Karnataka में political crisis पहले से ज्‍यादा गहराया असंतुष्‍ट विधायकों ने BJP में शामिल होने के दिए संकेत डीके शिवकुमार नहीं दिखा पा रहे हैं अपना कमाल
नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार ( Congress-Jds Coalition Government ) गिरने की संभावना और बढ़ गई है। सरकार के समक्ष उत्पन्न राजनीतिक संकट ( political crisis ) देखते हुए अमरीका की 10 दिवसीय यात्रा को बीच में छोड़कर सीएम एचडी कुमारस्वामी बेंगलूरु लौट आए हैं।
लौटने के बाद से सीएम कुमारस्वामी ने पार्टी और कांग्रेस के नेताओं से कई बार बातचीत की है। लेकिन असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफे पर अडिग रहने से सरकार पर से संकट टलने के आसार बहुत कम हैं।
असंतुष्ट विधायकों को मंत्रि पद भी स्वीकार नहीं
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस-जेडीएस सरकार ( congress-jds government ) की ओर से असंतुष्ट विधायकों को मंत्रि पद का ऑफर दिया गया है जिसे असंतुष्ट विधायकों ने खारिज कर दिया है। असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि अब मामला बहुत आगे बढ़ गया है। इस मुकाम तक आगे बढ़ने के बाद पीछे हटना संभव नहीं है।
मंत्रिमंडल की बैठक आज
दूसरी तरफ सोमवार को सीएम एचडी कुमारस्वामी मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कुछ मंत्रियों से इस्तीफा ले सकते हैं। वहीं कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को मनाने की जिम्मेदारी डीके शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को सौंपी गई है। आज कांग्रेस के नेता भी इस मुद्दे पर बातचीत कर समस्या सुलझाने का प्रयास करेंगे।
भाजपा वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए तैयार
कर्नाटक में जारी सियासी संकट को लेकर भाजपा के नेताओं ने कहा कि पार्टी वैकल्पिक सरकार बनाने को लेकर तैयार है। लेकिन हम 13 विधायकों के इस्तीफे को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद हम अगले कदम का खुलासा करेंगे।
भाजपा के महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा कि हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। हमारी सियासी घटनाक्रमों पर करीब से नजर है।
13 विधायक हुए बागी
आपको बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 निर्वाचित विधायक हैं। इनमें से कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायकों ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। साथ ही राज्यपाल वजूभाई वाला को भी इस बारे में जानकारी दे दी है। असंतुष्ट विधायकों के रुख की वजह से कांग्रेस-जेडीएस विधायकों की संख्या कम होकर 106 पर सिमट गई है। तय है कि कर्नाटक में राजनीतिक संकट ( Political Crisis ) इस बार पहले से ज्यादा गहरा गया है।