
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी (फोटो - सोशल मीडिया, (Photo Patrika)
CGPSC Scam: राकेश टेंभुरकर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग घोटाले में जेल में बंद तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। टामन सिंह पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय जांच और आयोग के सदस्य की दंडात्मक अनुशंसा को ताक पर रखकर आदिम जाति विकास विभाग के अपात्र अधिकारी को पदोन्नति का लाभ पहुंचाया। मामले का पर्दाफाश आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए गए दस्तावेजों से हुआ है। इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत सीबीआई, ईओडब्ल्यू, मुख्य सचिव विकासशील और सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से की गई है। शिकायत में दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और घोटाले की राशि की रिकवरी करने की मांग की गई है।
पूरा मामला आदिम जाति विकास विभाग के तत्कालीन सहायक आयुक्त भूपेंद्र कुमार राजपूत से जुड़ा है। वर्ष 2020 में रायगढ़ में पदस्थापना के दौरान छात्रावासों के लिए 50 रुपए बाजार मूल्य की रजिस्टर-पंजी को 152 रुपए प्रति नग की दर से खरीदा गया था। इस लेनदेन और कमीशनखोरी की शिकायत पर विभागीय जांच बैठाई गई, जिसमें वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर आयोग के नामांकित सदस्य सुकृत लाल साव ने भूपेंद्र राजपूत के खिलाफ 50 प्रतिशत राशि (148920 रुपए) की वसूली और निंदा का दंडात्मक अभिमत दर्ज किया था।
आयोग नियमावली (परिशिष्ट-01, सरल क्रमांक 3) के अनुसार, यदि अध्यक्ष किसी सदस्य की राय से असहमत होते हैं, तो प्रकरण को द्वितीय सदस्य की राय के लिए भेजना या पूर्ण आयोग (फुल कमीशन) के समक्ष रखकर बहुमत से निर्णय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन, तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने नियमों को दरकिनार करते हुए अकेले ही टिप्पणी दर्ज कर दंडात्मक प्रस्ताव को पूरी तरह निरस्त कर दिया। उन्होंने सांठगांठ के तहत आरोपी अधिकारी को दोषमुक्त करते हुए पदोन्नति की अनुशंसा कर दी।
आरोपी भूपेंद्र राजपूत को बचाने के लिए आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद के क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर एक अनोखा फैसला सुनाया। टामन सिंह ने उन 73 छात्रावास अधीक्षकों से वसूली की सिफारिश कर दी, जो न तोकार्रवाई में आरोपी थे और न ही जिन्हें सुनवाई का कोई मौका दिया गया था।
टामन सिंह की अवैध अनुशंसा के बल पर दागी अधिकारी भूपेंद्र कुमार राजपूत को पदोन्नत कर अतिरिक्त संचालक बनाया गया और वर्तमान में वे मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ हैं। मामले के आधिकारिक खुलासे के बाद आरटीआई कार्यकर्ता ने 17 जून 2020 को जारी प्रक्रियात्मक रूप से अवैध परामर्श पत्र (जावक 270) को तत्काल निरस्त करने और नामांकित सदस्य के असहमतिपूर्ण अभिमत के आधार पर प्रकरण की रिव्यू करने की मांग की है।
यह प्रकरण उनके आने के पहले होने के कारण दस्तावेजों को देखने के बाद ही कुछ कहेंगे। इस तरह की कोई गड़बडी़ हुई है तो मामले की जानकारी लेने के बाद ही वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी।
-भुवनेश यादव, आदिम जाति एवं अनुसुचूति जनजाति विकास विभाग सचिव
Updated on:
1 Sep 2026, 9:06 AM IST
Published on:
1 Sep 2026, 9:06 AM IST
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