
Birgaon Municipal Election: छत्तीसगढ़ के नगर निगम बिरगांव में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित चुनाव से पहले 40 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया लॉटरी पद्धति से पूरी कर ली गई है। आरक्षण तय होते ही संभावित प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस बार 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने से महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
कलेक्टर के निर्देश पर लॉटरी पद्धति से वार्डों का आरक्षण तय किया गया। लंबे समय से अपने-अपने वार्डों में चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदार अब आरक्षण के मुताबिक रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कई वार्डों के महिला आरक्षित होने के बाद राजनीतिक दलों और दावेदारों ने नए समीकरण तलाशने शुरू कर दिए हैं। कई नेताओं की नजर अब अपने परिवार की महिला सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारने पर भी है। इसके चलते बिरगांव के मोहल्लों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बिरगांव निगम में वर्तमान में कांग्रेस की महापौर परिषद है। ऐसे में आगामी चुनाव में भाजपा भी निगम की सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगाने की तैयारी में जुटी है। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। दावेदार अब अपने-अपने राजनीतिक संपर्कों के साथ-साथ वार्ड में जनसंपर्क बढ़ाने की रणनीति बना रहे हैं।
नगर निगम आयुक्त युगल किशोर उर्वाशा के अनुसार वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार चुनाव से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके तहत मतदान केंद्रों का सत्यापन और मतदाता सूची का प्रकाशन भी किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद अन्य प्रक्रियाएं भी निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ेंगी।
बिरगांव में महापौर पद के टिकट को लेकर सामाजिक स्तर पर भी दावेदारियां सामने आने लगी हैं। देवांगन समाज महापौर पद के टिकट के लिए लामबंद होने की तैयारी में है। धर्म प्रचार प्रकोष्ठ देवांगन समाज के प्रदेश अध्यक्ष भीखम लाल देवांगन का कहना है कि निगम क्षेत्र में समाज की संख्या काफी है और समाज के लोगों की भाजपा के प्रति निष्ठा भी अधिक है। उनका कहना है कि यदि पार्टी समाज से महापौर प्रत्याशी बनाती है तो समाज के लोग जीत के लिए पूरी ताकत से जुटेंगे।
आरक्षण के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को लेकर भी रणनीति बनाने की चुनौती होगी। बिरगांव के मतदाताओं के अनुसार पानी, सड़क, बिजली और सफाई जैसे बुनियादी मुद्दे चुनाव में प्रमुख रहेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो राजनीतिक दल इन समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देगा, उसके पक्ष में मतदाताओं का रुझान बन सकता है। ऐसे में आरक्षण के बाद अब बिरगांव में चुनावी मुद्दों और प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।