रायपुर

मेडिकल कॉलेजों के 75 पदों पर फिर शुरू हुई सीधी भर्ती, हाईकोर्ट की रोक के बाद भी जारी हुआ इंटरव्यू विज्ञापन

Medical College Recruitment Dispute: विभाग द्वारा प्रदेश के पांच नए प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 75 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है...

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Jun 05, 2026
Medical College
मेडिकल कॉलेज ( Photo - Patrika )

रायपुर@पीलूराम साहू। Medical College Recruitment: छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विभाग द्वारा प्रदेश के पांच नए प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 75 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का सीधा उल्लंघन मानी जा रही है।

पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने नियमित डॉक्टरों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि पदोन्नति (प्रमोशन) के कोटे वाले पदों पर सीधी भर्ती नहीं की जा सकती। इसके बावजूद, विभाग ने 35 प्रोफेसर और 40 एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए पुनः वॉक-इन इंटरव्यू का विज्ञापन जारी कर दिया है। पूर्व में 15-16 मई को आयोजित इंटरव्यू में डॉक्टरों ने रुचि नहीं दिखाई थी, जिसके बाद अब 15 जून को दोबारा इंटरव्यू तय किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि यह कदम 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' (अदालत की अवमानना) की श्रेणी में आता है।

अस्तित्व का संकट और अव्यवस्था

प्रदेश में इस साल कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी (जशपुर) और गीदम (दंतेवाड़ा) में नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना है। हालांकि, इनकी मान्यता पूरी तरह से फैकल्टी की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं पर निर्भर है। विभाग फैकल्टी के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कम वेतन और निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध जैसे कारणों से डॉक्टर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शामिल होने से कतरा रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में नेहरू मेडिकल कॉलेज से पांच डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।

पात्र होने के बावजूद प्रमोशन से वंचित डॉक्टर

एक ओर विभाग नए कॉलेजों में सीधी भर्ती के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर पहले से कार्यरत लगभग 296 डॉक्टर वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज समेत अन्य संस्थानों में 80 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है। वर्तमान में राज्य के 10 में से 4 मेडिकल कॉलेज प्रभारी डीन के भरोसे संचालित हो रहे हैं और नए कॉलेजों के लिए भी डीन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। विभागीय उपेक्षा के चलते डॉक्टरों में गहरा असंतोष व्याप्त है, जो भविष्य में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

Published on:
05 Jun 2026 08:52 am