Patrika Special News

Cinema Sign: 40 की उम्र और घुटनों में जकड़न, दर्द की वजह भी ‘सिनेमा साइन’ तो नहीं? सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन से जानिए

Cinema signs early stages : क्या 40 की उम्र में आपके घुटने भी जाम हो रहे हैं? जानिए ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मिहिर थानवी से कि क्यों डेस्क जॉब वाले युवा 'सिनेमा साइन' और घुटनों के दर्द के शिकार हो रहे हैं। विस्तार से जानें शरीर के वजन बढ़ने का हड्डियों पर क्या पड़ता है नकारात्मक असर, जिम में होने वाली गलतियां और बिना सर्जरी जोड़ों को प्राकृतिक रूप से मजबूत रखने के आसान उपाय।

9 min read
May 27, 2026
जानिए कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है घुटनों का दर्द। (Photo AI Generated)

Cinema Signs at Early Stages : कुछ साल पहले तक घुटनों का दर्द, जोड़ों में जकड़न और उठने-बैठने में तकलीफ जैसी समस्याओं को बुढ़ापे की निशानी माना जाता था। आमतौर पर 60 या 65 वर्ष की आयु के बाद ही लोग ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों के चक्कर लगाते नजर आते थे। लेकिन आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अस्पतालों के ऑर्थोपेडिक आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आने वाले मरीजों में एक बहुत बड़ी संख्या उन युवाओं की है, जो अपनी उम्र के चौथे दशक यानी 35 से 45 वर्ष के बीच हैं। इनमें कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा, लगातार डेस्क जॉब करने वाले लोग और गृहणियां शामिल हैं।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो घुटने साठ साल तक चलने के लिए बने थे, वे चालीस की उम्र में ही जवाब देने लगे हैं? क्या यह जीवनशैली की खराबी है, डाइट का दोष है, या फिर जिम में की जाने वाली अनजानी गलतियां इसका कारण हैं? इसे विस्तार से समझते है घुटनों के दर्द के शुरुआती लक्षणों, इसके छिपे हुए कारणों, और बिना सर्जरी के उपचार के वैज्ञानिक तरीके।

ये भी पढ़ें

Cherry Angioma Symptoms : चेरी एंजियोमा क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण, खतरे और आधुनिक इलाज की पूरी जानकारी

What is Cinema Sign: क्या है 'सिनेमा साइन' ?

डेस्क जॉब में लगातार 8 से 10 घंटे बैठना, मूवी हॉल में फिल्म देखना, लंबी फ्लाइट या ड्राइविंग करने के दौरान आपको एक ही स्थिति में बैठना पड़ता है। यह सबकुछ आपके रोजमर्रा का हिस्सा बन जाता है। एक समय ऐसा भी आ जाता है जब आपके घुटनों में दर्द शुरू होने लगता है। आप बैठने के बाद जब पहला कदम उठाते हैं और घुटने में तेज दर्द होता है, तो इसे ही 'सिनेमा साइन' कहा जाता है।

लाइफस्टाइल का संकट: 40 की उम्र में क्यों बढ़ रहा है घुटनों का दर्द?

बीते कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि जीवनशैली में बदलावों के चलते मानव शरीर की प्राकृतिक बनावट के साथ एक गंभीर असंतुलन पैदा हो रहा है। हमारा शरीर गतिशीलता (Mobility) के लिए बना है, लेकिन आरामतलबी जीवनशैली के चलते हमारी गतिशीलता में कमी आ रही है। इसके चलते युवाओं में घुटने खराब होने की शिकायतें बढ़ रही हैं।

