Museums: दुनिया के बड़े म्यूजियम्स आज सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को करीब से महसूस करने का माध्यम बन चुके हैं। चीन से लेकर फ्रांस, इटली और ब्रिटेन तक करोड़ों लोग प्राचीन सभ्यताओं, युद्ध, कला और विज्ञान से जुड़ी अनमोल धरोहरें देखने पहुंच रहे हैं। फॉरबिडन सिटी, लूव्र म्यूजियम और ब्रिटिश म्यूजियम जैसे ऐतिहासिक केंद्र लोगों को अतीत से जोड़ रहे हैं। जानिए पूरी कहानी
Museums: दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन इसके बावजूद इतिहास को करीब से देखने की लोगों की चाह अब भी उतनी ही मजबूत है। दुनिया के बड़े म्यूजियमों में करोड़ों लोगों की भीड़ उमड़ती है। चीन के म्यूजियम्स ने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया। बीजिंग से लेकर पेरिस और लंदन तक लोग सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि इतिहास को जानने, निकट से महसूस करने पहुंच रहे हैं। किसी ने हजारों साल पुरानी सभ्यता को देखने के लिए टिकट कराया, तो किसी ने युद्ध, कला और संस्कृति को करीब से समझने के लिए लंबा सफर तय किया। आखिर ये म्यूजियम इतने खास क्यों हैं?
चीन का 600 साल पुराना राजमहल संग्रहालय (Forbidden City) दुनिया में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला म्यूजियम बन गया है। यहां हर साल करीब 1.70 करोड़ विजिटर आते हैं। चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित एक विशाल शाही महल परिसर है। इसका निर्माण 1406 में मिंग राजवंश के सम्राट योंगल के आदेश पर शुरू हुआ और 1420 में पूरा हुआ। करीब 500 वर्षों तक यह मिंग और किंग राजवंश के 24 सम्राटों का शाही निवास और सत्ता का मुख्य केंद्र रहा।
इस परिसर में लगभग 980 ऐतिहासिक इमारतें और हजारों कमरे हैं, जो पारंपरिक चीनी वास्तुकला और शाही संस्कृति देखने को मिलती है। लंबे समय तक आम लोगों के प्रवेश पर रोक होने के कारण इसे फॉरबिडन सिटी कहा गया। यह संग्रहालय प्राचीन चीनी कलाकृतियों, शाही वस्तुओं और ऐतिहासिक धरोहरों का बड़ा केंद्र माना जाता है तथा यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। भारत से राजमहल संग्रहालय घूमने आते हैं, तो फ्लाइट, होटल और टिकट मिलाकर कुल खर्च लगभग 1.2 लाख से 1.8 लाख रुपये तक आ सकता है।
चीन के चेंगदू में स्थित वुहोउ श्राइन संग्रहालय (Wuhou Shrine Museum ) इतिहास प्रेमियों के लिए बेहद खास जगह है, जहां सालाना करीब 1.46 करोड़ विजिटर आते हैं। वुहोउ श्राइन का इतिहास करीब 1800 साल पुराना माना जाता है। इसका निर्माण पहली बार वर्ष 223 ईस्वी में शू हान साम्राज्य के शासक लियू बेई की स्मृति में कराया गया था। बाद में यह स्थान चीन के महान रणनीतिकार Zhuge Liang से जुड़ गया और उनकी बुद्धिमत्ता, युद्धनीति और वफादारी का प्रमुख प्रतीक बन गया।
मिंग और किंग राजवंश के दौरान इस मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया। यहां प्राचीन मूर्तियां, ऐतिहासिक शिलालेख और थ्री किंगडम्स काल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण धरोहरें संरक्षित हैं। यह चीन का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां शासक और उनके मंत्री दोनों को एक साथ सम्मान दिया गया है। भारत से यहां घूमने का प्लान हो, तो यात्रा का कुल खर्च करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक आ सकता है।
