रायगढ़

चक्रधर बाल सदन का मामला : नोटो के बंडल के साथ सोने-चांदी के जेवरात पार होने के मामले में आया नया मोड़

-अनाथालय के स्टोर रुम में रखे गए बंद अलमारी को तोडऩे के लिए जिस मैकेनिक का सहारा लिया गया था, उसने भी दिया बयान
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Oct 01, 2018
चक्रधर बाल सदन का मामला : नोटो के बंडल के साथ सोने-चांदी के जेवरात पार होने के मामले में आया नया मोड़
चक्रधर बाल सदन का मामला : नोटो के बंडल के साथ सोने-चांदी के जेवरात पार होने के मामले में आया नया मोड़

रायगढ़. चक्रधर बाल सदन के स्टोर रुम में रखे बंद अलमारी को तोडऩे व उसमें से नोटो के बंडल के साथ सोने-चांदी के जेवरात पार होने के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। अब इस मामले में वो मैकेनिक सामने आया है। जिसने उक्त अलमारी को तोड़ा था। उसने अपने बयान में भी अलमारी के नोटों के बंडल व गहने होने की बात का उल्लेख किया है। जिसकी कॉपी, कोतवाली पुलिस के पास है। विदित हो कि जुलाई माह की इस घटना में अभी तक पुलिस जांच कर रही है।

चक्रधर बाल सदन के बंद अलमारी से नोटों के बंडल व सोने-चांदी के जेवरात पार होने के मामले में कोतवाली पुलिस अब तक अपराध दर्ज नहीं कर पाई है। जिसे लेकर कई तरह की दलील दी जा रही है। इन सब के बीच एक और बात सामने आई है। अनाथालय के स्टोर रुम में रखे गए बंद अलमारी को तोडऩे के लिए जिस मैकेनिक का सहारा लिया गया था। उसने भी इस मामले में अपना अहम बयान दिया है।

सूत्रों की मानें तो उसके बयान की कॉपी कोतवाली में मौजूद हैंं, जिसमें बंद अलमारी के लॉक को तोडऩे के लिए ले जाने वाले का नाम भी बताया है, जो अनाथालय में अपनी सेवा दे चुकी है। हालांकि पुलिस गोपनीयता भंग होने का हवाला देते हुए उक्त व्यक्ति का नाम बताने से परहेज कर रही है।

सूत्र यह भी बताते है कि बंद अलमारी को तोडऩे व अंदर रखे कीमती सामन पार होने के मामले में करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को बयान दर्ज किया है, जिसके आधार पर अमानत में ख्यानत का अपराध दर्ज करने को लेकर महिला बाल विकास विभाग ने कोतवाली पुलिस से पत्राचार भी किया था, पर करीब दो माह बाद भी पुलिस जांच की बात कह मामले को टाल रही है।

सिर्फ मांग रहे है दस्तावेज
जानकार यह भी कह रहे हैं कि कोतवाली पुलिस द्वारा शुरू से इस मामले में टाल-मटोल करने की पहल की जा रही है। कलक्टर की अनुशंसा वाले पत्र में जांच उपरांत अपराध दर्ज करने में देरी की जा रही है। कोतवाली पुलिस द्वारा कभी आडिट रिपोर्ट तो कभी बयान देने वालों की कॉपी की मांग ही की जा रही है। जिसे प्राप्त होने के एक माह बाद भी यह मामला ज्यों के त्यों पड़ा हुआ है।

Updated on:
01 Oct 2018 06:34 pm
Published on:
01 Oct 2018 06:34 pm