
AI Ganesha Statue: गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच इस वर्ष प्रदेश में श्रद्धालुओं की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनी काल्पनिक, सुपरहीरो शैली और अजीब बाल स्वरूप वाली गणेश प्रतिमाओं का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ा था, लेकिन इस बार उस पर लगभग पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पत्रिका की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक संस्थाओं और पंडितों के विरोध के बाद अब पूरे प्रदेश में लोग पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश की पारंपरिक मूर्तियों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर दुर्ग जिले के प्रसिद्ध मूर्तिकार गांव थनौद में देखने को मिल रहा है। इस साल थनौद के मूर्तिकारों को जितने भी ऑर्डर मिले हैं, वे सभी 100 प्रतिशत पारंपरिक और शास्त्रसम्मत प्रतिमाओं के ही हैं।
पिछले साल एआई तकनीक से तैयार भगवान गणेश की काल्पनिक तस्वीरों, मॉडर्न कपड़ों और प्रयोगधर्मी रूपों को लेकर कई धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका स्पष्ट कहना था कि इस तरह के रूप पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। इस विरोध का सीधा असर इस साल के बाजार पर पड़ा है। अब गणेशोत्सव समितियां और आम श्रद्धालु भगवान के केवल मूल और प्राकृतिक स्वरूप की मूर्तियां ही खरीद रहे हैं।
थानौद के मूर्तिकारों ने बताया कि इस बार श्रद्धालु शास्त्रों में बताए गए रूप जैसे चार भुजाओं वाले (चतुर्भुज), एकदंत, लंबोदर, मूषक वाहन और रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजे भगवान गणेश की प्रतिमाओं की ही सबसे ज्यादा मांग कर रहे हैं। पहले जहां लोग मोबाइल में एआई से बनी काल्पनिक तस्वीरें लेकर आते थे और वैसी मूर्ति बनाने की जिद करते थे, वहीं इस बार यह पूरी तरह बंद है। लोगों का मानना है कि पूजा-अर्चना भगवान के पारंपरिक रूप में ही सच्ची श्रद्धा के साथ संभव है।
थानौद गांव की करीब 35 कार्यशालाओं (वर्कशॉप) में इस साल लगभग 5000 छोटी और 1500 से ज्यादा बड़ी प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। इनकी ऊंचाई 1 फीट से लेकर 20 फीट तक है। कीमत 200 रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक है। इस बार छोटी मूर्तियों के साथ-साथ भव्य और बड़ी प्रतिमाओं की मांग भी पहले से ज्यादा बढ़ी है।
थानौद में बनी मूर्तियों की मांग केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। यहां की बनी प्रतिमाएं महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और ओडिशा के कई बड़े शहरों में भेजी जा रही हैं। मुंबई, नागपुर, अमरावती, गोंदिया, बालाघाट, राउरकेला, झारसुगुड़ा और संबलपुर जैसे शहरों से इस साल बहुत बड़ी संख्या में ऑर्डर मिले हैं।
मूर्तिकार और चित्रकार संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष परम यादव ने बताया कि पिछले साल हुए विवाद को देखते हुए संघ ने त्योहार से पहले एक विशेष बैठक बुलाई थी। बैठक में फैसला लिया गया कि धार्मिक परंपरा और शास्त्रों के अनुसार ही मूर्तियां बनाएंगे। मूर्तियों को खूबसूरत और आकर्षक बनाया जाएगा, लेकिन धार्मिक आस्था और मर्यादा से कोई खिलवाड़ नहीं होगा। यदि कोई मूर्तिकार मर्यादा से हटकर गलत या काल्पनिक मूर्ति बनाएगा, तो संघ उस पर उचित कार्रवाई करेगा। रायपुर समेत पूरे प्रदेश में करीब 11000 मूर्तिकार सक्रिय हैं।