एनटीपीसी के खिलाफ प्रभावितों का आंदोलन 40 वें दिन भी जारी
पुसौर.एनटीपीसी के खिलाफ प्रभावितों का आंदोलन 40 वें दिन भी जारी था। आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन से घबराकर कंपनी की ओर से आंदोलनकारियों पर झूठा मामला दर्ज करवाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के इस प्रयास से आंदोलन व इंकलाब रुकेगा नही बल्कि विरोध हर पल बढ़ेगा ही।
किसानों ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि हमें नौकरी दी जाए इसके बदले किसानों ने अपनी जमीन इस उद्योग को लगाने की अनुमति दी है। ऐसे में प्रशासन और कंपनी की ओर से मनमानी कर नौकरी के मुद्दे को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। कंपनी दबाव के तहत पुलिस विभाग को झूठे आवेदन देकर आंदोलनकारियों को जुर्म में फंसवा कर जेल भिजवाने का षड्यंत्र कर रही है। इससे छपोरा हड़ताल चौक में चल रहा शांतिपूर्वक आंदोलन सुलझने के बजाए और उलझने की कगार पर आ गया है।
ग्रामीण बता रहे हैं चाल
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के लोग उन्हें फंसाने की चाल चल रहे हैं। बताया गया कि शुक्रवार को धरना स्थल से कुछ दूरी पर ही पिछले कई महीने का वेतन नहीं मिलने से परेशान इंडवेल एजेंसी के गरीब-मजदूर उक्त कंपनी की गाडिय़ों को रोककर अधिकारियों से अपने वेतन की मांग कर रहे थे। जिसकी सूचना जैसे ही एनटीपीसी के अधिकारियों को हुई तो वो ग्रामीणों के द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्वक आंदोलन को कुचलने का सुनहरा मौका मानते हुए पुलिस को इस बात की झूठी शिकायत कर दी है कि गाडिय़ों को रोकने के पीछे आंदोलनकारियों का हाथ है, उन पर तत्काल कार्यवाही की जाए।
ये क्यों नहीं करते
आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि आंदोलन समाप्त करवाना है तो आंदोलनकारियों के एक सूत्रीय मांगों पर कार्यवाही करते हुए उनकी नौकरी का रास्ता खोलें और इस प्रकार की कूटनीति करते हुए निजी स्वार्थ के लिए महारत्न का दर्जा प्राप्त देश की अग्रणी विद्युत उत्पादक कंपनी एनटीपीसी को बदनाम न करें।
उठाए ये सवाल
आंदोलन के 40 वें दिन प्रश्न पूछने कि कड़ी में कलेक्टर, एसडीएम रायगढ़ के साथ एनटीपीसी से पूछा गया कि क्या रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का नहीं है, यदि है तो फिर एक ही राज्य में दो जिलों में दोहरी नीति क्यों अपनाइ जा रही है। बिलासपुर सीपत में स्थाई नौकरी है और रायगढ़ लारा में नौकरी ही नहीं ऐसा क्यों हो रहा है।