पहले अमित शाह उन्हें भ्रष्टाचार में नंबर वन बता चुके हैं, फिर बेटे का टिकट कटा और अब प्रधानमंत्री की रैलियों से उन्हें दूर किए जाने की खबर आई है।
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी स्थितियां कुछ सहज नहीं लग रही। खासतौर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा को लेकर हर बार कुछ ना कुछ सुर्खियों में चलता रहता है। पहले अमित शाह गलती से उन्हें भ्रष्टाचार में नंबर वन बता चुके हैं, फिर उनके बेटे का टिकट कट चुका है और अब प्रधानमंत्री की रैलियों से उन्हें दूर किए जाने की खबर आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, येदियुरप्पा अब मोदी रैली में हिस्सा लेंगे। उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रधानमंत्री की रैली में नहीं जाने का निर्देश दिया है। हालांकि इस बयान की पुष्टि नहीं हो सकी है। आपको बता दें कि मंगलवार को पीएम तीन रैलियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे चामराजनगर के सांथेमरहल्ली, बेलगावी के उडुपी और चिक्कोड़ी में जाएंगे।
...येदियुरप्पा से दूरी क्यों?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस आक्रामक रुख अपना रही है। ऐसे में भाजपा नहीं चाहती कि येदियुरप्पा के साथ के चलते प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को लेकर विरोधियों को निशाने पर लेने के बजाए खुद निशाना बन जाएं। आपको बता दें कि हजारों करोड़ रुपए के घोटालों के आरोप के चलते ही येदियुरप्पा को अपना पिछला कार्यकाल गंवाना पड़ा था। भाजपा सरकार में राज्य के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन पर बड़े घोटालों के गंभीर आरोप लगे थे और इन आरोपों के चलते ही वे जेल भी जा चुके हैं।
कर्नाटक का किला जीतने में कम नहीं मुसीबतें
दक्षिण भारत में अपनी पकड़ बनाने के लिए भाजपा के लिए कर्नाटक सबसे मुफीद है, लेकिन इस चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस कड़ी टक्कर दे रही है। सीएम के सिद्दारमैया ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का दांव खेला और भाजपा को उसका विरोध करना पड़ा। येदियुरप्पा पर सख्ती के चलते उनका खेमा भी केंद्रीय नेतृत्व से खुश नहीं है। इसके अलावा सांसद अनंत कुमार हेगड़े के बयान के चलते दलित और पिछड़ा वर्ग भी नाखुश है। भाषा भी एक बड़ी चुनौती है। खासतौर से कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में लोगों को हिंदी समझ नहीं आती और अनुवाद के काम में कई बार बंटाढार हो चुका है।