समीर भुजबल को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और महाराष्ट्र सदन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया और वो मार्च 2016 से जेल में बंद थे।
मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल के भतीजे समीर भुजबल को जमानत मिल गई है। समीर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और महाराष्ट्र सदन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया और वो मार्च 2016 से जेल में बंद थे। पूर्व राकांपा सांसद समीर भुजबल ने इसे लेकर मुंबई की विशेष पीएमएलए कोर्ट में जमानत के लिए गुहार लगाई थी लेकिन खारिज हो गई। जिसके बाद समीन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई जिसपर कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए जमानत याचिका मंजूर कर दी।
भ्रष्टाचार के कई मामलों में आरोपी
पूर्व राकांपा सांसद समीर भुजबल पर भ्रष्टाचार के कई मामलों समेत मुंबई एजुकेशन ट्रस्ट की संपत्ति के दुरूपयोग, कई नासिक में कानून व्यवस्यथा बिगाड़ने, अल्फा मराठी पर हमले का आरोप है। इसी वजह से समीर को 2003 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
छगन भुजबल को 2 साल बाद मिली जमानत
बम्बई हाईकोर्ट ने इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को शुक्रवार को 4 मई को जमानत दे दी। भ्रष्टाचार और धनशोधन के मामलों में 14 मार्च, 2016 को गिरफ्तार किए गए भुजबल लगभग दो साल दो महीने से जेल में रहे। उनके वकील सुजय कांटावाला नेबताया कि इससे पहले नासिक के येवला से विधायक भुजबल की जमानत याचिका पांच बार खारिज की जा चुकी थी। उनके खराब स्वास्थ्य, बढ़ती आयु तथा मामले की अभी तक सुनवाई शुरू नहीं होने जैसे तथ्यों को देखते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली गई। इसके लिए उन्होंने पांच लाख रुपये की जमानत राशि भी जमा की है।
छगन के राजनीति में आने पर संशय
खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे भुजबल पिछले दो साल में कई बार अस्पताल जा चुके हैं। यह हालांकि अभी तक सुनिश्चित नहीं हुआ है कि वे सक्रिय राजनीति में आएंगे या नहीं। भुजबल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत शिवसेना से की थी।
मंत्री पद पर रहते जांच घेरे में आए थे छगन भुजबल
दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण में घोटाले, धन शोधन और अन्य आरोपों के सामने आने के बाद महात्मा फुले समता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष भुजबल की लोकनिर्माण विभाग मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका जांच के घेरे में आ गई थी।