Cinema signs early stages : क्या 40 की उम्र में आपके घुटने भी जाम हो रहे हैं? जानिए ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मिहिर थानवी से कि क्यों डेस्क जॉब वाले युवा 'सिनेमा साइन' और घुटनों के दर्द के शिकार हो रहे हैं। विस्तार से जानें शरीर के वजन बढ़ने का हड्डियों पर क्या पड़ता है नकारात्मक असर, जिम में होने वाली गलतियां और बिना सर्जरी जोड़ों को प्राकृतिक रूप से मजबूत रखने के आसान उपाय।
Cinema Signs at Early Stages : कुछ साल पहले तक घुटनों का दर्द, जोड़ों में जकड़न और उठने-बैठने में तकलीफ जैसी समस्याओं को बुढ़ापे की निशानी माना जाता था। आमतौर पर 60 या 65 वर्ष की आयु के बाद ही लोग ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों के चक्कर लगाते नजर आते थे। लेकिन आज परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अस्पतालों के ऑर्थोपेडिक आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आने वाले मरीजों में एक बहुत बड़ी संख्या उन युवाओं की है, जो अपनी उम्र के चौथे दशक यानी 35 से 45 वर्ष के बीच हैं। इनमें कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा, लगातार डेस्क जॉब करने वाले लोग और गृहणियां शामिल हैं।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो घुटने साठ साल तक चलने के लिए बने थे, वे चालीस की उम्र में ही जवाब देने लगे हैं? क्या यह जीवनशैली की खराबी है, डाइट का दोष है, या फिर जिम में की जाने वाली अनजानी गलतियां इसका कारण हैं? इसे विस्तार से समझते है घुटनों के दर्द के शुरुआती लक्षणों, इसके छिपे हुए कारणों, और बिना सर्जरी के उपचार के वैज्ञानिक तरीके।
डेस्क जॉब में लगातार 8 से 10 घंटे बैठना, मूवी हॉल में फिल्म देखना, लंबी फ्लाइट या ड्राइविंग करने के दौरान आपको एक ही स्थिति में बैठना पड़ता है। यह सबकुछ आपके रोजमर्रा का हिस्सा बन जाता है। एक समय ऐसा भी आ जाता है जब आपके घुटनों में दर्द शुरू होने लगता है। आप बैठने के बाद जब पहला कदम उठाते हैं और घुटने में तेज दर्द होता है, तो इसे ही 'सिनेमा साइन' कहा जाता है।
बीते कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि जीवनशैली में बदलावों के चलते मानव शरीर की प्राकृतिक बनावट के साथ एक गंभीर असंतुलन पैदा हो रहा है। हमारा शरीर गतिशीलता (Mobility) के लिए बना है, लेकिन आरामतलबी जीवनशैली के चलते हमारी गतिशीलता में कमी आ रही है। इसके चलते युवाओं में घुटने खराब होने की शिकायतें बढ़ रही हैं।
शुरुआती दौर में घुटने अपनी खराबी का संकेत छोटे-छोटे तरीकों से देते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग 'थकान' या 'सामान्य कमजोरी' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
मोटापा या बढ़ा हुआ वजन घुटनों का सबसे बड़ा दुश्मन है। हमारे घुटने शरीर का पूरा भार उठाने वाले मुख्य जोड़ हैं। जब हम जमीन पर सामान्य रूप से चलते हैं, तो हमारे घुटनों पर हमारे वास्तविक वजन का लगभग 3 से 4 गुना अधिक दबाव पड़ता है। वहीं, जब हम सीढ़ियां चढ़ते हैं या दौड़ते हैं, तो यह दबाव बढ़कर 5 से 6 गुना तक हो जाता है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें:
आजकल फिटनेस का क्रेज बढ़ा है, लेकिन बिना विशेषज्ञ की देखरेख और अधूरी जानकारी के साथ जिम जाना खतरनाक साबित हो रहा है। 40 की उम्र के आस-पास की मांसपेशियों और टेंडन्स का लचीलापन 20 साल के युवा जैसी नहीं होती। जिम में युवा घातक गलतियां करते हैं।
40 या 50 वर्ष की आयु में डॉक्टर कभी भी टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) की सलाह नहीं देते। इसका कारण यह है कि किसी भी कृत्रिम जोड़ (Artificial Joint) की एक निश्चित लाइफ होती है (लगभग 15 से 20 वर्ष)। यदि 40 की उम्र में सर्जरी कर दी जाए, तो 60 की उम्र में दोबारा सर्जरी (Revision Surgery) करनी पड़ेगी, जो कि बेहद जटिल और कष्टदायक होती है।
सर्जरी का फैसला केवल इन चार गंभीर स्थितियों में ही लिया जाता है।
लोग अक्सर 'सिनेमा साइन' को पैरों की सामान्य थकान मान लेते हैं। यह कब समझ जाना चाहिए कि यह थकान नहीं, बल्कि घुटने के डैमेज की शुरुआत है?
जब लंबे समय तक बैठने के बाद उठते ही घुटने में तीखा दर्द, भारीपन या जकड़न महसूस हो, और शुरुआती 4-5 कदम बढ़ाना भी मुश्किल हो जाए, तो यह सामान्य थकान नहीं बल्कि 'सिनेमा साइन' है। थकान आराम करने या सोने से ठीक हो जाती है, लेकिन यह दर्द घुटने की कटोरी (Patella) के नीचे के कार्टिलेज के नरम होने या घिसने की शुरुआत का संकेत है। यदि इसके साथ सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय घुटनों से 'कट-कट' की आवाज आने लगे या जमीन पर बैठने के बाद बिना सहारे उठने में दिक्कत हो, तो तुरंत समझ जाएं कि घुटने का डैमेज शुरू हो चुका है ।
40 की उम्र के मरीजों में जब घुटने का दर्द शुरू होता है, तो क्या इसका असर हिप्स या एंकल के अलाइनमेंट पर भी पड़ता है?
