बिहार में बीजेपी से अलग अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, भाजपा के पिछले परिणामों के चलते एकला चलो की नीति अपना सकती है जेडीयू।
नई दिल्ली। बिहार में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच सीट के बंटवारे को लेकर खींचतान अब तक खत्म नहीं हुई है। लंबे समय से चली आ रही इस खींचतान के बाद अब ये संकेत मिल रहे हैं कि मिशन 2019 यानी लोकसभा चुनाव जेडीयू भाजपा से अलग होकर ही लड़ेगी।
अभी फाइनल नहीं हुआ है सीटों का बंटवारा
बीजेपी भले ही बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर अपने घटक दलों के बीच आम सहमति की बात कर रही हो लेकिन जेडीयू ने साफ तौर पर कहा है कि अभी सीटों पर के बंटवारे पर फाइनल कुछ नहीं हुआ है। यानी सीधे-सीधे जेडीयू ने भाजपा के एकजुट होने वाले दांव को पलट दिया है।
जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने सीटों की संख्या के फाइनल होने से साफ तौर पर इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अभी सभी पार्टियों के बीच सीटों को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ भी तय नहीं हुआ है।
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते ही सीट बंटवारे को लेकर भाजपा ने अपने घटक दलों के बीच आम सहमति बनने की बात कही थी। इसके तहत बीजेपी को बिहार के 40 में से 20 सिटों पर चुनाव लड़ना है जबकि जेडीयू को 12 सीटें, रामविलास पासवान की एलजेपी पार्टी को छह सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी पार्टी को दो सीटों पर चुनाव लड़ना है। उधर...जेडीयू नेताओं की माने तो उनको इस आंकड़े पर विश्वास ही नहीं है। जेडीयू नेताओं ने इस आंकड़े को ही खारिज कर दिया है।
इसलिए जेडीयू अलग लड़ना चाहती है चुनाव
दरअसल भारतीय जनता पार्टी की ओर से यूपी और बिहार उपचुनाव में हुई हार और बाद में कर्नाटक में सरकार न बना पाने की स्थिति की वजह से जेडीयू बिहार की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है।
जानकारों की मानें तो बिहार की कुल 40 सीटों में से जेडीयू अपने पास 16 सीट रखने की तैयारी में है जबकि 16 सीटों पर बीजेपी को चुनाव लड़ने का न्योता दिया जा सकता है। इसके अलावा बची आठ सीटों पर एनडीए के अन्य घटल दलों को अपने उम्मीदवार उतारने के लिए कहा जा सकता है।