
नई दिल्ली। केंद्र में मोदी सरकार की सत्ता में दोबारा वापसी के बाद से अयोध्या विवाद ( Ayodhya Issue) में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा फिर से गरमाता जा रहा है। इस मुद्दे पर शिवसेना ( Shiv Sena ) ने मंगलवार को अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने एनडीए के 350 से अधिक संसदों को चुनकर भेजा है। अकेले भाजपा के 303 सांसद इस बार देश भर से जीते हैं। इसलिए केंद्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कर भगवान राम के वनवास को समाप्त करना चाहिए।
अध्यादेश लाकर मंदिर बनाए सरकार
शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है कि 350 से अधिक सांसदों का समर्थन राम मंदिर का जनादेश है। अब सरकार के पास दो विकल्प हैं।
पहला यह कि मुस्लिम पक्षकारों के साथ बातचीत और दूसरा सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से इसका हल हो। अगर ये दोनों विकल्प विफल हो जाते हैं तो राम मंदिर का निर्माण एक अध्यादेश लाकर किया जाना चाहिए।
कानून के दायरे में रहकर हल निकालना चाहते हैं मोदी
सरकार को चाहिए कि वो राम मंदिर निर्माण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। सामना के संपादकीय में ये भी लिखा गया है कि पीएम मोदी कानून के दायरे में रहकर राम मंदिर का हल निकालना चाहते हैं। बतौर पीएम उन्हें कानून की भाषा ही बोलनी पड़ेगी।
सरकार के पास केवल 2 विकल्प
बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने 18 सांसदों के साथ 16 जून अयोध्या पहुंचे थे। वहां से वापसी करने के बाद शिवसेना के मुखपत्र सामना में इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखा है।
उद्धव ठाकरे से एक दिन पहले यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अयोध्या का दौरा किया था। उन्होंने महंत नृत्य गोपाल दास की उपस्थिति में कहा था कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए दो विकल्प उपलब्ध हैं।