  • लगातार बैठकर काम करना (Prolonged Sitting): आईटी प्रोफेशनल्स और डेस्क जॉब करने वाले लोग दिन में 8 से 10 घंटे लगातार कंप्यूटर के सामने बैठते हैं। इस दौरान घुटने लगातार 90 डिग्री के कोण पर मुड़े रहते हैं, जिससे घुटने की कटोरी (Patella) पर निरंतर दबाव बना रहता है और वहां रक्त संचार प्रभावित होता है।
  • सीढ़ियों का अत्यधिक इस्तेमाल: बिना लिफ्ट वाली बहुमंजिला इमारतों में बार-बार तेजी से सीढ़ियां चढ़ना और उतरना घुटनों के कार्टिलेज को समय से पहले घिस देता है। विशेषकर नीचे उतरते समय घुटनों पर शरीर के वजन का कई गुना भार पड़ता है।
  • लंबे समय तक ड्राइविंग: भारी ट्रैफिक में लगातार क्लच और ब्रेक दबाना या लंबी दूरी तक बिना ब्रेक के एक ही पोजीशन में पैर रखकर गाड़ी चलाना घुटनों के जोड़ों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।
  • टॉयलेट की बनावट: भारतीय शैली के टॉयलेट (Indian Toilet) का अत्यधिक इस्तेमाल, जहां घुटनों को पूरी तरह मोड़कर बैठना पड़ता है, पहले से ही संवेदनशील घुटनों के गैप को कम कर सकता है। हालांकि यह मांसपेशियों को मजबूत करता है, लेकिन अगर जोड़ में पहले से घिसन शुरू हो चुकी है, तो यह दर्द को अत्यधिक बढ़ा देता है।
  • हाई हील्स और गलत फुटवियर: महिलाओं में कम उम्र में घुटने के दर्द का एक बड़ा कारण ऊंची एड़ी के जूते (High Heels) पहनना है। हाई हील्स पहनने से शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र (Center of Gravity) बदल जाता है, जिससे घुटनों पर असामान्य और अत्यधिक दबाव पड़ता है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें युवा अक्सर करते हैं नजरअंदाज

शुरुआती दौर में घुटने अपनी खराबी का संकेत छोटे-छोटे तरीकों से देते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग 'थकान' या 'सामान्य कमजोरी' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।

  • सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय हल्की सी चरचराहट: यदि सीढ़ियां चढ़ते समय या नीचे आते समय घुटनों से कट-कट की आवाज (Crepitus) आती है या हल्का दर्द होता है।
  • जमीन पर बैठने के बाद उठने में असमर्थता: फर्श पर पालथी मारकर बैठने के बाद जब आप खड़े होते हैं, तो घुटनों में जान न होने का अहसास होना या किसी सहारे की जरूरत पड़ना।
  • स्क्वाट्स या लंग्स के बाद सूजन: जिम में वर्कआउट करने, विशेषकर स्क्वाट्स (Squats) या लंग्स (Lunges) जैसी एक्सरसाइज करने के अगले दिन घुटनों के ऊपर या पीछे की तरफ हल्की सूजन और भारीपन आ जाना।

वजन का गणित: 1 किलो ज्यादा वजन और घुटनों पर 6 गुना दबाव

मोटापा या बढ़ा हुआ वजन घुटनों का सबसे बड़ा दुश्मन है। हमारे घुटने शरीर का पूरा भार उठाने वाले मुख्य जोड़ हैं। जब हम जमीन पर सामान्य रूप से चलते हैं, तो हमारे घुटनों पर हमारे वास्तविक वजन का लगभग 3 से 4 गुना अधिक दबाव पड़ता है। वहीं, जब हम सीढ़ियां चढ़ते हैं या दौड़ते हैं, तो यह दबाव बढ़कर 5 से 6 गुना तक हो जाता है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें:

  • यदि आपका वजन 1 किलोग्राम बढ़ता है, तो चलते समय आपके घुटनों को 3 से 4 किलोग्राम का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है।
  • यदि आप सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, तो वही 1 किलोग्राम बढ़कर 5 से 6 किलोग्राम का दबाव बन जाता है।इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति का वजन उसकी लंबाई के अनुपात से 10 किलो ज्यादा है, तो उसके घुटने हर कदम पर 40 से 60 किलो का अतिरिक्त तनाव झेल रहे हैं।
  • इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी (Adipose Tissue) केवल एक निष्क्रिय वजन (Dead Weight) नहीं है, बल्कि यह शरीर में निरंतर रूप से कुछ ऐसे रसायनों (Cytokines) का स्राव करती है जो जोड़ों में अंदरूनी सूजन (Inflammation) को बढ़ाते हैं। यह सूजन घुटने के कार्टिलेज को तेजी से नष्ट करती है। डॉक्टर के अनुसार, यदि कोई मरीज अपने कुल वजन का केवल 5% से 10% हिस्सा भी कम कर लेता है, तो उसके घुटनों के दर्द में बिना किसी दवा के 50% तक सुधार देखा जा सकता है।

