
Doublet Earthquake: वेनेजुएला में बुधवार की रात आए एक के बाद आए भूकंपों ने एक बेहद खतरनाक घटनाक्रम को जन्म दिया। इसे 'डबलट भूकंप' (Venezuela Doublet Earthquake) कहा जाता है। इस दोहरे झटके ने वेनेजुएला की राजधानी कराकास में कई इमारतों को गिरा दिया और सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दीं। आइए जानते हैं कि डबलट भूकंप (Science of Doublet Earthquake) आने के पीछे का विज्ञान?
वेनेजुएला में पहला भूकंप का झटका लगा, जिसकी तीव्रता 7.2 थी। भूकंप का केंद्र कराकास के पश्चिम में स्थित सान फेलिपे सिटी के पास था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, इस पहले झटके ने लगभग 3 मील (करीब 5 किलोमीटर) दूर स्थित एक अन्य सक्रिय भ्रंश (Fault) पर दबाव बढ़ा दिया। इसके परिणामस्वरूप सिर्फ 39 सेकंड बाद उसी क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आ गया। इस तरह के दूसरे भूकंप की घटना को आफ्टरशॉक नहीं माना जाता है, बल्कि इसे स्वतंत्र भूकंप माना जाता है।
यह भूकंप अपेक्षाकृत उथली गहराई, यानी लगभग 6 मील (करीब 10 किलोमीटर) पर आया था। इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसके झटके उत्तरी ब्राज़ील तक महसूस किए गए। यह 1900 के बाद वेनेजुएला के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक बताया जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार इस घटना में 10,000 से लेकर एक लाख लोगों की जान जा सकती है। ये झटके वेनेजुएला के अलावा कोलंबिया और ब्राजील तक महसूस किए गए।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे सीस्मिक डबलट (Seismic Doublet) बताया है। वेनेजुएला में आए डबलट भूकंप (Doublet Earthquake) ने वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह सामान्य भूकंपों से अलग और अपेक्षाकृत दुर्लभ घटना होती है, जिसमें बहुत कम समय के अंतराल में एक ही क्षेत्र में दो बड़े भूकंप आते हैं। वेनेजुएला में पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि उसके केवल 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। इस दोहरे झटके ने राजधानी कराकास सहित कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया।
डबलट भूकंप वह स्थिति है, जब दो बड़े भूकंप लगभग समान क्षेत्र में कुछ सेकंड, मिनट या कुछ घंटों के भीतर आते हैं और दोनों की तीव्रता में बहुत कम अंतर होता है। अधिकांश मामलों में पहला भूकंप दूसरे भूकंप के लिए परिस्थितियां तैयार कर देता है। पहले झटके से पृथ्वी की पपड़ी में तनाव (Stress) का संतुलन बदल जाता है, जिससे पास की किसी सक्रिय फॉल्ट लाइन पर दबाव बढ़ सकता है और वहां दूसरा बड़ा भूकंप आ सकता है।
एक भूकंप आने के बाद कुछ मिनट या घंटों के अंतराल पर छोटे या मामूली झटके आते हैं, इसे आफ्टरशॉक कहा जाता है। दरअसल मुख्य भूकंप के बाद पृथ्वी की पपड़ी में तनाव रह जाता है, वह इन छोटे या मामूली झटकों के जरिए रिलीज होते हैं।
वेनेजुएला, दुनिया में सर्वाधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक है। वेनेजुएला पृथ्वी की दो प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों कैरेबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट की सीमा पर स्थित है। ये दोनों प्लेटें लगातार एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं। प्लेटों की इस धीमी लेकिन निरंतर गति के कारण वर्षों तक ऊर्जा पृथ्वी के भीतर जमा होती रहती है और जब यह ऊर्जा अचानक से मुक्ति होती है तब भूकंप की घटना आकार लेती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पहला 7.2 तीव्रता का भूकंप आने के बाद आसपास की एक दूसरी फॉल्ट लाइन पर तनाव बढ़ गया। यही अतिरिक्त दबाव कुछ ही सेकंड में 7.5 तीव्रता वाले दूसरे भूकंप का कारण बना। इसे स्ट्रेट ट्रांसफर (Stress Transfer or Coulomb Stress Transfer) कहा जाता है।
फॉल्ट पृथ्वी की चट्टानों में बनी दरार या टूटन होती है। इस दरार के दोनों ओर स्थित चट्टानें जब अचानक खिसकती हैं, तब भूकंप उत्पन्न होता है। फॉल्ट तीन तरह के होते हैं- स्ट्राइक स्लिप फॉल्ट (Strike-slip Fault), सामान्य फॉल्ट (Normal Fault) और रिवर्स फॉल्ट (Reverse Fault)।
स्ट्राइक स्लिप फॉल्ट: दोनों चट्टानी खंड क्षैतिज दिशा में एक-दूसरे के समानांतर फिसलते हैं।
सामान्य फॉल्ट: ऊपरी चट्टान जब नीचे की ओर खिसक जाती है।
रिवर्स फॉन्ट : ऊपरी चट्टान ऊपर की ओर चढ़ जाती है।
इस घटना में भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर (करीब 6 मील) थी, जिसे उथला (Shallow Earthquake) भूकंप माना जाता है। ऐसे भूकंपों की ऊर्जा पृथ्वी की सतह तक कम दूरी तय करके पहुंचती है, इसलिए झटके अधिक तीव्र महसूस होते हैं और इमारतों, सड़कों तथा अन्य ढांचों को अधिक नुकसान होता है। इसके विपरीत, गहरे भूकंपों की ऊर्जा सतह तक पहुंचने से पहले काफी हद तक कमजोर हो जाती है।
डबलट भूकंप में पहले भूकंप के झटके ने इमारतों और संरचनाओं को कमजोर कर दिया। इसके तुरंत बाद आने वाला दूसरे भूकंप का झटका और अधिक शक्तिशाली था जिसने पहले से क्षतिग्रस्त भवनों को पूरी तरह धवस्त कर दिया। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन भूकंप के झटकों की गहराई कम होने के चलते तीव्रता भी ज्यादा रही।
भूकंप के झटकों से पहले इसके आने का सटीक समय, स्थान और तीव्रता बताने में विज्ञान सक्षम नहीं है। हालांकि, मॉर्डन सिस्मोलॉजिकल उपकरण यह पता लगा सकते हैं कि कौन-से क्षेत्र सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर स्थित हैं और वहां भविष्य में बड़े भूकंप आने की संभावना अधिक हो सकती है। इसी आधार पर भूकंपरोधी निर्माण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाती हैं। यही वजह है कि भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में मजबूत निर्माण, वैज्ञानिक निगरानी और प्रभावी आपदा प्रबंधन ही नुकसान को कम करने का सबसे कारगर उपाय हैं।