चीन के शीआन शहर में स्थित सम्राट किन शी हुआंग के मकबरे के संग्रहालय को देखने हर साल करीब 1.16 करोड़ विजिटर आते हैं। यह चीन के शान्शी प्रांत के शीआन शहर में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है। यह संग्रहालय चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग के विशाल मकबरे और टेराकोटा आर्मी के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण लगभग 2200 साल पहले क़िन राजवंश के दौर में कराया गया था।
इस परिसर में हजारों मिट्टी से बनी सैनिकों, घोड़ों और रथों की मूर्तियां हैं, जिन्हें टेराकोटा आर्मी (Terracotta Army) कहा जाता है। माना जाता है कि इन्हें सम्राट किन शी हुआंग की मृत्यु के बाद उनकी सुरक्षा के लिए बनाया गया था। 1974 में किसानों द्वारा इस स्थल की खोज की गई। यह संग्रहालय चीन की प्राचीन सैन्य शक्ति, कला और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है
दुनिया के सबसे प्रसिद्ध कला संग्रहालयों में शामिल है। यहां हर साल करीब 87 लाख विजिटर आते हैं। यह फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है। शुरुआत में इसे 12वीं शताब्दी में एक किले के रूप में बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे शाही महल और फिर संग्रहालय में बदल दिया गया। साल 1793 में फ्रांसीसी क्रांति के बाद इसे आम लोगों के लिए संग्रहालय के रूप में खोल दिया गया।
लूव्र म्यूजियम में दुनिया भर की लाखों ऐतिहासिक और कलात्मक वस्तुएं संरक्षित हैं। यहां लियोनार्डो दा विंची की विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा समेत कई अनमोल कलाकृतियां मौजूद हैं। लूव्र म्यूजियम दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले संग्रहालयों में शामिल है और कला, इतिहास व संस्कृति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत से पेरिस जाकर इस म्यूजियम को देखने का प्लान हो, तो पूरे ट्रिप का खर्च करीब 2 लाख से 3 लाख रुपये तक आ सकता है।
चीन के डोंगगुआन में स्थित अफीम युद्ध संग्रहालय वहां के इतिहास और संघर्ष का एक बड़ा प्रतीक है, जिसे देखने हर साल करीब 72 लाख विजिटर आते हैं। यह संग्रहालय 19वीं सदी के अफीम युद्ध (Opium War) और चीन के औपनिवेशिक के इतिहास है। यह संग्रहालय चीनी अधिकारी लिन जेक्सू की याद से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने 1839 में विदेशी व्यापारियों द्वारा लाई गई अफीम को नष्ट करने का अभियान चलाया था।
इस घटना के बाद ब्रिटेन और चीन के बीच पहला अफीम युद्ध शुरू हुआ। संग्रहालय में अफीम युद्ध से जुड़े दस्तावेज, हथियार, चित्र, ऐतिहासिक अवशेष और उस दौर की घटनाओं को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां हैं। यह स्थान चीन के आधुनिक इतिहास और विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। भारत से यहां घूमने जाने का प्लान हो, तो इस यात्रा का कुल खर्च करीब 1.5 लाख रुपये तक आ सकता है।
चीन के बीजिंग में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय सबसे बड़ा राष्ट्रीय संग्रहालय है। यहां हर साल करीब 70 लाख विजिटर आते हैं। यह संग्रहालय तियानआनमेन स्क्वायर के पास स्थित है और चीन के हजारों वर्षों पुराने इतिहास, संस्कृति और सभ्यता को प्रदर्शित करता है। इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 2003 में चीन के राष्ट्रीय इतिहास संग्रहालय और चीनी क्रांति संग्रहालय को मिलाकर की गई थी। यहां प्राचीन चीनी राजवंशों से लेकर आधुनिक चीन तक की लाखों ऐतिहासिक वस्तुएं, कलाकृतियां, मूर्तियां, सिक्के, दस्तावेज और सांस्कृतिक धरोहरें संरक्षित हैं। अगर भारत से यहां घूमने का प्लान बनाते हैं, तो पूरे बीजिंग ट्रिप का खर्च लगभग 1.2 लाख से 1.8 लाख रुपये तक आ सकता है।
