रायपुर

महादेव सट्टा एप में 1.45 लाख करोड़ का काला धंधा, DGGI ने 97 लोगों से मांगा 40603 करोड़ GST

Online Betting Case: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में DGGI रायपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल समेत 97 लोगों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है।
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Updated: 28 Aug 2026, 6:52 AM IST
Mahadev Satta Scam
महादेव सट्टा ऐप का 1.45 लाख करोड़ का कारोबार (photo source- Patrika)

Mahadev Satta Scam: देश की सबसे बड़ी टैक्स चोरी के मामले में डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) रायपुर जोनल ऑफिस ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजीजीआई ने महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और सह-प्रमोटर रवि उप्पल समेत 97 लोगों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया है।

Mahadev App Case: 1.45 लाख करोड़ रुपए का कर योग्य कारोबार

जांच एजेंसी ने 1.45 लाख करोड़ रुपए के अवैध सट्टा कारोबार पर 40,603 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी रिकवरी के लिए यह कदम उठाया है। डीजीजीआई के डायरेक्टर जनरल सुजीत कुमार और जॉइंट डायरेक्टर शिवी सांगवान की जांच में सामने आया है कि 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 के बीच महादेव बेटिंग सिंडिकेट के जरिए करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए का कर योग्य कारोबार किया गया था। इस नेटवर्क से मिलने वाली कुल कमाई का 80 फीसदी हिस्सा सीधे सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल तक पहुंचता था।

वेबसाइटों का जाल और 2000 पैनलों का नेटवर्क

जांच अधिकारियों के मुताबिक, महादेव बुक केवल एक ऐप नहीं बल्कि ऑनलाइन बेटिंग और मनी गेमिंग का विशाल सिंडिकेट है। इसके तहत गोल्ड365, लेजर247, प्ले247, 11एक्सप्ले, बेटबुक247, सिल्वरएक्सचेंज, क्रिकेटबेट9 और स्काईएक्सचेंज जैसी दर्जनों वेबसाइटों के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस जैसे खेलों पर दांव लगवाया जाता था। पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए करीब 2000 पैनल ऑपरेटर सक्रिय थे। जांच में खुलासा हुआ कि एक पैनल में रोजाना औसतन 5 से 10 लाख रुपए कैश जमा होता था। इस आधार पर पूरे सिंडिकेट के जरिए रोजाना करीब 99 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेन-देन और कैश जमा कराया जाता था।

व्हाट्सऐप और बेनामी खातों से होता था लेन-देन

पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी खिलाड़ियों से सीधे व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें अलग-अलग पैनलों से जोड़कर फर्जी और बेनामी (थर्ड पार्टी) बैंक खातों में पैसे जमा कराए जाते थे। बदले में खिलाड़ियों को सट्टा खेलने के लिए डिजिटल पॉइंट या क्रेडिट दिए जाते थे।

टैक्स चोरी का पूरा गणित

1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2023: 3551722 करोड़ रुपए की जीएसटी बकाया।
1 अक्टूबर 2023 से 31 मार्च 2024: 5085.80 करोड़ रुपण्येकी जीएसटी बकाया।

राजस्व को हुआ करोड़ों का नुकसान

ऑनलाइन बेटिंग का इतना बड़ा कारोबार चलाने के बावजूद महादेव बुक का जीएसटी में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था और न ही कोई टैक्स जमा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के गेम्सक्राफ्ट फैसले के अनुसार पैसे दांव पर लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर 28 प्रतिशत जीएसटी देना अनिवार्य है। इसी के तहत अब प्रमोटरों, पैनल ऑपरेटरों और सहयोगियों से करोड़ों के राजस्व नुकसान की भरपाई कराने की कार्रवाई शुरू की गई है।

Updated on:
28 Aug 2026, 6:52 AM IST
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