
Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के युवा और चर्चित चेहरों में शामिल भिलाई विधायक देवेंद्र यादव एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। आंदोलनों, गिरफ्तारी, जेल और फिर सक्रिय राजनीति में वापसी के बाद देवेंद्र यादव लगातार प्रदेश की राजनीति में आक्रामक भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में हुई बातचीत में उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कई राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
देवेंद्र यादव ने भाजपा पर “जोड़-तोड़ की राजनीति” करने का आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी अंदर से कमजोर हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भाजपा की ओर से ऑफर मिलते रहते हैं, लेकिन उनकी राजनीति विचारधारा और संघर्ष की राजनीति है।
भिलाई विधायक ने कहा कि भाजपा बाहर से जितनी मजबूत दिखती है, अंदर से उतनी ही अस्थिर है। उनका दावा है कि पार्टी के भीतर कई स्तर पर असंतोष मौजूद है और यही वजह है कि भाजपा लगातार विपक्ष के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती रहती है। उन्होंने कहा कि जोड़-तोड़ और राजनीतिक प्रबंधन भाजपा की पुरानी रणनीति रही है। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भरोसा जनता की ताकत और जनआंदोलनों पर है, न कि सत्ता के दबाव पर।
भाजपा में शामिल होने के सवाल पर देवेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें अलग-अलग माध्यमों से कई बार ऑफर मिलते रहते हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनकी राजनीति किसी पद या लाभ के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता की आवाज उठाने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने का जरिया होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विचारधारा छोड़कर राजनीति करना उनके स्वभाव में नहीं है।
देवेंद्र यादव ने राज्य सरकार और सत्ता व्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब सत्ता अहंकार में आ जाती है, तब उसे जनता की आवाज सुनाई नहीं देती। उन्होंने कहा, “सत्ता एक मदमस्त हाथी की तरह हो चुकी है, इसलिए जनता की आवाज पहुंचाने के लिए आंदोलन जरूरी हो जाता है।” उनका कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सड़क पर उतरकर जनता के मुद्दों को उठाना भी जरूरी है।
राजनीतिक गलियारों में देवेंद्र यादव को कांग्रेस के युवा नेतृत्व के रूप में देखा जाता है। ऐसे में जब उनसे मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे अपनी उम्र और राजनीतिक अनुभव के हिसाब से “अपरिपक्वता” बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका फोकस संगठन और जनता के बीच काम करने पर है। उन्होंने कहा, “मुझे कार्यकर्ता बनकर काम करना ज्यादा पसंद है। राजनीति में पद से ज्यादा जनता का विश्वास महत्वपूर्ण होता है।”
अपने राजनीतिक सफर के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए देवेंद्र यादव ने जेल के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष राजनीति का हिस्सा है और ऐसे अनुभव व्यक्ति को और मजबूत बनाते हैं। उनका कहना था कि जेल जाने के बाद उन्हें जनता का और ज्यादा समर्थन मिला और इससे उन्हें यह एहसास हुआ कि लोग संघर्ष करने वालों के साथ खड़े रहते हैं।
कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के सवाल पर भी देवेंद्र यादव ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने माना कि हर बड़े राजनीतिक दल में अलग-अलग विचार और समूह होते हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य संगठन को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा।
देवेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के आक्रामक और सक्रिय नेताओं में गिना जाता है। खासकर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी और खुलकर बयान देने की वजह से वे अक्सर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहते हैं। हाल के बयानों के बाद एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।