
DA Arrears Demand: छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की ओर से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने की घोषणा के बाद भी प्रदेश के कर्मचारी संगठनों की नाराजगी कम नहीं हुई है। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने अब महंगाई भत्ते के एरियर्स यानी बकाया राशि के भुगतान की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का लाभ केंद्र सरकार की तरह वास्तविक देय तिथि से मिलना चाहिए, न कि कई महीने बाद। शिक्षक नेताओं ने मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में DA भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि देरी से महंगाई भत्ता मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठनों ने मुख्यमंत्री से लंबित एरियर्स का भुगतान करने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षक और कर्मचारियों के मन में इस बात की कसक है कि अलग राज्य बनने के बाद भी उन्हें महंगाई भत्ते के भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 10 महीने पहले ही 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते का एरियर्स देने की बात कही थी, जबकि छत्तीसगढ़ में 10 महीने बाद यानी 1 नवंबर से केंद्र के अनुरूप 2 प्रतिशत DA देने की घोषणा की गई है। संजय शर्मा के मुताबिक, कर्मचारियों को महंगाई भत्ता उसकी वास्तविक देय तिथि से नहीं मिलने के कारण आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन प्रदेशवासियों की खुशहाली और विकास के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए दूसरे राज्यों से तुलना करनी पड़ रही है।
संजय शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश के लगभग चार लाख कर्मचारियों को करीब 88 महीने से महंगाई भत्ते के भुगतान में अंतर का नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ समय पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने दीपावली के मौके पर भी कर्मचारियों की निराशा का जिक्र किया। शर्मा के अनुसार, DA बढ़ोतरी की घोषणा के बावजूद कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश के कर्मचारियों की लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स राशि का भुगतान किया जाए, ताकि उनका मनोबल बढ़ सके।
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने भी महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से 3 प्रतिशत DA बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जुलाई से 63 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को फिलहाल 60 प्रतिशत DA मिलेगा। पांडेय ने कहा कि राज्य कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नवंबर से देने की बात कही जा रही है, जबकि इसका लाभ जनवरी 2026 से मिलना चाहिए था।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार जब भी महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करे, उसी देय तिथि से छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को भी इसका लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर पड़ता है। ऐसे में DA भुगतान में देरी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश चटर्जी ने भी राज्य सरकार की DA और DR व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए की गई घोषणाओं को लागू करने में सरकार अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है। चटर्जी ने केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (DR) के आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल किया कि जब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 63 प्रतिशत DA मिल रहा है, तो छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों को 60 प्रतिशत और पेंशनर्स को 58 प्रतिशत DR ही क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनर्स पर भी पड़ता है। ऐसे में उन्हें भी केंद्र के समान महंगाई भत्ते और राहत का लाभ मिलना चाहिए।
महंगाई भत्ते को लेकर अलग-अलग शिक्षक संगठनों के नेताओं ने सरकार से एक जैसी मांग रखी है। उनका कहना है कि केवल DA बढ़ाने की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को इसका लाभ वास्तविक देय तिथि से मिलना चाहिए। साथ ही पिछले महीनों का लंबित एरियर्स भी जारी किया जाना चाहिए। फिलहाल कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर विचार कर लंबित एरियर्स के भुगतान को लेकर निर्णय लेगी।