकद राशि और सोना-चांदी व अन्य चीजें मिलती हैं। श्री सांवलिया सेठ मंदिर के बाद सीकर जिले का खाटू श्याम जी मंदिर, राजसमंद जिले का श्रीनाथजी मंदिर, चूरू जिले का सालासर बालाजी मंदिर और दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर नाम आता है।
भारत में सबसे अधिक चढ़ावा आने वाले सबसे प्रमुख 5 मंदिरों की बात करें तो इनमें सबसे पहला नाम तिरुमला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर का है। यह मंदिर भारत का ही नहीं दुनिया का सबसे धनी मंदिर माना जाता है।
आंध्र प्रदेश के तिरुमला पहाड़ पर स्थित इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) की पूजा होती है। मंदिर के ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को नकद राशि चढ़ाना सर्वाधिक पसंद करते है। इसके बाद सोना- चांदी दान में देते हैं।
2024 में मंदिर ट्रस्ट ने 1,161 करोड़ रुपए की बैंक एफडी कराई, जो 12 वर्ष में सबसे अधिक है। तिरुपति मंदिर और उसके कई ट्रस्टों के बैंकों में 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नकदी जमा है।
तिरुपति बालाजी के बाद चढ़ावे के मामले में महाराष्ट्र के शिरडी साईं मंदिर, जम्मू-कश्मीर का माता वैष्णो देवी मंदिर, केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर और मुंबई के सिद्धिविनायक गणेश मंदिर का नाम आता है।
श्री सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मण्डफिया कस्बे में स्थित है। मान्यता है कि मंदिर में जो भक्त सच्चे मन से मन्नत मांगता है वो जरूर पूरी होती है। इसी कारण देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए आते हैं और मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाते हैं। हाल ही में एक भक्त ने मन्नत पूरी होने पर ठाकुरजी के चरणों में 560 ग्राम शुद्ध चांदी से निर्मित रिवॉल्वर का मॉडल भेंट किया था।
इससे पहले भी मंदिर में भक्त अनूठे उपहार जैसे प्लेन, पेट्रोल पंप, हल, घर, बांसुरी, ईंट, हेलीकॉप्टर, क्रिकेट बॉल स्टंप और सोने-चांदी से बनी कई अन्य चीजें चढ़ावे में चढ़ा चुके हैं। सांवलिया सेठ मंदिर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है। मंदिर से निकटतम रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ जंक्शन और एयरपोर्ट उदयपुर है।
सोशल मीडिया की वजह से चर्चित खाटू श्याम मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह राजस्थान के सीकर जिले में है। हिन्दू धर्म के अनुसार खाटू श्याम जी (बर्बरीक) कलियुग में कृष्ण के अवतार हैं, जिन्होंने श्रीकृष्ण से वरदान प्राप्त किया था कि वे कलियुग में उनके नाम से पूजे जाएंगे। खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' भी कहा जाता है। इसी विश्वास के चलते देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
फाल्गुन मेला, हर माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी और अवकाश के दिन बाबा की दर पर ढोक लगाने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त यहां निशान, प्रसाद और दान-दक्षिणा अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।
दान और चढ़ावे के लिहाज से भी यह मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। खाटू से सबसे निकटवर्ती रेलवे स्टेशन रींगस और एयरपोर्ट जयपुर है। मंदिर जयपुर से करीब 89 किलोमीटर की दूरी पर है।
श्रीनाथजी मंदिर राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में स्थित है। प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। दान और चढ़ावे के लिहाज से भी मंदिर सबसे समृद्ध मंदिरों में गिना जाता है।
मंदिर की व्यवस्थाएं श्रीनाथजी मंदिर बोर्ड की ओर से संचालित की जाती हैं। श्रीनाथजी मंदिर की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नर और मादा नामक दो तोपों से 21 बार गोले दागकर सलामी दी जाती है।
हाल ही में उद्योगपति मुकेश अंबानी श्रीनाथजी मंदिर में ढोक लगाने के लिए पहुंचे थे। बताया जाता है कि उन्होंने मंदिर में 15 करोड़ रुपए का दान दिया। इसके अलावा नाथद्वारा में आधुनिक वरिष्ठ वैष्णव सेवा सदन के निर्माण की घोषणा की, जिसमें करीब 100 कमरे होंगे। सदन के अंदर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और शुद्ध आहार की व्यवस्था की जाएगी।
साथ सदन के अंदर ही चिकित्सा व्यवस्था के लिए अस्पताल भी होगा। सत्संग के लिए एक बड़ा सभागार बनाया जाएगा। यह सदन 24 घंटे संचालित होगा। श्रीनाथजी मंदिर सड़क, रेल और हवाई मांग से पहुंचा जा सकता है। यहां से निकटतम रेलवे स्टेशन नाथद्वारा रेलवे स्टेशन है, जबकि उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन करीब 48 किमी दूर है। सबसे नजदीक एयरपोर्ट उदयपुर है।
सालासर बालाजी मंदिर शेखावाटी के चूरू जिले में स्थित है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते देशभर से लाखों श्रद्धालु इस अनोखे मंदिर में दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी के दर्शन के लिए आते हैं।
सालासर बालाजी मंदिर विशेष रूप से उन भक्तों के बीच लोकप्रिय है, जो अपनी आय का एक भाग नियमित रूप से दान करना चाहते हैं। दान और चढ़ावे के लिहाज से यह मंदिर भी राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में शामिल है।
सालासर बालाजी मंदिर आने के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। यहां से निकटतम रेलवे स्टेशन सुजानगढ़ (41 KM दूर ) और चूरू ( 77 KM दूर ) हैं, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है। सबसे नजदीक एयरपोर्ट जयपुर है, जो यहां से लगभग 191 किलोमीटर दूर है।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। यहां हर माह यूपी, हरियाणा, MP और दिल्ली सहित देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
हनुमान जी का यह मंदिर देश में भूत-प्रेत बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक कष्टों से मुक्ति के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से अर्जी लगाता है, मेहंदीपुर बालाजी महाराज की कृपा से उसका बेड़ा पार हो जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में बालाजी, प्रेतराज और भैरव विराजमान हैं। मंदिर में शनिवार और मंगलवार को सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं। दान और चढ़ावे के लिहाज से भी मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
मेहंदीपुर बालाजी कस्बे से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बांदीकुई जंक्शन लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां से मंदिर जाने के लिए हर समय टैक्सी उपलब्ध रहती है।
मंदिर जयपुर-आगरा सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, ऐसे में यहां आने के लिए हर थोड़ी देर में बस सेवा उपलब्ध है। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से निकटतम एयरपोर्ट जयपुर है, जो यहां से करीब 100 KM की दूरी पर है।