रायबरेली

खुद को निर्दोष साबित करने में शख्स को लग गए 11 साल! इस मामले में हुई थी गिरफ्तारी, रायबरेली का हैरान करने वाला केस

Man Proved Innocent After 11 Years: खुद को निर्दोष साबित करने में शख्स को 11 साल का समय लग गया। जानिए पूरा मामला क्या है?

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खुद को निर्दोष साबित करने में शख्स को लग गए 11 साल! फोटो सोर्स-Ai

Man Proved Innocent After 11 Years:उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मादक पदार्थ तस्करी के एक पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 2015 में हिरोइन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए रामकिशोर को आखिरकार 11 साल बाद अदालत ने निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि पुलिस आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही और जांच प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां सामने आईं।

मामले की सुनवाई पूरी करते हुए सप्तम अपर मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

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2015 में हिरोइन के साथ गिरफ्तारी का दावा

मामला लालगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने 4 मई 2015 को क्षेत्र के खजांव गांव निवासी रामकिशोर को गिरफ्तार किया था। उस समय पुलिस का दावा था कि उसके पास से 12 पुड़िया हिरोइन बरामद हुई थी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। बाद में रामकिशोर को अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उसे लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

11 साल तक चलता रहा मुकदमा

रामकिशोर के खिलाफ चल रहे इस मुकदमे की सुनवाई करीब 11 साल तक चली। इस दौरान अदालत में पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां उठाईं। अदालत में यह भी सामने आया कि बरामद बताई गई हिरोइन को जांच के लिए 19 दिन बाद प्रयोगशाला भेजा गया था।

अदालत में जवाब नहीं दे सकी पुलिस

मुकदमे की सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि 19 दिनों तक बरामद पदार्थ आखिर कहां और किस स्थिति में रखा गया था। पुलिस इस संबंध में अदालत को स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी। इसके अलावा जब्ती प्रक्रिया, साक्ष्य संरक्षण और जांच से जुड़े कई अन्य पहलुओं में भी पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई। अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का अभाव था।

साक्ष्य के अभाव में आरोपी को मिली राहत

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाया। सप्तम अपर मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार ने अपने फैसले में रामकिशोर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद करीब 11 वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत हुआ।

पुलिस जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस फैसले के बाद एक बार फिर पुलिसजांच और साक्ष्य संरक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत में सामने आई खामियों ने यह स्पष्ट किया कि जांच में छोटी लापरवाही भी किसी मामले की पूरी दिशा बदल सकती है। रामकिशोर को 11 साल तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। अदालत के फैसले के बाद अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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