जिम की वो गलतियां जो घुटनों को कर रही हैं समय से पहले बूढ़ा

आजकल फिटनेस का क्रेज बढ़ा है, लेकिन बिना विशेषज्ञ की देखरेख और अधूरी जानकारी के साथ जिम जाना खतरनाक साबित हो रहा है। 40 की उम्र के आस-पास की मांसपेशियों और टेंडन्स का लचीलापन 20 साल के युवा जैसी नहीं होती। जिम में युवा घातक गलतियां करते हैं।

  • बिना वॉर्म-अप के हैवी वेट ट्रेनिंग: सीधे जाकर भारी वजन उठाना (जैसे हैवी लेग प्रेस या डेडलिफ्ट) जोड़ों पर अचानक झटका देता है।
  • डीप स्क्वाट्स (Deep Squats): जांघों को जमीन के समानांतर से भी नीचे ले जाना (Full/Deep Squat) घुटने के जोड़ पर अत्यधिक और अप्राकृतिक दबाव डालता है, जिससे मेनिस्कस (Meniscus) फटने का डर रहता है।
  • ट्रेडमिल पर गलत दौड़ना: ऊंचे (Incline Treadmill) पर तेज गति से दौड़ना घुटनों के लिए बहुत नुकसानदेह है। समतल जमीन के मुकाबले इन्क्लाइन ट्रेडमिल घुटने के सामने के हिस्से को बुरी तरह प्रभावित करता है।
  • यूरिक एसिड और थायराइड का कनेक्शन भी समझें : घुटनों के दर्द के पीछे केवल मैकेनिकल कारण नहीं होते। पुरुषों में यूरिक एसिड का बढ़ना (जिससे गाउट नामक बीमारी होती है) घुटने में अचानक असहनीय दर्द और लालिमा पैदा करता है। वहीं महिलाओं में 40 की उम्र के बाद हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) और हार्मोनल असंतुलन के कारण भी जोड़ों में दर्द और जकड़न की समस्या काफी बढ़ जाती है, इसलिए दर्द होने पर ब्लड टेस्ट करवाना भी जरूरी है।

बिना सर्जरी के घुटनों को कैसे रखें फिट? जानिए बेस्ट इलाज

  • व्यायाम का सही चयन (Low-Impact Exercises): घुटनों के मरीजों को कभी भी दौड़ना (Running) या कूदना (Jumping) नहीं चाहिए। इसके बजाय उन्हें 'लो-इम्पैक्ट' एक्सरसाइज चुननी चाहिए, जिससे जोड़ों पर वजन न पड़े लेकिन मांसपेशियां मजबूत हों।
  • साइकिल चलाना (Cycling): स्टेशनरी साइकिल चलाना घुटनों के लिए अमृत समान है। इससे जोड़ गतिशील रहता है और उस पर शरीर का भार भी नहीं पड़ता।
  • तैराकी (Swimming): पानी के अंदर शरीर का वजन न के बराबर महसूस होता है। तैराकी करने से बिना घुटनों को नुकसान पहुंचाए पूरे शरीर की और विशेषकर पैरों की बेहतरीन कसरत हो जाती है।
  • फिजियोथेरेपी और मांसपेशियों की मजबूती : जैसे किसी गाड़ी के सस्पेंशन को ठीक रखने के लिए उसके शॉक एब्जॉर्बर का मजबूत होना जरूरी है, वैसे ही घुटने को झटकों से बचाने के लिए जांघ की सामने की मांसपेशियों (Quadriceps) और पीछे की मांसपेशियों (Hamstrings) का मजबूत होना जरूरी है। फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में की जाने वाली 'आइसोमेट्रिक क्वाड्रिसेप्स एक्सरसाइज' घुटने के गैप को बनाए रखने में मदद करती है।

नी-रिप्लेसमेंट (Knee Replacement) की नौबत कब आती है?

