
Chhattisgarh Mother Milk Bank: पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज संबद्ध आंबेडकर अस्पताल में प्रदेश का पहला मदर मिल्क बैंक खोला जाएगा। इसकी घोषणा गुरुवार को कॉलेज स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग सप्ताह के मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल करेंगे। मदर मिल्क बैंक खुलने का फायदा उन माताओं को होगा, जिनके नवजात शिशु हैं और ब्रेस्ट फीडिंग में परेशानी होती है। यहां स्वस्थ महिलाएं दूध भी दान कर सकेंगी।
अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में प्रदेश की 10 ऐसी माताओं को माता यशोदा सम्मान दिया जाएगा। ये माताएं दूध का दान कर अथवा अन्य शिशुओं को स्तनपान कराकर मानवता व मातृत्व की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है। कार्यक्रम का उद्देश्य मां के दूध के महत्व के प्रति जागरुकता बढ़ाना, नवजात एवं शिशुओं के समुचित पोषण व बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाना है।
जन्म के बाद पहले 6 महीने तक शिशु के लिए मां का दूध एकमात्र संपूर्ण व सर्वोत्तम आहार है। पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे को शुरुआती बीमारियों व संक्रमण से लड़ने की अद्भूत शक्ति देता है। दूध में मौजूद एंटीबॉडीज (रोग प्रतिरोधक तत्व) व पोषक तत्व बच्चे की इम्युनिटी मजबूत करते हैं और उसे दस्त, निमोनिया, कान व पेट के गंभीर संक्रमणों जैसी कई बीमारियों से बचाते हैं। इसमें प्रोटीन, वसा, विटामिन व कार्बोहाइड्रेट सही मात्रा में होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी हैं। मां का दूध शिशु के कोमल पाचन तंत्र द्वारा आसानी से पच जाता है।
माता पूरी तरह स्वस्थ होनी चाहिए। उसके बच्चे के लिए पर्याप्त दूध मिल रहा हो। - एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी व सिफलिस जैसी गंभीर व संक्रामक बीमारी न हो।
जो महिलाएं तंबाकू, सिगरेट, शराब या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करती हैं।
जो माताएं ऐसी भारी या रेडियोएक्टिव दवाइयां नहीं ले रही हैं, जो दूध के जरिए शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है।
जिन्हें एचआईवी या अन्य रक्त जनित संक्रमण हैं। जो धूम्रपान, शराब या ड्रग्स का सेवन करती हैं। जिन्हें कोई गंभीर तीव्र बीमारी या स्तन में संक्रमण (जैसे मैस्टाइटिस) हो। माताओं का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। ये शुरुआती बीमारियों व संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है। माताएं कम से कम 6 माह से एक साल तक ब्रेस्ट फीडिंग जरूर कराएं। इससे ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी टलता है। ये अच्छी बात है कि ज्यादातर ग्रामीण महिलाएं बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग करा रही हैं- डॉ. शारजा फुलझेले, एचओडी पीडियाट्रिक्स