Union Minister Nitin Gadkari ने महाराष्ट्र सरकार के साथ एक फॉर्मूला शेयर किया इस फार्मूले के इस्तेमाल से सूखे और बाढ़ दोनों की समस्या हल हो सकती है
नई दिल्ली।भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) और शिवसेना ( Shiv sena ) के बीच चल रही खींचतान के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ( Union Minister Nitin Gadkari ) ने महाराष्ट्र सरकार ( Government of Maharashtra ) के साथ एक फॉर्मूला शेयर किया है। इस फार्मूले के इस्तेमाल से सूखे और बाढ़ दोनों की समस्या हल हो सकती है। गडकरी द्वारा महाराष्ट्र सरकार को जो फॉर्मूला बताया गया है, वो है स्टेट वाटर ग्रिड निर्माण का। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा है। गडकरी ने इस पत्र के माध्यम से कहा है कि "वाटर ग्रिड का निर्माण से बाढ़ के संकट से तो निजात मिलेगी है, बल्कि सूखे और उसकी वजह से हो रही किसानों की समस्याओं से भी निजात मिल सकेगी। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में सूखे की वजह से कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ एक गंभीर मुद्दा
यही नहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके मंत्रियों को पत्र लिखकर राज्य में स्टेट वाटर ग्रिड के निर्माण के लिए डीपीआर बनाने की सलाह दी है सुझाव दिया है। कहा है कि इससे सरकार को सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और बाढ़ संकट के प्रबंधन में मदद मिलेगी। नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का ध्यान, हर साल महाराष्ट्र में बाढ़ से भारी जानमाल के नुकसान की तरफ दिलाया है। उन्होंने कहा है कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की जरूरत है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ एक गंभीर मुद्दा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार को राष्ट्रीय पावर ग्रिड और राजमार्ग ग्रिड की तर्ज पर राज्य जल ग्रिड के गठन की महत्वाकांक्षी परियोजना को कंपलीट करने का सुझाव दिया है।
फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा
गडकरी ने महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में एक नदी बेसिन से दूसरे नदी बेसिन में बाढ़ के पानी को मोड़ने से पानी की कमी वाले इलाकों को राहत मिल सकती है। नितिन गडकरी ने कहा है कि बाढ़ के पानी से सिंचाई की सुविधा बढ़ने से किसानों की आत्महत्याएं रोकने में मदद मिलेगी। फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा, जिससे गांव की और देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी।