रायपुर

Chhattisgarh Rural Employment Initiative 2026: अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम, जानें कब से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था

Viksit Bharat GRAM G Act 2025: नई रोजगार गारंटी व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगी और मौजूदा मनरेगा प्रणाली की जगह लेगी। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 के बजाय 125 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी।
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Updated: 15 May 2026, 5:56 PM IST
Chhattisgarh Rural Employment Initiative 2026
नई रोजगार गारंटी व्यवस्था (फोटो सोर्स- DPR)

Chhattisgarh Rural Employment Initiative 2026: भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ

125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।

मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा।

सुगम संक्रमण की व्यवस्था

श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे।

विकसित भारत 2047 का आधार

यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी।

Updated on:
15 May 2026, 5:56 PM IST
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