
Global Heatwave 2026: सिर्फ दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्से इस समय असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। दक्षिण कोरिया में रिकॉर्ड 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज होने के बाद सरकार को आपात राहत उपाय तेज करने पड़े हैं। दूसरी ओर जापान में भी भीषण गर्मी ने जनजीवन प्रभावित किया है, जबकि अमेरिका के कई राज्यों में लगातार हीट अलर्ट और जंगलों में आग का खतरा बढ़ गया है। अलग-अलग महाद्वीपों में एक ही समय पर दिख रही ये घटनाएं अब केवल मौसम की खबर नहीं हैं, बल्कि यह संकेत दे रही हैं कि चरम गर्मी (Extreme Heat) दुनिया के सामने वैश्विक चुनौती बनती जा रही है।
दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने हीटवेव को राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती मानते हुए बुजुर्गों, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। रिकॉर्ड तापमान और हीट-इलनेस के बढ़ते मामलों ने सरकार को राहत व्यवस्था मजबूत करने पर मजबूर किया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
इसी दौरान जापान में भी कई इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां बढ़ी हैं। वहीं अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी ने बिजली की मांग बढ़ाने के साथ-साथ जंगलों में आग के जोखिम को भी गंभीर बना दिया है। यह दिखाता है कि अलग-अलग जलवायु वाले देश भी अब एक जैसी चरम मौसमीय घटनाओं का सामना कर रहे हैं।
गौरतलब है कि यदि दक्षिण कोरिया की मौजूदा हीटवेव को पिछले दशक के रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाए, तो यह कोई अकेली घटना नहीं लगती। 2015-16 के अल नीनो और 2023-24 की रिकॉर्ड वैश्विक गर्मी के बाद अब 2026 में भी एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में एक साथ चरम तापमान देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राकृतिक जलवायु चक्रों के साथ मानव-जनित जलवायु परिवर्तन मिलकर ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों बताते हैं कि बढ़ते वैश्विक औसत तापमान, समुद्र के गर्म होने और जलवायु परिवर्तन के कारण चरम गर्मी की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं। यही वजह है कि अलग-अलग महाद्वीपों में एक साथ रिकॉर्ड तापमान देखने को मिल रहा है।
दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की ताजा घटनाएं यह संकेत देती हैं कि हीटवेव अब किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित समस्या नहीं रही। यह तेजी से एक वैश्विक जोखिम में बदल रही है, जिसका असर स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि और अर्थव्यवस्था तक दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में केवल राहत उपाय पर्याप्त नहीं होंगे, शहरों की योजना, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) को नीति निर्माण का केंद्रीय हिस्सा बनाना होगा। चरम गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है।