India-China Dispute के बीच Rahul Gandhi ने एक बार फिर Modi government पर निशाना साधा Rahul Gandhi के निशाने पर इस बार PM Narendra Modi नहीं, बल्कि Defense Minister Rajnath Singhअधिक रहें
नई दिल्ली। लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध ( India-china Dispute ) के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ( Congress Leader Rahul Gandhi ) ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। दरअसल, राहुल गांधी के निशाने पर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं, बल्कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ( Defense Minister Rajnath Singh ) अधिक रहें आपको बता दें कि राजनाथ सिंह ( Rajnath Singh ) ने शुक्रवार को लद्दाख का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सैनिकों से बातचीत की और देश को आश्वस्त दिया कि हमारी जमीन पर किसी देश ने कोई कब्जा नहीं किया है। राजनाथ सिंह के लद्दाख दौरे के अगले दिन राहुल गांधी ने उनका एक वीडियो ट्वीट किया है।
वीडियो के कैप्शन में राहुल गांधी ने लिखा है कि चीन ने हमारी जमीन ले ली है और भारत सरकार चेम्बरलेन की तरह व्यवहार कर रही है। इससे चीन और आगे बढ़ेगा। भारत को भारत सरकार की कायरतापूर्ण कार्रवाइयों के कारण बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविलर चेम्बरलेन (Neville Chamberlain) से की है। इसका पीछे उन्होंने जो तर्क दिया है, वो यह हे कि चेम्बरलेन दूसरा विश्व युद्ध टालना चाहते थे और इस सिलसिले में जर्मनी के तानाशाह हिटलर से मिलने पहुंच गए थे। दरअसल, उनको पूरा यकीन था कि जर्मनी चेकोस्लोवाकिया ( फिलहाल अलग देश ) पर अटैक नहीं करेगा। मगर वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और अगले साल ही विश्वयुद्ध आरंभ हो गया।
वहीं, भारत और चीन के बीच बातचीत के दौरान बनी सहमति के अनुरूप चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) से नहीं हटे हैं। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के गैर प्रतिबद्ध रवैये को देखते हुए, भारत इस नतीजे पर पहुंचा है कि पीछे हटने की प्रक्रिया जटिल है और इसपर लगातार सत्यापन करते रहने की जरूरत है। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान में मौजूद सूत्रों ने बताया कि चीनी सेना पहले कुछ पीछे हटी थी, लेकिन फिर वापस आ गई, इसलिए चीनी सैन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक में बनी आम सहमति को लेकर लगातार सत्यापन किए जाने की जरूरत है।