
रायगढ़. रेल सफर के दौरान यात्रियों को किसी परेशानी का सामना करना पडे तो उन्हें क्या करनी चाहिए। इस बात को लेकर आरपीएफ ने महिला सशक्तिकरण व सुरक्षा पखवाड़ा के तहत महिला यात्रियों को जागरुक करने की पहल की। जागरुकता के इस कार्यक्रम में आरपीएफ पोस्ट के लाउडस्पीकर का बैट्री चार्ज नहीं था।
ऐसी स्थिति मेंं अधिकारियों ने पोस्ट के बाहर महिला यात्रियों को रेलवे के सुरक्षा को लेकर जारी हेल्प लाइन के बारे में जानकारी दी। वहीं इसे जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। इस बीच कुछ यात्रियों ने रेलवे के इस हेल्प लाइन नंबर से संपर्क नहीं होने की शिकायत भी की।
अगर आप रेल सफर के दौरान हो और आपको किसी अप्रिय वारदात का सामना करना पड़े तो आप क्या करेंगी। कुछ ऐसे ही सवाल रविवार को आरपीएफ के एसआई एसके शुक्ला, एसआई अनिल गिरी व जवानों ने प्लेटफार्म पर बैठे व गुजर रहे महिला यात्रियों सेे किया।
किसी ने आरपीएफ व जीआरपी से संपर्क करने की बात कही तो किसी ने रेलवे के सुरक्षा को लेकर जारी हेल्प लाइन नंबर 182 पर कॉल करने की बात कही। जिसके बाद स्थानीय पोस्ट के अधिकारी द्वारा रेलवे के टोल फ्री नंबर 182 के बारे में उन्हें विस्तार से बताया, वहीं इस की भी जानकारी दी कि देश के किसी भी हिस्से में रेलवे का यह टोल फ्री नंबर प्रभावी हैं, जिससे जरुरत के हिसाब से यात्री इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसमें 24 घंटे, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हेल्प लाइन की टीम काम करती है।
आरपीएफ ने यह भी बताया कि बिलासपुर डिवीजन की ओर एक महिला सशक्तिकरण व सुरक्षा को लेकर एक पखवाड़ा मनाया जा रहा है। जिसमें 30 मार्च से 2 अप्रैल तक महिला यात्रियों को सुरक्षा के प्र्रति जागरुक करने की पहल की जा रही है।
आरपीएफ ने इस पखवाड़े को लेकर पोस्ट में रखे अपने लाउडस्पीकर को भी साथ ले आई थी। जिससे अधिक से अधिक यात्रियों के बीच आरपीएफ की आवाज पहुंच सके। पर पोस्ट का लाउडस्पीकर ही चार्ज नहीं था। जिसकी वजह से पोस्ट के अधिकारियों को पोस्ट के पास से गुजर रहे यात्रियों को रोक-रोक कर रेलवे के हेल्प लाइन नंबर 182 की जानकारी देनी पड़ी।
बगैर महिला बल के सशक्तिकरण
आरपीएफ के महिला सशक्तिकरण व उनकी सुरक्षा को लेकर आयोजित पखवाड़ा मेंं इस बात की चर्चा भी जोरों पर थी कि पूरे कार्यक्रम के दौरान एक महिला बल, देखने को नहीं मिली। पिछले कई वर्षो से महिला बल की मांग भी पोस्ट स्तर पर की जा चुकी है। पर अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में, महिला सशक्तिकरण के इस अभियान में आरपीएफ के पुरुष अधिकारी व जवानों को ही जिम्मेदारी संभालना पड़ा।