हमारा शरीर एक काइनेटिक चेन (Kinetic Chain) की तरह काम करता है, जिसमें पैर, टखना (Ankle), घुटने और कूल्हे (Hip) एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब 40 की उम्र में घुटने का डैमेज या दर्द शुरू होता है, तो मरीज दर्द से बचने के लिए अनजाने में अपना वजन दूसरे पैर पर या पैर के किसी खास हिस्से पर डालकर चलने लगता है। इस गलत चाल (Altered Gait) के कारण शरीर का नेचुरल अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि घुटने के सपोर्ट के लिए हिप्स की मांसपेशियों और एंकल जॉइंट्स पर असामान्य दबाव पड़ने लगता है, जिससे आगे चलकर हिप और टखनों में भी दर्द शुरू हो जाता है।
जो लोग कॉर्पोरेट वर्ल्ड में डेस्क जॉब में हैं और उनका बैठना मजबूरी है, वे ऑफिस चेयर पर बैठे-बैठे ऐसी कौन सी माइक्रो-एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग कर सकते हैं जिससे 'सिनेमा साइन' से बचा जा सके?
जो जिम लवर्स है बिना किसी की मेडिकल सलाह के ग्लूकोसामाइन (Glucosamine) या कोलेजन सप्लीमेंट्स (Collagen) लेने लगते हैं। क्या वाकई इनका कोई ठोस वैज्ञानिक फायदा है या यह सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रेंड है?
ग्लूकोसामाइन (Glucosamine) और कोलेजन (Collagen) सप्लीमेंट्स का घुटने के गंभीर डैमेज को ठीक करने में कोई ठोस या जादुई फायदा प्रमाणित नहीं है। यह काफी हद तक एक मार्केटिंग ट्रेंड है। शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस में ये सप्लीमेंट्स जोड़ों को थोड़ा चिकनाई( Lubrication) दे सकते हैं, लेकिन जिम लवर्स द्वारा भारी वजन उठाने से जो मैकेनिकल डैमेज या कार्टिलेज घिसता है, उसे ये सप्लीमेंट्स दोबारा नहीं बना सकते। बिना मेडिकल सलाह के इन्हें लंबे समय तक लेने से पेट खराब होना, शुगर लेवल बढ़ना और लिवर पर दबाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जोड़ों को सुरक्षित रखने का सही तरीका वर्कआउट और नेचुरल डाइट ही है।
क्या क्रैश डाइट (Crash Dieting) करके तेजी से वजन घटाने का भी घुटनों की मांसपेशियों पर कोई बुरा असर पड़ता है?
क्रैश डाइट से तेजी से वजन घटाने का घुटनों पर बहुत बुरा और विपरीत असर पड़ता है। जब आप अचानक कैलोरी बहुत कम कर देते हैं, तो शरीर वसा (Fat) के बजाय मांसपेशियों (Muscle Mass) को तोड़ने लगता है। घुटनों को मजबूत रखने के लिए जांघ की मांसपेशियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। क्रैश डाइट के कारण जब ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो शरीर का पूरा भार सीधे घुटने के जोड़ों और कार्टिलेज पर आ जाता है। इससे जोड़ों का गैप तेजी से कम होने लगता है और घुटने समय से पहले कमजोर हो जाते हैं। इसलिए वजन हमेशा संतुलित डाइट और एक्सरसाइज से धीरे-धीरे घटाना चाहिए।
यूरिक एसिड और थायराइड के अलावा, क्या विटामिन D3 और B12 की कमी भी 40 की उम्र में घुटनों के इस डैमेज को तेज कर रही है? इसके लिए डाइट में क्या शामिल करना चाहिए?
विटामिन D3 शरीर में कैल्शियम को सोखने के लिए जरूरी है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर (Osteomalacia) हो जाती हैं और घुटने का जोड़ पूरा भार नहीं संभाल पाता। वहीं, विटामिन B12 नसों और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को ठीक रखता है। इसकी कमी से पैरों में कमजोरी, दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। विटामिन D3 के लिए धूप सबसे अच्छा स्रोत है। इसके अलावा मशरूम, डेयरी उत्पाद (दूध, पनीर), फोर्टिफाइड फूड्स और अंडा लें। विटामिन B12 के लिए स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज), दूध, दही, पनीर और ओट्स शामिल करें।
घुटने के दर्द के लिए मार्केट में कई तरह के नी-कैप्स (Knee Caps) मिलते हैं। क्या इन्हें बिना डॉक्टर से पूछे लगातार पहनना सही है, या इससे मांसपेशियां और कमजोर हो जाती हैं?
बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार नी-कैप पहनना बिल्कुल गलत है और यह फायदे की जगह नुकसान ही पहुंचाती है। नी-कैप का काम घुटने को बाहरी सपोर्ट देना है। आप जब इसे बिना वजह घंटों तक पहने रहते हैं, तो घुटने को संभालने वाली जांघ की मुख्य मांसपेशियां डैमेज हो जाती हैं, क्योंकि उनका काम नी-कैप करने लगता है। काम न करने के कारण ये मांसपेशियां धीरे-धीरे और ज्यादा कमजोर और पतली (Muscle Atrophy) हो जाती हैं।