
SIR Controversy: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने मतदाता सूची से करीब 24.99 लाख नाम बाहर होने को लेकर भाजपा सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्ला ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें करीब 19.13 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में रखा गया है और 6 लाख से अधिक मतदाताओं को मृत बताया गया है।
सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी संभावित राजनीतिक स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग के तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला बताया। कांग्रेस का कहना है कि बड़ी संख्या में नाम सूची से बाहर होने से पात्र मतदाताओं के सामने अपने नाम की स्थिति स्पष्ट कराने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
SIR के दौरान करीब 19.13 लाख मतदाताओं को ऐसे मामलों में चिह्नित किया गया है, जिनके बारे में यह सत्यापित किया जाना है कि वे संबंधित पते पर रह रहे हैं या नहीं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, BLO इन मतदाताओं के घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे और मतदाता सूची में दर्ज विवरण की जांच करेंगे।
SIR के बाद जारी आंकड़ों में 6 लाख से अधिक मतदाताओं को मृत श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके और अन्य अपात्र श्रेणियों से जुड़े नामों को भी सूची से अलग किया गया है। संबंधित मतदाता सूची और SIR से जुड़ी सेवाएं निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
कांग्रेस नेता शुक्ला ने कहा कि मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने SIR के तहत नामों के विलोपन और उनकी श्रेणियों को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से SIR के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण, सत्यापन और नाम जोड़ने या सुधारने के लिए प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई गई हैं।