वेटिकन सिटी में स्थित वेटिकन संग्रहालय ( Vatican Museums) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और कला संग्रहालयों में से एक है, जिसे देखने हर साल करीब 68 लाख विजिटर आते हैं। इसका इतिहास 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत वर्ष 1506 में हुई। पोप जूलियस द्वितीय ने प्राचीन रोमन कला को लाओकून और उनके पुत्रों की मूर्ति को जनता के सामने प्रदर्शित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया इसी के बाद वेटिकन में कला और ऐतिहासिक वस्तुओं को संग्रहित करने की परंपरा शुरू हुई।
समय के साथ अलग-अलग पोपों ने यहां दुनिया भर की पेंटिंग्स, मूर्तियां और ऐतिहासिक धरोहरें इकट्ठा कीं। पुनर्जागरण काल में यह संग्रहालय कला और संस्कृति का बड़ा केंद्र बन गया। भारत से इटली घूमने का कुल खर्च करीब 2 से 3 लाख रुपये तक हो सकता है।
चीन के शेन्जेन में स्थित शेन्जेन नानशान डिस्ट्रिक्ट म्यूजियम आधुनिक चीन और टेक्नोलॉजी के विकास से जुड़े इतिहास को दिखाता है, जहां सालाना करीब 68 लाख विजिटर आते हैं। इसकी स्थापना स्थानीय इतिहास, समुद्री संस्कृति और शेनझेन के तेज विकास को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की गई थी। शेनझेन पहले एक छोटा मछुआरों का इलाका माना जाता था, लेकिन 1980 के दशक में चीन के आर्थिक सुधारों के बाद यह तेजी से आधुनिक और तकनीकी शहर में बदल गया।
प्राचीन काल से लेकर आज के आधुनिक दौर तक नानशान के विकास को तीन हिस्सों में दिखाया गया। संग्रहालय में इसी बदलाव की कहानी को ऐतिहासिक वस्तुओं, पुरातात्विक अवशेषों और प्रदर्शनों के जरिए दिखाया गया है। भारत से शेनझेन जाने का खर्च करीब 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
लंदन का ब्रिटिश संग्रहालय दुनिया के सबसे पुराने और बड़े संग्रहालयों में से एक है, यहां हर साल करीब 65 लाख विजिटर आते हैं। ब्रिटिश संग्रहालय का इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इसकी स्थापना वर्ष 1753 में डॉक्टर और वैज्ञानिक हंस स्लोएन (Hans Sloane) के विशाल निजी संग्रह के आधार पर की गई थी। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले हजारों किताबें, पांडुलिपियां, सिक्के और ऐतिहासिक वस्तुएं राष्ट्र को दान कर दी थीं। संग्रहालय को वर्ष 1759 में जनता के लिए खोला गया और यह दुनिया का पहला राष्ट्रीय सार्वजनिक संग्रहालय बना। समय के साथ यहां मिस्र, ग्रीस, रोम और एशिया समेत कई सभ्यताओं की दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुएं जोड़ी गईं। भारत से लंदन ट्रिप का खर्च करीब 2.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
लंदन का नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम बच्चों और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है, जहां हर साल करीब 63 लाख विजिटर आते हैं। यह म्यूजियम डायनासोर के विशालकाय मॉडल, हमारी पृथ्वी के अनोखे इतिहास और विज्ञान से जुड़ी बेहद दिलचस्प चीजों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह जगह सिर्फ घूमने के लिहाज से ही नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान को करीब से सीखने-समझने का भी एक बहुत बड़ा केंद्र है। भारत से लंदन यात्रा का खर्च करीब 2.5 लाख रुपये तक हो सकता है।