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Iran-Israel war 2026: क्यों चर्चा में आया Strait of Hormuz, भारत समेत पूरी दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण?

Iran- Israel War 2026: पिछले वर्ष औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ (20 मिलियन) बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन इस जलडमरूमध्य से होकर गुज़रा। आइए जानते हैं कि यह भारत समेत पूरी दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

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Feb 28, 2026
ईरान और इजराइल के बीच युद्ध छिड़ गया है।

Iran-Israel war 2026 : संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा शनिवार को ईरान पर किए गए हमलों के बाद ऐसी आशंका है कि प्रमुख तेल निर्यात मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य कुछ दिनों के लिए बंद हो सकता है। इसके बंद होने से क्यों परेशान हो रही है दुनिया? क्यों ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के बीच अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाए तो उसका नुकसान भारत को उठाना पड़ सकता है? आइए इस स्टोरी के जरिए समझते हैं।

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Strait of Hormuz : होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?

यह जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है। इसके उत्तर में फारस की खाड़ी है, जबकि दक्षिण में ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर स्थित हैं। यह अपने सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई 21 मील (33 किलोमीटर) है, जबकि जहाजरानी मार्ग दोनों दिशाओं में मात्र 2 मील (3 किलोमीटर) चौड़ा है। यह अपने सबसे संकरे स्थान पर 21 मील (33 किलोमीटर) चौड़ा है, जबकि जहाज़ों के आवागमन के लिए सुरक्षित मार्ग प्रत्येक दिशा में केवल लगभग 2 मील (3 किलोमीटर) चौड़ा है।

जलडमरूमध्य किसे कहते हैं?

जलडमरूमध्य वह संकरा समुद्री मार्ग होता है जो दो बड़े जल निकायों जैसे समुद्र या महासागर को आपस में जोड़ता है और यह दो भूभागों के बीच स्थित होता है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, जहाज़रानी और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे होकर बड़े पैमाने पर माल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है।

यह क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है। एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा (Vortexa) के अनुसार, पिछले वर्ष औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन यहाँ से गुज़रा।

कंडेनसेट क्या होता है?

कंडेनसेट एक हल्का तरल हाइड्रोकार्बन है जो प्राकृतिक गैस के साथ भूमिगत भंडारों में पाया जाता है। जब गैस को जमीन से बाहर निकाला जाता है और उसका दबाव व तापमान कम होता है, तो गैस का कुछ हिस्सा तरल में बदल जाता है, जिसे कंडेनसेट कहते हैं। यह कच्चे तेल से हल्का और अधिक पतला होता है। इसका रंग प्रायः पारदर्शी या हल्का पीला होता है। कंडेनसेट से पेट्रोल, जेट ईंधन और पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाए जाते हैं। ऊर्जा व्यापार में यह महत्वपूर्ण है क्योंकि कई गैस उत्पादक देश इसे बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं।

कतर इसी मार्ग से भेजता LNG

ओपेक के सदस्य देश सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से मुख्य रूप से एशिया को करते हैं। कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस निर्यातकों में से एक है, अपने लगभग सभी एलएनजी को इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से भेजता है। कतर जो दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में से एक है, अपनी लगभग पूरी LNG आपूर्ति इसी मार्ग से भेजता है।

ओपेक के प्रमुख उत्पादक सऊदी अरब और यूएई ने हाल के दिनों में आपात योजना के तहत तेल निर्यात बढ़ाया है। यूएई और सऊदी अरब ने होर्मुज को बाईपास करने के लिए वैकल्पिक मार्ग खोजने का प्रयास किया है।

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, यूएई और सऊदी अरब की मौजूदा पाइपलाइनों में लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सकती है, जिससे होर्मुज को आंशिक रूप से बाईपास किया जा सके।

अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (United States Fifth Fleet), जिसका मुख्यालय बहरीन में है, इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाज़रानी की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है।

क्या है तनाव का इतिहास

  • सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब उत्पादकों ने 1973 में इज़राइल के खिलाफ युद्ध में उसके पश्चिमी समर्थकों पर तेल प्रतिबंध लगाया। उस समय पश्चिमी देश मध्य-पूर्वी कच्चे तेल के मुख्य खरीदार थे, जबकि आज एशिया ओपेक के तेल का प्रमुख खरीदार है। वहीं अमेरिका स्वयं एक बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन चुका है।
  • ईरान-इराक युद्ध (Iran–Iraq War 1980–1988) के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के निर्यात को बाधित करने की कोशिश की, जिसे “टैंकर युद्ध” कहा गया।
  • जनवरी 2012 में, ईरान ने अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों के जवाब में इस जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी।
  • मई 2019 में यूएई तट के पास होर्मुज के बाहर चार जहाज़ों (जिनमें दो सऊदी तेल टैंकर शामिल थे) पर हमला किया गया।
  • 2023 में दो और 2024 में एक जहाज़ को ईरान ने जलडमरूमध्य के पास या भीतर जब्त किया। इनमें से कुछ घटनाएँ अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े टैंकरों को जब्त किए जाने के बाद हुईं। पिछले वर्ष, ईरान ने अपनी परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमलों के बाद जलडमरूमध्य बंद करने पर विचार किया था।

क्यों इसे तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा चोक पॉइंट कहा जाता है?

  • दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20%–30% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
  • होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की “ऊर्जा जीवन रेखा” कहा जाता है।
  • अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
  • यह जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से बहुत संकरा है। यह एक ही जगह 33 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि जहाज़ों के लिए सुरक्षित नौवहन मार्ग इससे भी संकरा है।

क्या है इसका सामरिक महत्व

इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और अमीरात स्थित हैं। इस क्षेत्र में अक्सर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के हालात बना रहता है। यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण

भारत अपनी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है इसलिए यहां पैदा होने वाली अस्थिरता सीधे भारत की ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो भारत में महंगाई दर में इजाफा हो सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है। इसी समुद्री मार्ग से लगभग 40–50% भारत के कच्चे तेल और करीब 50% प्राकृतिक गैस (LNG) का निर्यात यहीं से होता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90% तेल विदेश से आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जो इस मार्ग से होकर देश तक पहुंचता है।

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