
नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर में हो रहे पंचायत चुनाव के विरोध में शनिवार को अलगाववादियों के बंद से घाटी में जनजीवन प्रभावित हुआ। सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और मुहम्मद यासीन मलिक के नेतृत्व में अलगाववादी धड़े संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) ने बंद का आह्वान किया है। श्रीनगर और घाटी में अन्य जिलों में सार्वजनिक परिवहन के साधन, दुकानें और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं जबकि सड़कों पर कुछ ही निजी वाहन दिखाई दे रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन का साधन उपलब्ध नहीं होने से सरकारी कार्यालयों, बैंकों और पोस्ट ऑफिसों में लोग कम ही पहुंच रहे हैं। अधिकतर शैक्षणिक संस्थान बंद हैं।
श्रीनगर के पुराने क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तैनात किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई है। वहीं, जम्मू एवं कश्मीर में शनिवार को कड़ी सुरक्षा एवं व्यवस्था में पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान हो रहा है। मतदान की प्रक्रिया सुबह आठ बजे से शुरू हुई और दोपहर दो बजे तक रहेगी। घाटी में मतदान केंद्रों के बाहर कुछ ही मतदाता देखे गए जबकि जम्मू क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए आ रहे हैं। राज्य के पांच जिलों में से सात जम्मू में, छह घाटी में और दो लद्दाख में हैं, जहां चुनाव हो रहे हैं।
राज्य में कुल 3,296 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से 1,303 घाटी में जबकि 1,993 जम्मू में है। जम्मू में शनिवार को डोडा, रामबान, राजौरी, किश्तवाड़, कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों में जबकि घाटी के बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गांदरबल, बडगाम और श्रीनगर जिलों में चुनाव हो रहे हैं। मतदान आज लद्दाख के लेह और कारगिल जिलों में भी होगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) शालीन काबरा ने कहा कि पहले चरण के तहत 420 सरपंच पदों के लिए और 1,845 पंच पदों के लिए 5,585 उम्मीदवार आमने-सामने हैं। उन्होंने कहा कि 85 सरपंचों और 1,676 पंचों को पहले ही निर्विरोध चुन लिया गया है।