
Government Jobs: छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि शिक्षक भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए बीएड (B.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों कृषि स्नातकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कृषि ग्रेजुएट्स का दावा है कि राज्य के करीब 90 फीसदी छात्रों ने न तो बीएड किया है और न ही टीईटी पास है। ऐसे में यदि अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है तो बड़ी संख्या में योग्य कृषि स्नातक आवेदन करने से भी वंचित हो सकते हैं।
छात्रों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में कृषि विषय का बीएड कोर्स संचालित नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार ने जिस योग्यता को अनिवार्य किया है, उसे हासिल करने का अवसर ही विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं है। कृषि स्नातकों का कहना है कि जब राज्य में कृषि विषय का बीएड कोर्स मौजूद नहीं है, तब इस योग्यता को भर्ती के लिए अनिवार्य बनाना हजारों युवाओं के साथ अन्याय है।
छात्रों का कहना है कि वर्ष 2019 से लेकर 2025 तक हुई कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड और टीईटी अनिवार्य नहीं थे। वर्ष 2019 की भर्ती भी बिना इन दोनों योग्यताओं के पूरी की गई थी। लेकिन 13 फरवरी 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के बाद कृषि शिक्षक भर्ती के लिए बीएड और टीईटी अनिवार्य कर दिए गए। इस बदलाव ने भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है।
भर्ती कैलेंडर के अनुसार यदि 25 अक्टूबर 2026 को कृषि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है, तो वर्तमान नियमों के कारण बड़ी संख्या में कृषि स्नातक आवेदन करने के पात्र नहीं रहेंगे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से भर्ती की तैयारी की है, लेकिन नियम बदलने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
अपनी मांगों को लेकर कृषि स्नातकों के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मुलाकात की। उन्होंने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए भर्ती नियमों में राहत देने की मांग की। छात्रों ने बताया कि जब राज्य में कृषि विषय का बीएड कोर्स ही उपलब्ध नहीं है, तब बीएड की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है।
कृषि स्नातकों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं-
वर्ष 2026 की कृषि शिक्षक भर्ती पुराने नियमों के अनुसार कराई जाए।
भर्ती परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को बीएड और टीईटी पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
कृषि विषय के लिए विशेष ब्रिज कोर्स शुरू किया जाए।
कृषि शिक्षक भर्ती में केवल कृषि विषय आधारित बीएड को मान्यता दी जाए।
कृषि शिक्षकों के लिए अलग शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) व्यवस्था विकसित की जाए।
भविष्य की भर्ती के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक नीति बनाई जाए।
छात्रों का कहना है कि सरकार एक ओर कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं जिन्हें पूरा करने की सुविधा राज्य में उपलब्ध ही नहीं है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी नई योग्यता को अनिवार्य करने से पहले उससे संबंधित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि योग्य अभ्यर्थी अवसर से वंचित न हों।
फिलहाल हजारों कृषि स्नातकों की नजर राज्य सरकार पर टिकी हुई है। यदि सरकार भर्ती से पहले नियमों में संशोधन करती है या कोई अंतरिम व्यवस्था लागू करती है, तो बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि मौजूदा नियम यथावत रहते हैं, तो 2026 की कृषि शिक्षक भर्ती में हजारों कृषि ग्रेजुएट्स आवेदन से पहले ही बाहर हो सकते हैं।