रायपुर

गोल्डन ऑवर में मिल सकेगा हार्ट के मरीजों को इलाज! बिलासपुर-अंबिकापुर समेत 7 शहरों में शुरू होगी कैथ लैब की सुविधा

Heart Attack Golden Hour: छत्तीसगढ़ में हार्ट मरीजों को अब गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ी है। बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर, राजनांदगांव, दुर्ग और कांकेर में नई कैथ लैब यूनिट शुरू की जाएंगी।
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Aug 13, 2026
Chhattisgarh Cath Lab
बिलासपुर से कांकेर तक खुलेंगी नई कैथलैब (photo source- Patrika)

पीलू साहू/Chhattisgarh Cath Lab: प्रदेश के हार्ट मरीजों को अब गोल्डन ऑवर में इलाज मिल सकेगा। इससे कई गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर, राजनांदगांव, दुर्ग व कांकेर में कैथलैब यूनिट चालू की जाएगी। इससे हार्ट के मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी की जा सकेगी। रायपुर आने से पहले ही कई बार गंभीर मरीजों की मौत हो जाती है। वर्तमान में केवल पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसीआई में कैथ लैब यूनिट है, जहां हार्ट का इलाज व बायपास सर्जरी की जा रही है। सवा माह पहले जगदलपुर में पीपीपी मोड पर चल रहे अस्पताल में कैथ लैब यूनिट शुरू हुई है।

Government Hospital Cath Lab: तीन संविदा कार्डियोलॉजिस्ट सेवाएं दे रहे

बिलासपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खुल गया है, लेकिन कैथ लैब यूनिट चालू नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट हैं, जो ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी के लिए निजी अस्पताल ही सहारा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई कैथलैब यूनिट में संविदा पर कार्डियोलॉजिस्ट रखे जाएंगे। उन्हें प्रति केस के अनुसार मानदेय दिया जाएगा। हालांकि ये देखने वाली बात होगी कि कार्डियोलॉजिस्ट सेवाएं देने के लिए उपलब्ध हो पाएंगे या नहीं। प्रदेश में केवल एक रेगुलर कार्डियोलॉजिस्ट हैं। उनके साथ तीन संविदा कार्डियोलॉजिस्ट सेवाएं दे रहे हैं।

सरकारी व निजी अस्पतालों में ही कार्डियोलॉजिस्ट

रायपुर के सरकारी व निजी अस्पतालों में दो दर्जन के आसपास कार्डियोलॉजिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। भिलाई व बिलासपुर में भी हार्ट रोग विशेषज्ञ हैं। बाकी जिलों के मरीजों को इन्हीं शहर या रायपुर इलाज के लिए आना पड़ रहा है। दरअसल हार्ट अटैक के बाद तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है। इससे दूरदराज से आने वाले मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए प्रदेश के ज्यादातर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कैथलैब खुलने से हार्ट के मरीजों के लिए का काफी उपयोगी साबित होगा। डॉक्टरों के अनुसार जितनी जल्दी ब्लॉकेज खुलेगी, हार्ट को उतना कम नुकसान होगा।

हार्ट अटैक के लक्षण आते ही एक से डेढ़ घंटे में इलाज जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक का लक्षण आते ही एक से डेढ़ घंटे में इलाज शुरू होने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। हार्ट अटैक में कोरोनरी आर्टरी ब्लॉक हो जाती है, जिससे हार्ट मसल्स को ऑक्सीजन नहीं मिलती। ब्लॉकेज के 30 मिनट के अंदर ही नुकसान शुरू हो जाता है। पहले 10 मिनट में नुकसान कम होता है। एक-दो घंटे में अंदरूनी परतें खराब होने लगती हैं और 2 घंटे बाद 80 फीसदी तक मसल्स हमेशा के लिए खराब हो सकती है। आर्टरी को खोल दिया जाए तो हार्ट मसल्स को बचाया जा सकता है। क्लॉट घोलने वाली दवा, एंजियोप्लास्टी व स्टेंट इसी दरमियान सबसे असरदार होते हैं। समय पर इलाज से 90 फीसदी तक मरीजों की जान बच सकती है।

गोल्डन ऑवर में ये करना चाहिए?

  • सीने में भारीपन, दबाव, पसीना आना, सांस फूलना, बाएं हाथ या पीठ में दर्द, जी मिचलाना। महिलाओं व युवाओं में थकान, एसिडिटी जैसा लगना भी हो सकता है।
  • खुद गाड़ी न चलाएं। टोल फ्री नंबर 108 पर कॉल करें। एंबुलेंस में ईसीजी व दवा शुरू होने से मरीज को राहत मिल सकती है।
  • टाइट कपड़े ढीले करें, बिना डॉक्टर की सलाह कोई भी दवा न लें।

Heart Patients Treatment: कैथलैब यूनिट चालू होने के ये होंगे फायदे

  • हार्ट के मरीजों की एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी होने लगेगी।
  • पेसमेकर व बिना सर्जरी छेद बंद किए जा सकेंगे।
  • आयुष्मान भारत के पैकेज पर कैशलेस इलाज होने लगेगा।
  • नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसीआई में मरीजों का दबाव होगा कम।
  • गंभीर मरीजों को तत्काल मिलेगा इलाज, मौतें होंगी कम।

हार्ट के मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिलने लगे तो 90 फीसदी की जान बचाई जा सकती है। एक से डेढ़ घंटे में इलाज मिलने पर बेस्ट रिजल्ट आता है। देरी करने पर हार्ट की मसल्स मरने लगती हैं। देश में ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक के बाद अस्पताल पहुंचने के पहले हो जाती हैं। नई कैथलैब यूनिट खुलने से हार्ट के मरीजों को काफी फायदा होगा- डॉ. कृष्णकांत साहू, प्रोफेसर व एचओडी कार्डियक सर्जरी एसीआई

Updated on:
13 Aug 2026 09:12 am
Published on:
13 Aug 2026 09:12 am