40 या 50 वर्ष की आयु में डॉक्टर कभी भी टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) की सलाह नहीं देते। इसका कारण यह है कि किसी भी कृत्रिम जोड़ (Artificial Joint) की एक निश्चित लाइफ होती है (लगभग 15 से 20 वर्ष)। यदि 40 की उम्र में सर्जरी कर दी जाए, तो 60 की उम्र में दोबारा सर्जरी (Revision Surgery) करनी पड़ेगी, जो कि बेहद जटिल और कष्टदायक होती है।

सर्जरी का फैसला केवल इन चार गंभीर स्थितियों में ही लिया जाता है।

  • जब मरीज असहनीय दर्द के कारण बिना किसी सहारे के आधा घंटा भी खड़ा रहने या चलने में पूरी तरह असमर्थ हो जाए।
  • जब दर्द इतना गंभीर हो जाए कि रात में मरीज की नींद टूटने लगे और नींद की गोलियां या पेनकिलर भी बेअसर हो जाएं।
  • जब रोजमर्रा के काम जैसे टॉयलेट जाना, नहाना या घर में घूमना भी बिना दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) के असंभव हो जाए।
  • जब घुटनों का टेढ़ापन (Bow Legs) इतना बढ़ जाए कि मरीज का संतुलन बिगड़ने लगे और गिरने का खतरा हो।

डॉ. मिहिर थानवी के साथ पत्रिका के सवाल जवाब

लोग अक्सर 'सिनेमा साइन' को पैरों की सामान्य थकान मान लेते हैं। यह कब समझ जाना चाहिए कि यह थकान नहीं, बल्कि घुटने के डैमेज की शुरुआत है?

जब लंबे समय तक बैठने के बाद उठते ही घुटने में तीखा दर्द, भारीपन या जकड़न महसूस हो, और शुरुआती 4-5 कदम बढ़ाना भी मुश्किल हो जाए, तो यह सामान्य थकान नहीं बल्कि 'सिनेमा साइन' है। थकान आराम करने या सोने से ठीक हो जाती है, लेकिन यह दर्द घुटने की कटोरी (Patella) के नीचे के कार्टिलेज के नरम होने या घिसने की शुरुआत का संकेत है। यदि इसके साथ सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय घुटनों से 'कट-कट' की आवाज आने लगे या जमीन पर बैठने के बाद बिना सहारे उठने में दिक्कत हो, तो तुरंत समझ जाएं कि घुटने का डैमेज शुरू हो चुका है ।

40 की उम्र के मरीजों में जब घुटने का दर्द शुरू होता है, तो क्या इसका असर हिप्स या एंकल के अलाइनमेंट पर भी पड़ता है?

हमारा शरीर एक काइनेटिक चेन (Kinetic Chain) की तरह काम करता है, जिसमें पैर, टखना (Ankle), घुटने और कूल्हे (Hip) एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब 40 की उम्र में घुटने का डैमेज या दर्द शुरू होता है, तो मरीज दर्द से बचने के लिए अनजाने में अपना वजन दूसरे पैर पर या पैर के किसी खास हिस्से पर डालकर चलने लगता है। इस गलत चाल (Altered Gait) के कारण शरीर का नेचुरल अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि घुटने के सपोर्ट के लिए हिप्स की मांसपेशियों और एंकल जॉइंट्स पर असामान्य दबाव पड़ने लगता है, जिससे आगे चलकर हिप और टखनों में भी दर्द शुरू हो जाता है।

जो लोग कॉर्पोरेट वर्ल्ड में डेस्क जॉब में हैं और उनका बैठना मजबूरी है, वे ऑफिस चेयर पर बैठे-बैठे ऐसी कौन सी माइक्रो-एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग कर सकते हैं जिससे 'सिनेमा साइन' से बचा जा सके?

  • सीटेड लेग एक्सटेंशन (Seated Leg Extension): चेयर पर सीधे बैठें, एक पैर को सामने सीधा उठाएं, पंजे को अंदर खींचें और 5 सेकंड रोकें। फिर दूसरे पैर से करें। यह जांघ की मांसपेशियों (Quadriceps) को मजबूत करता है।
  • एंकल रोटेशन (Ankle Rotation): पैरों को हवा में उठाकर पंजों को क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं। इससे पैरों का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है।
  • चेयर स्ट्रेच: पैरों को 90 डिग्री से हटाकर थोड़ा आगे फैलाएं ताकि घुटनों पर लगातार दबाव न रहे।

जो जिम लवर्स है बिना किसी की मेडिकल सलाह के ग्लूकोसामाइन (Glucosamine) या कोलेजन सप्लीमेंट्स (Collagen) लेने लगते हैं। क्या वाकई इनका कोई ठोस वैज्ञानिक फायदा है या यह सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रेंड है?

