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Chhattisgarh Literacy: पढ़ाई की कोई उम्र नहीं! 96 साल के तमन साव ने दी साक्षरता परीक्षा, 1.70 लाख लोग बने हिस्सा

ULLAS Nav Bharat Literacy Programme: छत्तीसगढ़ में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 20 हजार से अधिक गांव-वार्डों में परीक्षा आयोजित हुई। इसमें 1.70 लाख से ज्यादा शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान हासिल करना है।
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Chhattisgarh Literacy

Chhattisgarh Literacy: पढ़ाई की कोई उम्र नहीं!(photo-patrika canva create)

Chhattisgarh Literacy: छत्तीसगढ़ में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान आकलन परीक्षा आयोजित की गई। प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांवों और वार्डों में हुई इस परीक्षा में 1 लाख 70 हजार से ज्यादा शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि उम्र और सामाजिक परिस्थितियों की बाधाओं को पीछे छोड़कर अलग-अलग वर्गों के लोगों ने परीक्षा दी। बस्तर समेत दूरस्थ क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी शामिल हुए। इस अभियान का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए।

Chhattisgarh Literacy Mission: 821 पूर्व माओवादियों ने थामी कलम

इस परीक्षा की सबसे खास तस्वीर बस्तर संभाग से सामने आई, जहां हिंसा का रास्ता छोड़कर पुनर्वास की राह पर लौटे 821 पूर्व माओवादियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। इन लोगों ने बंदूक छोड़कर शिक्षा की ओर कदम बढ़ाते हुए साक्षरता परीक्षा दी। इसे दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भागीदारी के तौर पर देखा गया।

जेलों में बंद 423 कैदियों ने भी दी परीक्षा

साक्षरता अभियान से जेलों में बंद लोग भी जुड़े। प्रदेश की अलग-अलग जेलों में सजा काट रहे 423 कैदियों ने परीक्षा देकर बुनियादी शिक्षा हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसके अलावा 51 ट्रांसजेंडर परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा में हिस्सा लिया।

बीजापुर में सबसे ज्यादा परीक्षार्थी

प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांव और वार्डों में आयोजित परीक्षा में बीजापुर से सबसे ज्यादा 31,250 शिक्षार्थी शामिल हुए। वहीं कोरिया जिले से 250 शिक्षार्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा में अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली।

96 साल के तमन साव ने भी दी परीक्षा

कोरबा जिले के 96 वर्षीय तमन साव भी परीक्षा देने पहुंचे। उन्होंने उम्र की सीमा को पीछे छोड़ते हुए साक्षरता परीक्षा में हिस्सा लिया। उनकी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

केंद्र के अधिकारी ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण

परीक्षा के दौरान केंद्र के शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव चरणजीत तनेजा ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और शिक्षार्थियों की भागीदारी का जायजा लिया।

क्या है उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम?

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रव्यापी योजना है। इसका उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन वयस्कों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत पढ़ने-लिखने के साथ-साथ दैनिक जीवन में जरूरी संख्यात्मक ज्ञान, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय सेवाओं का उपयोग, कानूनी अधिकार और चुनावी जागरूकता जैसी जानकारी भी दी जाती है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर

कार्यक्रम में व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षार्थियों को रोजगार से जुड़े बुनियादी हुनर उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है। इस तरह साक्षरता अभियान को केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित न रखकर रोजमर्रा की जिंदगी और रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।