
Government Property Sale Rules: नगरीय निकायों की जमीन, दुकान, भवन और अन्य अचल संपत्तियों के खरीद-बिक्री और अधिकार देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026 लागू (Municipal Corporation Land Sale Rule 2026) कर दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को नए नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
नए नियमों का उद्देश्य निकायों की संपत्तियों के उपयोग, आवंटन और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। शासन का मानना है कि इससे संपत्तियों के ट्रांसफर में मनमानी पर रोक लगेगी और नगरीय निकायों को बेहतर राजस्व भी प्राप्त होगा।
नए नियमों के अनुसार अब नगर निकायों की किसी भी अचल संपत्ति को बेचने, पट्टे पर देने या अन्य तरीके से हस्तांतरित करने के लिए मुख्य रूप से ई-निविदा प्रक्रिया अपनानी होगी। संपत्ति उसी व्यक्ति या संस्था को दी जाएगी, जो निर्धारित प्रक्रिया में सबसे अधिक बोली लगाएगा। इसके लिए निविदा की सूचना कम से कम 15 दिन पहले जारी करनी होगी। सूचना दो समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के साथ ही संबंधित नगर निकाय कार्यालयों के सूचना पटल पर भी प्रदर्शित करनी होगी।
सरकार ने संपत्तियों के मूल्य निर्धारण के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई है। जमीन का आरक्षित मूल्य प्रचलित कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं, भवन या अन्य निर्माण वाली संपत्तियों के लिए निर्माण लागत और विकास कार्यों पर हुए खर्च को भी शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर अंतिम आरक्षित मूल्य निर्धारित होगा।
नए नियमों (Urban Local Body Property Rules) में संपत्ति ट्रांसफर की मंजूरी देने वाले अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं भी तय की गई हैं। बड़े नगर निगमों में मेयर-इन-काउंसिल को 10 करोड़ रुपए तक की संपत्ति के ट्रांसफर का अधिकार दिया गया है। इससे अधिक मूल्य की संपत्तियों के लिए संचालक नगरीय प्रशासन या राज्य शासन की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं, 50 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की संपत्तियों के हस्तांतरण के लिए राज्य शासन की मंजूरी अनिवार्य रहेगी।
नए नियमों (Property Rule Change 2026) में सामाजिक न्याय का भी ध्यान रखा गया है। संपत्ति आवंटन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। महिलाओं को प्रत्येक वर्ग में एक-तिहाई आरक्षण और दिव्यांगों को 2 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इसके अलावा पट्टाधारी की मृत्यु के बाद वैधानिक उत्तराधिकारियों को निर्धारित शुल्क जमा कर नामांतरण की सुविधा मिलेगी।
विवादित मामलों में सुनवाई और सार्वजनिक सूचना के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि नए नियमों से नगर निकायों की संपत्तियों के उपयोग और हस्तांतरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियागत समस्याओं का समाधान होगा।