
BJP Government Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के भाजपा सरकार के गठन के करीब ढाई साल बाद भी प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा सुलझ नहीं पाया है। चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण और नियमितीकरण की दिशा में 100 दिन के भीतर कार्रवाई का वादा किया था। सरकार का कार्यकाल ढाई साल के करीब पहुंचने के बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगम-मंडलों और शासकीय संस्थानों में बड़ी संख्या में अनियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी नियमितीकरण और सेवा संबंधी अन्य मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं।
अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण सहित अन्य मांगों पर विचार करने के लिए सरकार की ओर से समिति का गठन किया गया था। समिति को कर्मचारियों की सेवा स्थिति, नियमों और नियमितीकरण की संभावनाओं का अध्ययन कर सरकार को सुझाव देना था। हालांकि समिति के गठन के लंबे समय बाद भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
इसे लेकर कर्मचारी संगठनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अनियमित कर्मचारी महासंघ के नेता गोपाल साहू का कहना है कि चुनाव के दौरान किए गए वादे के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार बनने के बाद उनकी वर्षों पुरानी समस्या का जल्द समाधान होगा। 100 दिन के भीतर कार्रवाई का वादा किया गया था, लेकिन अब करीब ढाई साल बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कर्मचारी संगठन केवल नियमितीकरण ही नहीं, बल्कि वेतन विसंगति दूर करने, सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लंबित मांगों के समाधान की भी मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर सरकार के साथ लगातार मांग और बातचीत की गई, लेकिन अभी तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है।
मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में अब कर्मचारी संगठन आंदोलन की राह पर हैं। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने बताया कि नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर 11 सितंबर को आंदोलन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
अनियमित कर्मचारियों का मुद्दा अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। घोषणा पत्र में किए गए वादे के बाद कर्मचारियों को नियमितीकरण की उम्मीद थी, लेकिन लंबे समय से निर्णय लंबित होने के कारण नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्मचारी संगठनों के आंदोलन के साथ राजनीतिक स्तर पर भी प्रमुख विषय बन सकता है।