प्रयागराज

हाईकोर्ट में कोडीन युक्त सिरप की सुनवाई: सिफारिश से नाराज जज ने खुद को मामले से किया अलग, बोले- काला दिन

Allahabad High Court: प्रयागराज में हाई कोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने न्यायाधीश से संपर्क करने की कोशिश की। इसकी जानकारी मिलते पीठासीन न्यायाधीश नाराज हो गए और उन्होंने इसे हाई कोर्ट के इतिहास का काला दिन बताया। सुनवाई से भी अपने आप को अलग कर लिया।
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High court news: मुआवजे से कटौती करना गैरकानूनी (Photo Source - Patrika)
High court news: मुआवजे से कटौती करना गैरकानूनी (Photo Source - Patrika)

Allahabad High Court: प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सिफारिश से इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने मामले से ही अपने आप को अलग कर लिया और दूसरे पीठ को भेजना का आदेश दिया। मामला कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जमानत की याचिका से जुड़ा हुआ है। जब वादकारी पक्ष पीठासीन न्यायाधीश इसे संपर्क करने की कोशिश की। इसकी जानकारी मिलते ही न्यायाधीश कृष्ण पहल नाराज हो गए और उन्होंने इसे हाई कोर्ट के इतिहास का काला दिन बताया। बोले इस तरह की कोशिश से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठता है। कानून के शासन की गरिमा पर सीधा आघात है। इसके साथ ही उन्होंने सुनवाई से अपने आप को अलग करते हुए दूसरी पीठ को भेजने का आदेश दिया।

गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिका पर हो रही थी सुनवाई

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट में बीते 30 जुलाई को कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी भोला जायसवाल सहित अन्य गिरफ्तार आरोपियों की जमानत की सुनवाई हो रही थी। इस दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आदेश को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद वादकारी पक्ष के साथी पीठासीन न्यायाधीश से संपर्क करने की कोशिश करने लगे। इसकी जानकारी न्यायमूर्ति कृष्णा पहल को हुई।

न्यायपालिका की प्रतिष्ठा संदेह के घेरे में

न्यायाधीश कृष्णा पहला ने इस पर कड़ी टिप्पणी की। बोले हाई कोर्ट के इतिहास का काला दिन है। यदि फैसला संबंधित के पक्ष में जाता है तो सवाल उठेगा और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा भी संदेश घेरे में आ सकती है। केवल न्याय किया जाना पर्याप्त नहीं है बल्कि इसका निष्पक्ष होना भी जरूरी है। यदि इस प्रकार के आचरण को नजरअंदाज किया गया तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जड़ें कमजोर होगी और न्याय व्यवस्था से जनता का विश्वास डगमगा जाएगा।

नागरिकों को संविधान से न्याय की गारंटी मिली

न्यायमूर्ति कृष्णा पहल ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायाधीशों का विशेष अधिकार नहीं अपितु प्रत्येक नागरिक को संविधान से मिली गारंटी है। इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। बहस के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी आग ए प्रथम परितोष कुमार मालवीय मौजूद थे

Updated on:
01 Aug 2026 11:55 am
Published on:
01 Aug 2026 11:54 am