
Chhattisgarh News: भाटापारा क्षेत्र के ग्राम धुर्राबंधा से सरकारी दस्तावेजों में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने की शिकायत की गई है। सामने आए दस्तावेज में व्यक्ति की मृत्यु की तारीख 15 फरवरी 1970 दर्ज है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है। मामले को लेकर ग्राम निवासी राजेश अग्रवाल ने भाटापारा एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता राजेश अग्रवाल का कहना है कि जिस व्यक्ति के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है, वह वर्तमान में जीवित है। ऐसे में उसके नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान, मृत्यु से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
मामले में सामने आए मृत्यु प्रमाण पत्र में संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की तारीख 15 फरवरी 1970 दर्ज बताई गई है। वहीं प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 को जारी किया गया। यानी दस्तावेज में दर्ज मृत्यु की तारीख और प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख के बीच करीब 56 साल का अंतर है। इसी अंतर को लेकर शिकायतकर्ता ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। शिकायत में कहा गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति जीवित है तो उसके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र किस आधार पर तैयार और जारी किया गया, इसकी जांच जरूरी है।
शिकायत में ग्राम पंचायत सचिव सहित मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी जानना चाहा है कि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पंचायत स्तर पर किन दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया था। मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज का इस्तेमाल कई प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में होता है। ऐसे में इसके जारी होने की प्रक्रिया में दर्ज जानकारी का सही होना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
मामले को लेकर राजेश अग्रवाल ने भाटापारा एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत दी है। शिकायत के माध्यम से पूरे प्रकरण की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गलत प्रक्रिया अपनाई गई है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।
फिलहाल इस मामले में शिकायत के आधार पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच होना बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया और उसमें 15 फरवरी 1970 की मृत्यु तारीख किस आधार पर दर्ज की गई। जांच में संबंधित पंचायत रिकॉर्ड, मृत्यु से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की पड़ताल की जा सकती है।
जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामले में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है या दस्तावेज तैयार करने में कोई अन्य कारण रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब प्रशासन की जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।