ग्लूकोसामाइन (Glucosamine) और कोलेजन (Collagen) सप्लीमेंट्स का घुटने के गंभीर डैमेज को ठीक करने में कोई ठोस या जादुई फायदा प्रमाणित नहीं है। यह काफी हद तक एक मार्केटिंग ट्रेंड है। शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस में ये सप्लीमेंट्स जोड़ों को थोड़ा चिकनाई( Lubrication) दे सकते हैं, लेकिन जिम लवर्स द्वारा भारी वजन उठाने से जो मैकेनिकल डैमेज या कार्टिलेज घिसता है, उसे ये सप्लीमेंट्स दोबारा नहीं बना सकते। बिना मेडिकल सलाह के इन्हें लंबे समय तक लेने से पेट खराब होना, शुगर लेवल बढ़ना और लिवर पर दबाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जोड़ों को सुरक्षित रखने का सही तरीका वर्कआउट और नेचुरल डाइट ही है।

क्या क्रैश डाइट (Crash Dieting) करके तेजी से वजन घटाने का भी घुटनों की मांसपेशियों पर कोई बुरा असर पड़ता है?

क्रैश डाइट से तेजी से वजन घटाने का घुटनों पर बहुत बुरा और विपरीत असर पड़ता है। जब आप अचानक कैलोरी बहुत कम कर देते हैं, तो शरीर वसा (Fat) के बजाय मांसपेशियों (Muscle Mass) को तोड़ने लगता है। घुटनों को मजबूत रखने के लिए जांघ की मांसपेशियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। क्रैश डाइट के कारण जब ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो शरीर का पूरा भार सीधे घुटने के जोड़ों और कार्टिलेज पर आ जाता है। इससे जोड़ों का गैप तेजी से कम होने लगता है और घुटने समय से पहले कमजोर हो जाते हैं। इसलिए वजन हमेशा संतुलित डाइट और एक्सरसाइज से धीरे-धीरे घटाना चाहिए।

यूरिक एसिड और थायराइड के अलावा, क्या विटामिन D3 और B12 की कमी भी 40 की उम्र में घुटनों के इस डैमेज को तेज कर रही है? इसके लिए डाइट में क्या शामिल करना चाहिए?

विटामिन D3 शरीर में कैल्शियम को सोखने के लिए जरूरी है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर (Osteomalacia) हो जाती हैं और घुटने का जोड़ पूरा भार नहीं संभाल पाता। वहीं, विटामिन B12 नसों और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को ठीक रखता है। इसकी कमी से पैरों में कमजोरी, दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। विटामिन D3 के लिए धूप सबसे अच्छा स्रोत है। इसके अलावा मशरूम, डेयरी उत्पाद (दूध, पनीर), फोर्टिफाइड फूड्स और अंडा लें। विटामिन B12 के लिए स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज), दूध, दही, पनीर और ओट्स शामिल करें।

घुटने के दर्द के लिए मार्केट में कई तरह के नी-कैप्स (Knee Caps) मिलते हैं। क्या इन्हें बिना डॉक्टर से पूछे लगातार पहनना सही है, या इससे मांसपेशियां और कमजोर हो जाती हैं?

बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार नी-कैप पहनना बिल्कुल गलत है और यह फायदे की जगह नुकसान ही पहुंचाती है। नी-कैप का काम घुटने को बाहरी सपोर्ट देना है। आप जब इसे बिना वजह घंटों तक पहने रहते हैं, तो घुटने को संभालने वाली जांघ की मुख्य मांसपेशियां डैमेज हो जाती हैं, क्योंकि उनका काम नी-कैप करने लगता है। काम न करने के कारण ये मांसपेशियां धीरे-धीरे और ज्यादा कमजोर और पतली (Muscle Atrophy) हो जाती हैं।

Also Read
View All